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Explainer: भारत का सबसे बड़ा ईंधन सप्लायर खुद क्यों तेल आयात पर निर्भर हुआ, यूक्रेन युद्ध से कितना नुकसान?

Sun, 05 Jul 2026 06:13 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 05 Jul 2026 06:13 AM IST
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सार
एक ऐसा देश जो दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में गिना जाता है, आज वह अपने ही पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देख रहा है। यह हैरान करने वाली तस्वीर रूस की है, जहां यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने देश के भीतर एक बड़ा और अभूतपूर्व ईंधन संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन इस संकट के बीच जो सबसे चौंकाने वाली खबर सामने आई है, वह भारत से जुड़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी तेल रिफाइनरी, 'नायरा एनर्जी', अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों (ट्रेडर्स) के जरिए रूस को पेट्रोल की आपूर्ति कर रही है। आइये जानते हैं कि रूस जैसे बड़े तेल उत्पादक देश को इसकी जरूरत क्यों पड़ी है...
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Russia Ukraine War Losses for Moscow as Fuel Rationing and Oil Import from India takes Centre stage Energy and
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हुआ नुकसान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू हुए अब चार साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इस जंग में अब तक रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर कब्जा भी कर लिया है। हालांकि, जैसे-जैसे युद्ध के दिन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे रूस की कब्जे वाले इलाकों में नियंत्रण छूटने की बातें भी सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं रूस को सैनिकों और जरूरी आपूर्तियों का भीषण नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। 




हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रूस की रिफाइनरियों पर हुए यूक्रेन के हमलों ने मॉस्को को भारी नुकसान पहुंचाया और ऊर्जा जरूरतों के लिए उसे निर्भर बना दिया है। स्थिति इतनी खराब है कि रूस को भारत की एक निजी रिफाइनरी- नायरा एनर्जी से तेल आयात कराना पड़ रहा है। इतना ही नहीं एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस को अपने सैनिकों के स्तर पर भी काफी नुकसान हुआ है और उसके करीब चार गुना जवान इस युद्ध में मारे जा चुके हैं। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर रूस-यूक्रेन युद्ध में अभी क्या स्थिति है? दोनों देशों को इस युद्ध में अब तक कितना नुकसान हो चुका है? रूस को हालिया समय में ऐसी क्या स्थिति झेलनी पड़ी है कि दूसरे देशों को तेल निर्यात करने वाला यह देश अब खुद तेल आयात के लिए मजबूर हो गया? आइये जानते हैं...


रूस-यूक्रेन संघर्ष में ताजा हालात क्या हैं?

रूस-यूक्रेन संघर्ष जुलाई 2026 तक एक बहुत ही गंभीर और विनाशकारी चरण में पहुंच गया है, जहां दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है।


1. युद्ध के मैदान की स्थिति और रूस की बढ़त

रूसी सेना ने दावा किया है कि उसने पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क क्षेत्र के एक अम औद्योगिक शहर कोस्टियांटिनिव्का पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है। यह शहर स्लोवियांस्क-क्रेमेटर्सक रक्षा केंद्र पर कब्जा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, यूक्रेन ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

रूस ने यह भी दावा किया है कि लुहांस्क क्षेत्र अब पूरी तरह से उसके नियंत्रण में है और वह खारकीव, सूमी और निप्रॉपेट्रोस क्षेत्रों में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाने पर काम कर रहा है। इस बीच रूस ने कीव और सूमी पर भारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें कई नागरिकों की जान गई है और इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

2. दोनों पक्षों को भारी सैन्य नुकसान

अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 20 लाख से अधिक सैनिक हताहत (मृत और घायल) हो चुके हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस को हुआ सैन्य नुकसान यूक्रेन के मुकाबले करीब तीन गुना है। 


दोनों देशों को युद्ध में अब तक कितना नुकसान?

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दोनों देशों को जान-माल का विनाशकारी नुकसान हुआ है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में इसे लेकर अलग-अलग दावे भी किए गए हैं...

