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एक नए ड्रग के शिकंजे में फंस रही है दुनिया

Thu, 27 Jun 2013 07:10 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 27 Jun 2013 07:10 PM IST
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world is trapped in clutches of a new drug

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में एक नए तरह के ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ा है।

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक ‘लीगल हाई’ नामक इस ड्रग ने कई देशों की सरकारों को सांसत में डाला हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र के ऑफ़िस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) के मुताबिक हेरोइन और कोकीन जैसी परंपरागत ड्रग्स की खपत तो स्थिर है, लेकिन ‘लीगल हाई’ की मांग और खपत लगातार बढ़ रही है।

यूएनओडीसी की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक लीगल हाई इंटरनेट के जरिए दुनिया भर के बाज़ारों में अपनी जगह मज़बूत कर रहा है।

'लीगल हाई ड्रग्स'
लीगल हाई ड्रग्स आखिर कौन सा ड्रग्स है?

अगर आप ने इसका नाम नहीं सुना हो तो हम आपको बता दें कि इसे न्यू सायकोएक्टिव सब्सटांस (एनपीएस) के नाम से भी जाना जाता है।

यूएनओडीसी के मुताबिक एनपीएस के बढ़ते इस्तेमाल से दुनिया भर में स्वास्थ्य चुनौतियां बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट में इस ड्रग्स के बारे में चिंता जताते हुए लिखा गया है, “ये ड्रग खुले तौर पर बेचा जा रहा है, इंटरनेट पर इसकी बिक्री हो रही है। इस लिहाज से परंपरागत ड्रग के मुकाबले ये ज़्यादा ख़तरनाक है।”
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इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि यह ड्रग कई बाज़ारों में अलग-अलग स्थानीय नाम से बिकता है।

इस नए ड्रग्स को लेकर कोई कानून नहीं है, ऐसे में ड्रग कारोबारी भी इसे बाज़ार में बेचने में ज़्यादा उत्साह दिखा रहे हैं।

दोगुनी हुई खपत
इस ड्रग्स का पहले पहल इस्तेमाल तो एशियाई देशों में शुरू हुआ लेकिन अब यह दुनिया भर में बिक रहा है।

इसका सबसे बड़ा बाज़ार अमेरिका है। रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ के मुक़ाबले अमेरिकी युवा इस ड्रग्स की लगभग दोगुनी खपत कर रहे हैं।

यूरोपीय संघ के देशों में ब्रिटेन में इस ड्रग का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा हो रहा है। यूएनओडीसी के मुताबिक 15 से 24 साल की उम्र वाले करीब सात लाख ब्रितानी युवा इस ड्रग का इस्तेमाल कर चुके हैं।
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यूरोपीय मॉनिटरिंग सेंटर फॉर ड्रग्स एंड ड्रग एडिक्शन की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल इस ड्रग्स के इस्तेमाल के 73 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 2011 में 49 मामले सामने आए थे।

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