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'अमित्रों' के खिलाफ मोर्चा: रूसी गैस की सप्लाई अचानक रुकने की आशंका से ईयू में कोहराम

Thu, 28 Apr 2022 04:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 28 Apr 2022 04:06 PM IST
सार

रूस का कहना है कि उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिका और यूरोप उसके धन को जब्त कर लिए जाने के कारण डॉलर और यूरो उसके किसी काम के नहीं रह गए हैं। ऐसे में जो ‘अमित्र’ देश रुबल में भुगतान करेंगे, उन्हें वह सप्लाई जारी रखेगा...

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Russia had already announced that it would stop the supply of unfriendly countries which would not pay in rubles for its oil and gas
क्रूड ऑयल - फोटो : social media

विस्तार

पोलैंड और बल्गारिया को प्राकृतिक गैस की सप्लाई रोकने का एलान कर रूस ने एक नया मोर्चा खोल दिया है। रूस ने पहले ही ये एलान किया था कि जो ‘अमित्र’ देश उसके तेल और गैस के बदले भुगतान रुबल में नहीं करेंगे, उन्हें वह इनकी सप्लाई रोक देगा। पोलैंड और बल्गारिया ने रुबल में भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में रूसी ऊर्जा कंपनी गैजप्रोम ने बुधवार को इन देशों को गैस की आपूर्ति रोकने की घोषणा कर दी।

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सदमे में यूरोप

यूरोपीय राजधानियों में बीते 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण के बाद इसे रूस के सबसे आक्रामक आर्थिक हमले के रूप में देखा गया है। यूरोपियन आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने इस कदम को ब्लैकमेल बताया है। डेर लियेन कहा कि फिलहाल यूरोपियन यूनियन (ईयू) के दूसरे सदस्य देश रूस से ज्यादा गैस खरीद कर पौलैंड और बल्गारिया की जरूरतों को पूरा करेंगे। इस बीच रूस की तरफ से बताया गया है कि ईयू के तकरीबन दस सदस्य देशों ने उसके साथ रुबल में भुगतान का समझौता कर लिया है।

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इसके बावजूद रूस के ताजा कदम से पूरे यूरोप में आशंकाएं गहरा गई हैं। वहां इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि अगर रूस ने ऐसा ही कदम बाकी देशों के बारे में उठाया, तो उसका मुकाबला कैसे किया जाएगा। ईयू की गैस की 45 फीसदी जरूरत रूस पूरी करता है। गैस इंफ्रास्ट्रक्चर यूरोप नाम की संस्था के मुताबिक ईयू के गैस भंडारों में अभी उनकी क्षमता के 32 फीसदी के बराबर गैस है। पिछले नवंबर में ईयू ने अपने भंडारों की 80 फीसदी क्षमता तक गैस रखने का फैसला किया था। उस लिहाज से अभी ईयू काफी कमजोर स्थिति में है।
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बेरेनबर्ग एजेंसी से जुड़े विश्लेषकों के मुताबिक अगर रूस अचानक पूरे ईयू की गैस सप्लाई रोक देता है, तब भी अगली सर्दियों तक ईयू देश अपना काम चला लेंगे। लेकिन उसके बाद संकट न हो, इसके लिए ईयू को तुरंत वैकल्पिक कदम उठाने की जरूरत है। ईयू ने इस साल के अंत तक रूसी आपूर्ति में 66 फीसदी कटौती का एलान किया था। साथ ही उसने कहा था कि 2027 तक र्ईंधन के मामले में वह रूस पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर लेगा। वैकल्पिक स्रोत के तौर पर ईयू अमेरिका से लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) खरीदने का फैसला किया है। लेकिन उसे लाने के लिए अभी टर्मिनल बनाने का काम चल रहा है।

खपत घटाने का आह्वान

उधर रूस का कहना है कि उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिका और यूरोप उसके धन को जब्त कर लिए जाने के कारण डॉलर और यूरो उसके किसी काम के नहीं रह गए हैं। ऐसे में जो ‘अमित्र’ देश रुबल में भुगतान करेंगे, उन्हें वह सप्लाई जारी रखेगा। लेकिन इस बात से यूरोपीय देश आश्वस्त नहीं हैं।



थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप में ऊर्जा संबंधी विशेषज्ञ हेनिंग ग्लोयस्टीन ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘जर्मनी और इटली को चाहिए कि वे अपने यहां गैस उपभोग में बदलाव लाएं। ऐसा वे घरों में बॉयलर की जगह वॉटर हीट पंपों के इस्तेमाल से कर सकते हैं। साथ ही लोगों से कहना होगा कि वे हीटिंग और कूलिंग में कम गैस खर्च करें।’

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