रूस को हुआ नुकसान
  • सीएसआईएस के मुताबिक, रूस के कुल 14 लाख सैनिक हताहत (मृत, घायल या लापता) हुए हैं, जिनमें से 4,00,000 से 4,50,000 सैनिक मारे जा चुके हैं। 
  • ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि रूस के लगभग 5,00,000 सैनिक मारे गए हैं और इसके दोगुने सैनिक घायल या लापता हैं।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के 2.30 लाख सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह संख्या 4.17 से 5.09 लाख के बीच आंकी है।
इसके अलावा, अग्रिम मोर्चे पर भेजे गए कम से कम 920 रूसी ड्रोन ऑपरेटर भी मारे गए हैं।

यूक्रेन को हुआ नुकसान
  • सीएसआईएस के मुताबिक, यूक्रेन के लगभग 5,25,000 से 6,25,000 सैनिक हताहत हुए हैं। इनमें से 1,25,000 से 1,50,000 सैनिकों की मौत हुई है। इनमें यूक्रेन के 1,50,000 सैनिक मारे गए हैं और लगभग 4,75,000 सैनिक घायल या लापता हैं।
  • डच सैन्य खुफिया के अनुसार यूक्रेन के मृत, घायल और लापता सैनिकों की कुल संख्या लगभग 5,00,000 हो सकती है। वहीं, एक यूक्रेनी वेबसाइट के अनुमान के मुताबिक मरने वाले सैनिकों की संख्या 2,13,000 तक हो सकती है।
  • यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने फरवरी 2026 में 55,000 यूक्रेनी सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी, साथ ही यह भी माना था कि बड़ी संख्या में सैनिक लापता हैं। 

रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हुआ नुकसान।
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हुआ नुकसान। - फोटो : अमर उजाला
सीएसआईएस के मुताबिक, युद्ध की भयानकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका के लड़े गए सभी युद्ध में हुई मौतों की तुलना में रूस में मरने वाले सैनिकों की संख्या चार गुना ज्यादा है। इस विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि इस साल (2026) की पहली छमाही तक रूस और यूक्रेन के हताहतों का अनुपात लगभग 8:1 हो गया है। यानी एक यूक्रेनी सैनिक के नुकसान पर आठ रूसी सैनिक हताहत हुए हैं।


यूक्रेन ने रूस के ढांचों को कितना नुकसान पहुंचाया?

इस युद्ध में रूस को सैन्य नुकसान के साथ-साथ आधारभूत ढांचे का भी भीषण नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे भारी नुकसान उसके ऊर्जा और तेल शोधन क्षेत्र में हुआ है। बताया गया है कि बीते चार महीने में यूक्रेन ने रूस को वित्तीय स्तर पर नुकसान पहुंचाना शुरू किया है। इसके लिए उसने लंबी दूरी के ड्रोनों का इस्तेमाल करके रूस के ऊर्जा ढांचे को व्यापक स्तर पर खत्म किया है। 

1. तेल प्रतिष्ठानों पर 50 से ज्यादा हमले 

मार्च से लेकर अब तक यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों, तेल डिपो, टर्मिनलों और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर 50 से अधिक ड्रोन हमले किए हैं। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के चलते रूस के पेट्रोल उत्पादन में लगभग 17% की कमी आई है। 2025 में जहां 1.03 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन होता था, वह अब घटकर 8,50,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है। 


2. रिफाइनिंग क्षमता को खत्म करने की कोशिश

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन लगातार हमलों की वजह से रूस की लगभग एक-चौथाई (25%) तेल रिफाइनिंग क्षमता खत्म हो गई है। वहीं, यूक्रेन का दावा है कि उसने जुलाई की शुरुआत तक रूस की 40% से ज्यादा तेल रिफाइनिंग क्षमता को खत्म कर दिया है। इस नुकसान को लेकर रूस में माहौल काफी तनावपूर्ण है। खासकर आम लोगों को ईंधन की राशनिंग की वजह से खासा दिक्कतें हो रही हैं। 

3. यूक्रेन की हमलों की जद में आए प्रमुख ऊर्जा केंद्र

यूक्रेन ने बाल्टिक और काला सागर के तेल निर्यात टर्मिनलों, मध्य रूस और साइबेरिया के सैन्य औद्योगिक संयंत्रों पर अचूक हमले किए हैं। इसके अलावा, सेंट पीटर्सबर्ग के एक तेल टर्मिनल, मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, बश्कोर्तोस्तान क्षेत्र की प्रमुख ऊफा रिफाइनरी, और काला सागर स्थित टुआपसे रिफाइनरी, जिस पर चार बार हमला हो चुका है, को भारी नुकसान पहुंचाया है।
 

4. आपूर्ति मार्गों और रसद का कटना भी जारी

अजोव सागर के उत्तर में रूसी आपूर्ति मार्गों को बाधित किया गया है। इसके अलावा, क्रीमिया को ईंधन की आपूर्ति करने वाले ट्रकों पर किए गए मिडिल-स्ट्राइक ड्रोन हमलों की वजह से वहां ब्लैकआउट यानी बिजली की समस्या पैदा हो गई है। साथ ही ईंधन की भारी कमी पैदा हुई है। इसके चलते वहां आपातकाल तक की नौबत आई है।

आधारभूत ढांचे के इसी तबाही की वजह से दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक होने के बावजूद, रूस को मौजूदा समय में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत और बेलारूस जैसे देशों से पेट्रोल का आयात करना पड़ रहा है।

रूस के हमलों में यूक्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर को कितना नुकसान?

