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अमेरिका की मुद्रा निगरानी सूची से बाहर हुआ रुपया 

Thu, 30 May 2019 06:40 AM IST
Avdhesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 30 May 2019 06:40 AM IST
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Rupee out of american monetary surveillance list
donald trump
भारत में बड़े आर्थिक सुधारों पर भरोसा जताते हुए अमेरिका ने अपनी मुद्रा निगरानी सूची से रुपये को हटा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि भारत सरकार के कुछ कदमों से मौद्रिक नीति को लेकर उसकी आशंकाएं दूर हो गई हैं। लिहाजा भारतीय मुद्रा को निगरानी सूची से हटाने का फैसला किया है।
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ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं विनिमय दर नीतियों पर तैयार रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश करते हुए कहा कि भारतीय मुद्रा विनिमय में अब स्थिरता आ रही है। ऐसे में अमेरिका को उसके साथ व्यापारिक जोखिम नहीं रहा है। रिपोर्ट में आधार बनाए गए तीन मानदंडों में से सिर्फ में एक (द्विपक्षीय अधिशेष) में ही भारत को प्रतिकूल पाया गया है। भारत के अलावा स्विटजरलैंड को भी मुद्रा निगरानी से राहत दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और स्विटजरलैंड दोनों देशों के विदेशी मुद्रा क्रय मेें 2018 में गिरावट दर्ज की गई थी। इस दौरान दोनों ही देशों को एकतरफा दखल देने का जिम्मेदार नहीं पाया गया है।
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ये देश अब भी शामिल : अमेरिका को जिन देशों की विदेशी विनिमय दर पर शक होता है, उनकी मुद्रा को निगरानी सूची में डालता है। इसमें अभी चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, इटली, आयरलैंड, सिंगापुर, मलयेशिया और वियतनाम जैसे बड़े व्यापारिक सहयोगी देश शामिल हैं। 
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इन कदमों से मिली राहत

भारत को पहली बार मई 2018 में अमेरिकी मुद्रा निगरानी सूची में शामिल किया था। अमेरिका ने कहा कि 2017 में विदेशी मुद्रा भंडार की खरीद के बाद 2018 में भारत सरकार ने लगातार रिजर्व बेचे। इससे विदेशी मुद्रा भंडार की कुल बिक्री जीडीपी के 1.7 फीसदी के बराबर पहुंच गई। इतना ही नहीं भारत के पास अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के हिसाब से पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। भारतीय रिजर्व बैंक की शुद्ध बिक्री से जून 2018 तक की चार तिमाहियों में विदेशी मुद्रा की शुद्ध खरीद कम होकर 4 अरब डॉलर यानी जीडीपी की महज 0.2 प्रतिशत रह गई है।


चीन को दी नसीहत 

अमेरिका ने चीन की मुद्रा को निगरानी सूची से बाहर करने से इनकार करते हुए उसे सुधार की नसीहत दी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीव नुचिन ने कहा कि चीन अपनी लगातार कमजोर होती करंसी को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए, क्योंकि पिछले कुछ समय से चीन की मुद्रा डॉलर के मुकाबले 8 फीसदी तक नीचे गिरी है। इसके अलावा अमेरिका के साथ चीन का व्यापार अधिशेष भी चार तिमाहियों में 419 अरब डॉलर रहा है। बावजूद इसके चीन को मुद्रा से छेड़छाड़ करने वाला देश घोषित करने से अमेरिका ने इनकार कर दिया है।
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