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कब्र से निकाला गया अराफात का शव
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 27 Nov 2012 11:40 AM IST
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फलस्तीनी अधिकारियों के अनुसार पूर्व फलस्तीनी नेता यासिर अराफात का शव कब्र से निकाल लिया गया है। दशकों तक फलस्तीनियों का नेतृत्व करने वाले अराफात की पेरिस में 2004 में मौत हो गई थी।
उनकी मौत के कुछ ही महीनों बाद ये विवाद छिड़ गया था कि अराफात के परिवार के सदस्यों ने उसी वक़्त उनकी मौत पर सवाल उठाए थे और उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। अराफात ने 35 वर्षों तक फलस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) का नेतृत्व किया था और साल 1996 में फलस्तीनी प्राधिकरण के पहले राष्ट्रपति भी बने थे।
वैज्ञानिकों की टीमों की अलग-अलग जांच
उन्हें जहर दिया गया था या नहीं। मेडिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार फ्रांस में यासिर अराफात को स्ट्रोक हुआ था।
लेकिन जब एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के दौरान स्विट्ज़रलैंड के विशेषज्ञों ने उनकी चीज़ों पर रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 पाया तो इसी साल अगस्त में फ्रांस ने उनकी मौत के बारे में हत्या की जांच शुरु कर दी। उसके बाद पश्चिमी तट में रमल्लाह में पिछले महीने उनकी क़ब्र को 'सील' कर दिया गया।
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फलस्तीनी ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख और अराफात की मौत की जांच कर रही फलस्तीनी समिति के अध्यक्ष तौफ़ीक तिरावी ने मीडिया को बताया कि शव को निकालने के बाद फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड और रूस के वैज्ञानिक उनके नमूने लेंगे और हर टीम अपनी स्वतंत्र जांच और विश्लेषण करेगी। इसके बाद शव को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दोबारा दफ़न कर दिया जाएगा।
अराफात की विधवा सोहा ने अराफात के शव को दफ़नाने के बाद पोस्ट मॉर्टम होने पर पहले आपत्ति जताई थी लेकिन बाद में ख़ुद ही फलस्तीनी प्रशासन से शव को क़ब्र से निकालने का आग्रह किया था ताकि सच सामने आ सके।
हालांकि कई फलस्तीनियों का मानना है कि अराफात को इसराइल ने ज़हर देकर मारा था, क्योंकि वो शांति के रास्ते में रुकावट बन गए थे। इसराइल ने इस मामले में किसी प्रकार का हाथ होने से इनकार किया है।
पोलोनियम– 210 क्या है?
--अति रेडियोधर्मी और जहरीला पदार्थ।
--खाने में बेहद कम मात्रा में पाया जाता है।
--शरीर में प्राकृतिक तरीके से पैदा होता है।
--ज्यादा मात्रा में शरीर में जाने पर खतरनाक।
--छूने से नहीं, खाए जाने से खतरा।
--तंबाकू में भी पाया जाता है।
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उनकी मौत के कुछ ही महीनों बाद ये विवाद छिड़ गया था कि अराफात के परिवार के सदस्यों ने उसी वक़्त उनकी मौत पर सवाल उठाए थे और उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। अराफात ने 35 वर्षों तक फलस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) का नेतृत्व किया था और साल 1996 में फलस्तीनी प्राधिकरण के पहले राष्ट्रपति भी बने थे।
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वैज्ञानिकों की टीमों की अलग-अलग जांच
उन्हें जहर दिया गया था या नहीं। मेडिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार फ्रांस में यासिर अराफात को स्ट्रोक हुआ था।
लेकिन जब एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के दौरान स्विट्ज़रलैंड के विशेषज्ञों ने उनकी चीज़ों पर रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 पाया तो इसी साल अगस्त में फ्रांस ने उनकी मौत के बारे में हत्या की जांच शुरु कर दी। उसके बाद पश्चिमी तट में रमल्लाह में पिछले महीने उनकी क़ब्र को 'सील' कर दिया गया।
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फलस्तीनी ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख और अराफात की मौत की जांच कर रही फलस्तीनी समिति के अध्यक्ष तौफ़ीक तिरावी ने मीडिया को बताया कि शव को निकालने के बाद फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड और रूस के वैज्ञानिक उनके नमूने लेंगे और हर टीम अपनी स्वतंत्र जांच और विश्लेषण करेगी। इसके बाद शव को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दोबारा दफ़न कर दिया जाएगा।
अराफात की विधवा सोहा ने अराफात के शव को दफ़नाने के बाद पोस्ट मॉर्टम होने पर पहले आपत्ति जताई थी लेकिन बाद में ख़ुद ही फलस्तीनी प्रशासन से शव को क़ब्र से निकालने का आग्रह किया था ताकि सच सामने आ सके।
हालांकि कई फलस्तीनियों का मानना है कि अराफात को इसराइल ने ज़हर देकर मारा था, क्योंकि वो शांति के रास्ते में रुकावट बन गए थे। इसराइल ने इस मामले में किसी प्रकार का हाथ होने से इनकार किया है।
पोलोनियम– 210 क्या है?
--अति रेडियोधर्मी और जहरीला पदार्थ।
--खाने में बेहद कम मात्रा में पाया जाता है।
--शरीर में प्राकृतिक तरीके से पैदा होता है।
--ज्यादा मात्रा में शरीर में जाने पर खतरनाक।
--छूने से नहीं, खाए जाने से खतरा।
--तंबाकू में भी पाया जाता है।