यूक्रेन को रूसी हमलों की वजह से न सिर्फ क्षेत्रीय, बल्कि  बुनियादी ढांचे का नुकसान उठाना पड़ा है। 


1. क्षेत्रीय नुकसान और शहरों पर कब्जा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि रूस ने पूरे लुहांस्क क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है। इसके साथ ही रूस की सेना ने दावा किया है कि उसने पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक शहर कोस्टियांटिनिव्का पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। हालांकि यूक्रेन ने इन दावों को गलत करार दिया है।

यूक्रेन ने पोक्रोव्स्क शहर को भी लगभग पूरी तरह से खो दिया है, जिस पर रूस कई महीनों से कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। क्रेमलिन के मुताबिक, रूस ने इस साल (2026) की शुरुआत से अब तक 133 यूक्रेनी बस्तियों पर कब्जा कर लिया है। दावा किया गया है कि रूसी सेना खारकीव, सूमी और निप्रॉपेट्रोस क्षेत्रों के सीमावर्ती इलाकों में लगातार कब्जा करके एक सुरक्षा क्षेत्र (बफर जोन) बनाने की दिशा में काम कर रही है।

2. इन्फ्रास्ट्रक्चर का विनाश

युद्ध से पहले 66,000 की आबादी और कांच-उद्योग के लिए मशहूर कोस्टियांटिनिव्का शहर मलबे के ढेर और गड्ढों वाले बंजर इलाके में तब्दील हो चुका है। रूस ने यहां ड्रोन्स, तोपखाने और विनाशकारी ग्लाइड बमों का इस्तेमाल किया है। एक यूक्रेनी विश्लेषक के मुताबिक, इस शहर की कोई भी इमारत ऐसी नहीं बची है जिस पर रूसी हवाई हमला न हुआ हो।

इसके अलावा रूस ने उत्तरी शहर- सूमी, पोल्टावा और अन्य क्षेत्रों में तबाही मचाई है। सूमी के बीचों-बीच भारी ग्लाइड बम गिराने से यह क्षेत्र लगातार रूसी हमलों का शिकार हो रहा है। इसके अलावा पोल्टावा और निप्रॉपेट्रोस क्षेत्रों के बुनियादी ढांचों पर भी जानबूझकर मिसाइल हमले किए गए हैं। कीव पर रूस के भारी इस्कंदर मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। 


3. ईंधन और रसद ठिकानों पर हमले

रूसी सेना ने डिनिप्रो नदी के किनारे पर स्थित पेट्रोल पंपों और ईंधन ठिकानों को खत्म करने का अभियान चलाया है, ताकि यूक्रेनी सेना और आम नागरिकों की रसद और आपूर्ति को पूरी तरह से काटा जा सके। कुल मिलाकर, रूस की रणनीति में अब केवल मोर्चे पर लड़ना ही नहीं, बल्कि भारी हथियारों से यूक्रेनी शहरों और लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से मलबे में बदलना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोस्टियांटिनिव्का का रूस के हाथों में जाना यूक्रेन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह द्रुज्किव्का और क्रेमेटर्सक जैसे अन्य प्रमुख शहरों तक रूस के पहुंचने का रास्ता खोलता है।

4. बिजली उत्पादन क्षमता का भारी विनाश

2024 के मध्य तक आते-आते, यूक्रेन के पास अपनी युद्ध-पूर्व बिजली उत्पादन क्षमता का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही बचा था। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (आरयूएसआई) के मुताबिक, मध्य जून 2024 तक रूसी हमलों ने यूक्रेन के घरेलू बिजली उत्पादन का कुल नौ गीगावाट नष्ट कर दिया था। 2023 की सर्दियों में यूक्रेन की अधिकतम खपत 18 गीगावाट थी, जिसका अर्थ है कि यूक्रेन की कम-से-कम आधी उत्पादन क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। यूक्रेन ने कई बार इसके पुनर्निर्माण की कोशिश की है। हालांकि, रूस से ऊर्जा रक्षा से जुड़े समझौतों को न निभा पाने की वजह से उसे बार-बार तबाही देखनी पड़ रही थी। 


