आखिर क्यों बड़े देशों से पंगा ले रहा है उत्तर कोरिया, ये हैं असली वजह
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उत्तर कोरिया ने एक बार फिर जापान के ऊपर से मिसाइल परीक्षण करके पूरी दुनिया को दहला दिया है। खास बात ये है कि उत्तर कोरिया की ये कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के उन प्रतिबंधों के बाद सामने आई है जब दो दिन पहले ही उसने इस बागी मुल्क के खिलाफ कुछ कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने जापान और उसके सहयोगी मुल्कों को उकसाने वाली कार्रवाई की हो। इससे पहले भी उत्तर कोरिया ने कई बार जापान के ऊपर से मिसाइल परीक्षण किया है। बीते 29 अगस्त को भी उत्तर कोरिया ने जापान के ऊपर से एक एंटी बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था।
उसके कुछ दिन बाद ही 3 सितंबर को उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने काफी शक्तिशाली हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया, जो धरती के नीचे किया गया था। इसे आम एटम बमों से नौ गुना शक्तिशाली माना गया था।
उत्तर कोरिया की निरंकुशता का आलम ये है कि इस साल फरवरी से अब तक वह कुल 15 परीक्षण कर चुका है जिसमें उसने 20 से ज्यादा मिसाइल छोड़ी हैं। उत्तर कोरिया की इस हरकत पर अब जापान और अमेरिका के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र ने आधी रात को आपात बैठक बुलाई है। जिसमें उत्तर कोरिया के खिलाफ कुछ और कड़े कदमों की घोषणा हो सकती है। ऐसे में अहम सवाल ये है कि आखिर क्यों उत्तर कोरिया लगातार पूरी दुनिया से पंगा ले रहा है क्यों वह बाकी मुल्कों को अपना दुश्मन बनाने पर तुला हुआ है?
उत्तर कोरिया के बहाने अमेरिका के वर्चस्व को तोड़ना चाहते हैं चीन और रूस
जानकारों की मानें तो उत्तर कोरिया की यह निरंकुशता यूं ही नहीं है, उसके पीछे रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों का समर्थन भी है। जो उत्तर कोरिया के बहाने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के दशकों पुराने वर्चस्व को तोड़ना चाहते हैं। खासकर अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन को।
यही कारण है कि जब भी अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की बात करते हैं तभी चीन और रूस इसके विरोध में खड़े हो जाते हैं। दो दिन पहले भी जब अमेरिका की अपील पर संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध लगाए तो रूस और चीन खुलकर इसके विरोध में उतर आए।
नतीजा ये हुआ कि ट्रंप उत्तर कोरिया के खिलाफ जितने कड़े प्रतिबंध चाहते थे उतने में सफलता नहीं मिल पाई। अगर ट्रंप की चली होती तो उत्तर कोरिया के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाता। उत्तर कोरिया भी जानता है कि चीन और रूस के बेजा समर्थन की वजह से अमेरिका और दूसरे देशों को खुलकर उसके खिलाफ युद्ध की घोषणा करना मुश्किल होगा।
खुद को संप्रभु और ताकतवर राष्ट्र घोषित करने की कवायद
प्योंगयोंग के लगातार परमाणु और मिसाइल परीक्षण करने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि तानाशाह किम जोंग उन अपने देश उत्तर कोरिया को एक पूरी तरह संप्रभु और ताकतवर राष्ट्र साबित करना चाहता है, एक ऐसा देश जो दुनिया में किसी से नहीं डरता और अमेरिका जापान जैसे विकसित देशों को भी सीधे चुनौती देता है।
कभी एक दौर में क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो अमेरिका के लिए ऐसा ही सिरदर्द रह चुके हैं जिन्हें वह कभी नहीं हरा पाया। उस दौर में तो क्यूबा के साथ मुश्किल से ही कोई देश खड़ा होता था लेकिन तब भी अमेरिका कभी उस छोटे से मुल्क को नहीं झुका पाया।
हालांकि क्यूबा ने कभी खुलकर अमेरिका को ऐसी चुनौती नहीं दी लेकिन वह उसने कभी घुटने भी नहीं टेके। अब उसी राह पर किम जोंग उन चल पड़ा है जो मानता है कि वह चाहे कुछ भी करे दुनिया की मौजूदा गोलबंदी और सुस्त बड़ी दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के दौर में अमेरिका उस पर हमला करने का जोखिम मोल नहीं लेगा। खुद इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति स्पष्ट नहीं है जो उत्तर कोरिया के मुद्दे पर कभी दो कदम आगे तो कभी एक कदम पीछे की रणनीति पर काम कर रहे हैं।