इबोलाः 1000 मरे, प्रायोगिक दवा की अनुमति
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की एक समिति ने फ़ैसला किया है कि इबोला वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए एक्सपेरिमेंटल या प्रायोगिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। संगठन के मुताबिक़ इबोला से अब तक 1,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
संगठन के एथिक्स स्पेशलिस्ट पैनल का कहना है कि मौजूदा हालात में ऐसी दवाओं का प्रयोग करना नैतिक है जिनके असर और विपरीत प्रभाव का पहले से पता नहीं हैं।
पैनल ने कहा कि जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे, पीड़ित की मंज़ूरी हो और यह वचन दिया जाए कि मरीज़ की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखी जाएगी तब तक नए तरीक़े से इलाज स्वीकार्य है।
चार अफ़्रीकी देशों में मौतें
अफ़्रीका के चार देश - लाइबेरिया, गिनी, सियरा लियोन और नाइजीरिया इस साल फ़रवरी से इसकी चपेट में हैं। अफ़्रीकी देश लाइबेरिया से मेड्रिड लाए गए, इबोला से संक्रमित एक स्पेनी पादरी, की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
दो अमरीकी सहायता कर्मियों का प्रायोगिक दवाओं से इलाज किया जा रहा है। इनकी हालत सुधरती लग रही है।
उधर इबोला से सबसे ज़्यादा प्रभावित लाइबेरिया पहले ही अमरीका की दी जा रही नई दवाओं का इस्तेमाल करने की तैयारी कर चुका है।