5. प्रमुख बांधों और पावर प्लांट्स की तबाही

कखोवका बांध: दक्षिणी यूक्रेन में स्थित इस प्रमुख जल-नियंत्रण ढांचे और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जिससे विनाशकारी बाढ़ आ चुकी है। कीव हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट के ऊर्जा संयंत्रों को भी मिसाइलों से निशाना बनाया गया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हुआ नुकसान।
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक हुआ नुकसान। - फोटो : अमर उजाला
थर्मल पावर प्लांट्स: अप्रैल 2024 में एक भारी हमले में कीव क्षेत्र का ट्रिपिलस्का थर्मल पावर प्लांट पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके अलावा खार्किव का दूसरा सबसे बड़ा प्लांट टीईसी-5 और जमिव्स्का थर्मल पावर प्लांट भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो रूस ने यूक्रेन के बिजली ग्रिड को ठप करने के लिए इसे व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया है, जिसके कारण यूक्रेन वर्तमान में ऊर्जा के गहरे संकट से गुजर रहा है और अपनी बची हुई ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) से आयात पर निर्भर है।


यूक्रेन के हमलों में हुए नुकसान से कैसे निपट रहा रूस?

यूक्रेन के लगातार ड्रोन्स और मिसाइल हमलों (विशेषकर तेल रिफाइनरियों और बुनियादी ढांचे पर) से हुए भारी नुकसान से निपटने के लिए रूस कई आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक कदम उठा रहा है।
 

1. ईंधन संकट से निपटने के लिए

अन्य देशों से पेट्रोल का आयात: अपनी 25% से 40% तक नष्ट हो चुकी तेल शोधन क्षमता की भरपाई के लिए, दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक होने के बावजूद रूस पहली बार समुद्री मार्ग से भारत से पेट्रोल आयात कर रहा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने भारत से कम से कम 60,000 से 80,000 मीट्रिक टन पेट्रोल आयात किया है। इसके अलावा बेलारूस से रेल के जरिये होने वाले आयात को तीन गुना कर दिया गया है। कुल मिलाकर रूस की योजना विभिन्न देशों से हर महीने 4,00,000 टन पेट्रोल आयात करने की है।

ईंधन की राशनिंग और निर्यात पर प्रतिबंध: रूस ने पेट्रोल और जेट ईंधन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और डीजल के निर्यात पर भी रोक लगाने पर विचार कर रहा है। कृषि सीजन को सुरक्षित रखने के लिए कई क्षेत्रों में ईंधन की सख्त राशनिंग लागू की गई है, जहां एक गाड़ी को केवल 20-30 लीटर पेट्रोल ही दिया जा रहा है और डिब्बों में पेट्रोल भरना प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

ये भी पढ़ें: Explainer: रूस में ईंधन संकट के बीच क्या भारत की रिफाइनरी मॉस्को भेज रही पेट्रोल? समझिए क्या है पूरा मामला

पेट्रोल की गुणवत्ता के नियमों में ढील: हालांकि, इस बीच घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने ईंधन-गुणवत्ता के नियमों में अस्थायी ढील दी है, जिससे बाजार में निम्न श्रेणी का पेट्रोल बेचा जा रहा है। इसके अलावा रूसी संसद ने टैक्स नियमों में संशोधन किए हैं और ईंधन आयात पर सब्सिडी देने की पेशकश की है, जिसे भारतीय डिलीवरी की कीमतों और लागत से जोड़ा गया है। 

राष्ट्रपति पुतिन ने क्षतिग्रस्त तेल रिफाइनरियों की जल्द से जल्द मरम्मत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने इन हमलों के कारण देश में पैदा हुए तेल संकट और समस्याओं की बात स्वीकारी है, लेकिन देश की जनता के असंतोष और घबराहट को शांत करने के लिए वे इसे अस्थायी बता रहे हैं। 


2. सैन्य और रक्षात्मक कदम

वायु रक्षा क्षेत्र का विस्तार: यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को रोकने के लिए पुतिन ने वायु रक्षा प्रणालियों का उत्पादन तेजी से और बड़े पैमाने पर बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन के छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोनों के झुंड को रोकने के लिए रूस को कम से कम 6,000 पंतशीर मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, जो उसके पास मौजूदा समय में नहीं हैं।

यूक्रेन पर विनाशकारी जवाबी हमले: रूस अपनी रणनीति के तहत यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड, बंदरगाहों, अनाज टर्मिनलों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर इस्कंदर मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों से बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। साथ ही उसके ऊर्जा ढांचों को नुकसान पहुंचा रहा है, ताकि यूक्रेनी सेना की बुनियादी जरूरत ही पूरी न हो पाए।

