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UN: रुचिरा कंबोज बोलीं- AI के दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की जरूरत, टिकाऊ विकास के लिए यह अहम
Sat, 15 Apr 2023 02:13 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र।
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 15 Apr 2023 02:13 PM IST
सार
रुचिरा कंबोज ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का अगर सही तरीके से उपयोग किया जाता है तो यह अत्यधिक समृद्धि और अवसर पैदा कर सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि एआई सिस्टम का दुरुपयोग न हो और डिजिटल सुपर इंटेलिजेंस की उन्नति मानवता के साथ सहजीवी हो।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज।
- फोटो : ANI
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थाई मिशन ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रौद्योगिकी विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर विचार करने के लिए शुक्रवार को यूएन मुख्यालय परिसर में एक विचार गोष्ठि का आयोजन किया। इस परिचर्चा में ऐसे लोकतांत्रिक सिद्धान्तों को प्रोत्साहन देने में एआई समेत उन प्रौद्योगिकीय नवाचारों और प्रथाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया, जो एक समावेशी, विकासोन्मुख, टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाज को मजबूत कर सकें।
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डॉ बीआर अंबेडकर की 132वीं जयंती के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एनजीओ फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होरिजन (NGO Foundation for Human Horizon) के साथ साझेदारी में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा कार्यक्रम की मेजबानी की गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने आंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा, "हम पहले और अंत तक भारतीय हैं"।
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रुचिरा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग और इसके पूर्वाग्रहों द्वारा निर्देशित होने को लेकर अपना पक्ष रखा। रुचिरा कंबोज ने अपने संबोधन में कहा कि सितंबर 2023 में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की मध्यावधि समीक्षा होनी है, जिसके मद्देनजर कार्यक्रम का विषय बेहद प्रासंगिक है। कंबोज ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का अगर सही तरीके से उपयोग किया जाता है तो यह अत्यधिक समृद्धि और अवसर पैदा कर सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि एआई सिस्टम का दुरुपयोग न हो और डिजिटल सुपर इंटेलिजेंस की उन्नति मानवता के साथ सहजीवी हो।
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विशेष कार्यक्रम 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर सोशल जस्टिस' में बोलते हुए रुचिरा कंबोज ने इस बात को रेखांकित किया कि अगर सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो एआई अत्यधिक समृद्धि और अवसर उत्पन्न कर सकता है, जिससे अत्यधिक उत्पादक और कुशल अर्थव्यवस्थाएं बन सकती हैं।
टिकाऊ विकास के लिए अहम
रुचिरा कंबोज ने कहा कि यह समय टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा को मजबूती प्रदान करने का है ताकि सर्वजन के लिए सामाजिक व आर्थिक प्रगति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने भारत में सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में एआई के प्रयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कृषि में एआई ऐल्गोरिथम विकसित किए हैं, जिनके जरिए कृषि संबंधी समाचार साझा किए जाते हैं। इससे किसानों को अपनी फसलों के लिए बेहतर जानकारी के साथ निर्णय लेने में मदद मिलती है और हानि में कमी आना संभव हुआ है। वहीं, स्वास्थ्य देखभाल में एआई के जरिए उन इलाकों में रोग निदान व उपचार सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी रही है।
अनकों लाभ, लेकिन सतर्कता जरूरी
संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की प्रतिनिधि उरसुला विनहॉवेन ने एआई के प्रयोग में निहित लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके जरिए निर्धनता से जुड़ी जानकारी अंतरिक्ष से जुटाई जा सकती है और प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा, एक स्मार्टफोन की मदद से डायबिटीज व त्वचा कैंसर का पता लगाना, आवश्यकता अनुसार पढ़ाई-लिखाई संबंधी सहायता प्रदान करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना संभव है।
उन्होंने कहा हर दिन, एआई के प्रयोग से जुड़ी अनगिनत सम्भावनाएं नज़र आती हैं, लेकिन सतर्कता बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि इससे रोजगार हानि, ऊर्जा खपत, निर्णय निर्धारण में पूर्वाग्रह, डिजिटल दरारों के और तेज होने समेत अन्य जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।