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Russia-Ukraine War: क्या तैयार हो गई है रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत की जमीन?

Mon, 14 Nov 2022 02:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 14 Nov 2022 02:57 PM IST
सार

Russia-Ukraine War: अमेरिका का आकलन है कि पुतिन की सत्ता निकट भविष्य में खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए पुतिन प्रशासन से बातचीत की संभावना को ठुकरा देना वाजिब नहीं होगा। खास कर उस समय जबकि यूरोप में यूक्रेन को मदद जारी रखने के सवाल पर सब्र टूट रहा है...

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Russia-Ukraine War: After the leaving Russian troops from Kherson, now there is a possibility of a talks
Russia-Ukraine War: vladimir putin and volodymyr zelenskyy - फोटो : Social media

विस्तार

क्या खेरसोन इलाके से रूसी फौज की वापसी के बाद अब यूक्रेन मसले का बातचीत के हल निकलने की संभावना बन रही है? कूटनीतिक हलकों में ये सवाल काफी चर्चित है। रूस ले कर पश्चिमी रणनीतिक विश्लेषकों तक ने कहा है कि ऐसा होने के संकेत अब मजबूत हुए हैं।  

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बीते सितंबर में रूस ने यूक्रेन के दोनाबास इलाके में मौजूद दोनेत्स्क और लुहांस्क गणराज्यों को अपने में मिला लिया था। इसके तहत जो क्षेत्र रूस का हिस्सा बना लिए गए, उनमें खेरसोन और जेपोरिझझिया भी शामिल थे। तब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की ने उस रूसी कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। उन्होंने एक ऐसा आदेश जारी कर दिया था, जिसके तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार से किसी प्रकार की वार्ता को अवैध घोषित कर दिया गया। तब जेलेंस्की ने कहा था- यूक्रेन रूस से बातचीत के लिए तैयार होगा, लेकिन वार्ता किसी अन्य रूसी राष्ट्रपति के साथ ही होगी।

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अमेरिकी रणनीतिक वेबसाइट रेस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक जेलेंसकी के उस आदेश से अमेरिका के लिए असहज स्थिति पैदा हुई। अमेरिका का आकलन है कि पुतिन की सत्ता निकट भविष्य में खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए पुतिन प्रशासन से बातचीत की संभावना को ठुकरा देना वाजिब नहीं होगा। खास कर उस समय जबकि यूरोप में यूक्रेन को मदद जारी रखने के सवाल पर सब्र टूट रहा है।

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अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने तब जेलेंस्की से साफ कहा था कि वे रूस से बातचीत के लिए लगाई शर्त को छोड़ दें और पुतिन प्रशासन से संवाद कायम करने की कोशिश करें। खबरों के अनुसार इसके लिए अमेरिका ने जेलेंस्की पर लगातार दबाव बनाया। इसी सिलसिले में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने यूक्रेन की राजधानी कीव की यात्रा की।

इस बीच ऐसी कई खबरें पश्चिमी मीडिया में आई हैं कि सुलिवान लगातार रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के साथ संपर्क में हैं।

बीते आठ नवंबर को जेलेंस्की के रुख में नाटकीय बदलाव दिखा। उन्होंने कहा कि उनकी शर्तें पूरी की जाएं, तो वे पुतिन प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उनकी नई शर्तों में शामिल हैं- यूक्रेन के इलाके उसे लौटाना, यूक्रेन को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति, हर कथित युद्ध अपराधी को सजा देना और यह गारंटी कि रूस फिर कभी यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया से कहा- हम यह नहीं कह रहे हैं कि जेलेंस्की तुरंत बातचीत शुरू कर दें। हमारी समझ में रूस की गतिविधियों को देखते हुए अभी इसके लिए उचित समय नहीं है।

लेकिन रेस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट के विश्लेषण में कहा गया है कि जेलेंस्की की शर्तें और अमेरिका का बयान जनमत को शांत करने के लिए हैं। इस विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि रूसी फौज खेरसोन से लौट रही है, इस खबर की पहली पुष्टि नौ नवंबर को हुई। इससे जेलेंस्की को अपनी जीत दिखाने का मौका मिलेगा। इससे रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत शुरू होने की संभावना बन सकती है।

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