छात्रों की सेना में भर्ती: अग्रिम मोर्चे पर मारे गए सैनिकों की जगह भरने के लिए रूस अब विश्वविद्यालयों, तकनीकी कॉलेजों और वोकेशनल स्कूलों के छात्रों को ड्रोन ऑपरेटर के रूप में भर्ती कर रहा है। इसके लिए युवाओं को पहले वर्ष में 50 लाख रूबल (लगभग 57,000 डॉलर) तक का वेतन, सुरक्षित तैनाती का वादा और पढ़ाई में अन्य लाभों का लालच दिया जा रहा है।

चीन में सैन्य प्रशिक्षण: लीक हुए यूरोपीय खुफिया दस्तावेजों के मुताबिक, युद्ध के लिए रूसी सेना के कई सौ सैनिकों को गुप्त रूप से चीन में चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) की ओर से प्रशिक्षित किया गया है, जिन्हें बाद में यूक्रेन में तैनात किया गया है।

व्लादिमीर पुतिन vs वोलोदिमीर जेलेंस्की।
व्लादिमीर पुतिन vs वोलोदिमीर जेलेंस्की। - फोटो : अमर उजाला

रूसी हमलों से निपटने के लिए क्या तरकीब आजमा रहा यूक्रेन?

रूस के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए विनाशकारी नुकसान से उबरने के लिए यूक्रेन रक्षात्मक, आक्रामक और रणनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।


1. रूस के अंदर घुसकर जवाबी हमले की रणनीति

रूस की सैन्य रसद और अर्थव्यवस्था पर चोट करने के लिए यूक्रेन ने एक असममित रणनीति पनाई है, जिसके तहत वह लंबी दूरी के ड्रोनों का उपयोग करके सीधे रूस की तेल रिफाइनरियों, डिपो और ऊर्जा ठिकानों को नष्ट कर रहा है। इसके अलावा, यूक्रेन लगातार अमेरिका और यूरोपीय देशों पर दबाव डाल रहा है कि उसे रूस के अंदर स्थित सैन्य ठिकानों (जहां से हमले किए जाते हैं) पर लंबी दूरी के हथियारों से हमला करने की इजाजत दी जाए।


2. वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करना

हमलों को रोकने के लिए यूक्रेन पश्चिमी देशों से हासिल उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों, जैसे- अमेरिका के पैट्रियट और जर्मनी के आईरिस-टी डिफेंस सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। हाल ही में हुए भारी हमलों के दौरान, यूक्रेन ने रूसी क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए पहली बार अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों का भी सफलतापूर्वक उपयोग किया है।

3. बुनियादी ढांचे की तुरंत मरम्मत और विकेंद्रीकरण

यूक्रेनी इंजीनियर क्षतिग्रस्त पावर ग्रिड और संयंत्रों की मरम्मत के लिए लगातार युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। भविष्य के हमलों के प्रभाव को कम करने के लिए, यूक्रेन अब अपनी ऊर्जा ग्रिड को विकेंद्रीकृत करने पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों की ओर रुख किया जा रहा है, क्योंकि बड़े पावर प्लांट्स की तुलना में इन्हें बमबारी से निशाना बनाना ज्यादा मुश्किल है।


4. ऊर्जा का आयात और फ्लोटिंग पावर प्लांट

बिजली के संकट से निपटने के लिए यूक्रेन यूरोपीय संघ (ईयू) से बिजली का आयात कर रहा है, जिसमें हंगरी उसका सबसे बड़ा भागीदार है। इसके अलावा यूक्रेन ने समुद्र में तैरते बिजलीघरों के जरिए बिजली आपूर्ति प्राप्त करने के लिए तुर्किये की कंपनी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 


5. ऊर्जा की बचत और अंतरराष्ट्रीय मदद

सर्दियों के दौरान बिजली की कमी को दूर करने के लिए पूरे देश में 5 करोड़ एलईईडी लाइटबल्ब बांटने का अभियान चलाया गया है, जिससे लगभग 1 गीगावाट तक बिजली बचाई जा सकेगी। इसके अलावा जेनरेशन ऑफ होप अभियान के तहत यूरोपीय शहरों से सैकड़ों जनरेटर मंगाए गए हैं और विश्व बैंक और अन्य संस्थाओं से बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों डॉलर का वित्तीय फंड प्राप्त किया गया है।
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