फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   who is al-shabab group?

कीनिया हमलाः 68 मौतों का जिम्मेदार अल-शबाब है कौन?

Mon, 23 Sep 2013 03:14 PM IST
Updated Mon, 23 Sep 2013 03:14 PM IST
विज्ञापन
who is al-shabab group?

कीनिया के एक शॉपिंग मॉल पर हमले के लिए जिम्मेदार सोमालियाई संगठन अल-शबाब का संबंध अल-क़ायदा से है। अल-शबाब को दक्षिण और मध्य सोमालिया के सभी शहरों से खदेड़ा जा चुका है, पर अभी भी उसका खतरा और वजूद कायम है।

विज्ञापन


अल-शबाब में कौन शामिल?
अल-शबाब अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है नौजवान। अल-शबाब का जन्म 2006 में इस्लामिक कोर्ट यूनियन की कट्टरपंथी युवा शाखा के रूप में हुआ था। इस्लामिक कोर्ट यूनियन को सोमालिया की मौजूदा संघीय सरकार ने इथियोपियाई सेना की मदद से हटा दिया था।
विज्ञापन


इस दौरान संघीय सरकार और इथियोपियाई सेना से टक्कर लेने का जिम्मा अल-शबाब ने संभाला। कई ऐसी रिपोर्ट हैं, जो बताती हैं कि अल-शबाब की मदद के लिए विदेशी जेहादी सोमालिया पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अल-शबाब पर एक नजर
सोमालियाई संगठन अल-शबाब का संबंध अल-कायदा से है। अल-शबाब अब गुरिल्ला युद्ध पर अधिक फोकस कर रहा है। इस समूह का नेता अहमद आब्दी गोडाने है। इरीट्रिया अल-शबाब का एकमात्र क्षेत्रीय सहयोगी है। इसने अपने नियंत्रण वाले इलाकों में शरीयत कानून का कड़ा रूप सख़्ती से लागू किया है। इसमें चोरों के हाथ काट डालना और व्यभिचार की आरोपी महिला की पत्थर मारकर हत्या करना शामिल है।

सोमालिया में अल-शबाब कहां?
भले ही सोमालिया के शहरों और कस्बों से कब्जा खत्म हो गया है, लेकिन कई ग्रामीण इलाक़ों में आज भी उसकी हुक़ूमत चलती है।

उसे अगस्त 2011 में राजधानी मोगादिशू से पूरी तरह खदेड़ दिया गया था और सितंबर 2012 में उसे महत्वपूर्ण बंदरगाह किस्मायो भी छोड़ना पड़ा। इस चरमपंथी संगठन के लिए किस्मायो काफी महत्वपूर्ण था।

सरकारी सैन्य बल की मदद कर रहे अफ्रीकी संघ ने इन दोनों शहरों में जीत की प्रशंसा की, लेकिन अल-शबाब मोगादिशू और दूसरे शहरों में लगातार आत्मघाती हमले करता रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि अल-शबाब अफ्रीकी संघ की सैन्य ताक़त का मुक़ाबला करने के लिए अब गुरिल्ला युद्ध पर अधिक फ़ोकस कर रहा है।

2011 में सोमालिया में कीनिया की कार्रवाई शुरू होने के बाद इस संगठन को कई मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ा रहा है।

कीनिया का आरोप है कि अल-शबाब के लड़ाके पर्यटकों और उसके सैनिकों का अपहरण कर रहे हैं। अल-शबाब को हराने के लिए कीनिया अब अफ्रीकी संघ के अभियान में शामिल है।

नेता कौन?
सोमालिया में पिछले दो दशकों से गृहयुद्ध जैसे हालात हैं, जिससे वहां की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस समूह का नेता अहमद आब्दी गोडाने है। आमतौर पर उसे मुख्तार अबू ज़ुबैर के नाम से जाना जाता है और वह सोमालीलैंड से अलग हुए उत्तरी क्षेत्र से है।

ऐसी भी ख़बर है कि उसके नेतृत्व को दक्षिणी लोगों से चुनौती मिल रही है, हालांकि अल-शबाब ने ऐसी ख़बरों से इनकार किया है।

समूह में सबसे अधिक लड़ाके दक्षिण से ही हैं, जिनकी संख्या 7,000 से 9,000 के बीच है।

गोडाने को सार्वजनिक स्थलों पर बहुत कम देखा जाता है। उसके पूर्ववर्ती आदीन हाशी आयरो की मौत 2008 में अमेरिका हवाई हमले में हो गई थी।

विदेशी संपर्क
अल-शबाब फरवरी 2012 में अल-क़ायदा से जुड़ा। एक संयुक्त वीडियो में अल-शबाब के नेता अहमद अब्दी गोडाने ने कहा, वह अल-क़ायदा प्रमुख अयमान अल-ज़वाहिरी के "आदेशों मानने का वचन देते हैं।"

दोनों समूह लंबे समय से साथ काम करते रहे हैं। पिछले साल अल-शबाब के अधिकारियों को एक व्यक्ति के साथ देखा गया, जिसके बारे में दावा किया गया था कि वह अल-क़ायदा से जुड़ा था।

अमेरिका के अधिकारियों का मानना है कि ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल क़ायदा ने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से अपने कदम पीछे हटाए हैं।

ऐसे में बड़ी संख्या में अल क़ायदा के लड़ाके सोमालिया की ओर रुख करेंगे।

सोमालिया से बाहर हमले
एक अनुमान के मुताबिक अल-शबाब में करीब 9,000 लड़ाके शामिल हैं। अल-शबाब का दावा है कि उसने नैरोबी में 21 सितंबर को एक जानलेवा हमला किया, जिसमें कम से कम 68 लोगों की मौत हुई है।

वह यूगांडा की राजधानी कंपाला में दोहरे आत्मघाती बम धमाके के लिए भी जिम्मेदार है, जिसमें 76 लोग मारे गए थे।

ये लोग टेलीविज़न पर 2010 का फ़ुटबाल वर्ल्ड कप फ़ाइनल मैच देख रहे थे। विश्लेषकों का कहना है कि अल-शबाब के चरमपंथी अक्सर कीनिया आते-जाते रहे हैं और कई बार उन्होंने राजधानी नैरोबी में इलाज भी कराया है।

मददगार कौन
इरीट्रिया एकमात्र क्षेत्रीय सहयोगी है। हालांकि वह इन दावों से हमेशा इनकार करता रहा है कि वह अल-शबाब को हथियारों की आपूर्ति करता है।


इरीट्रिया, इथोपिया का प्रभाव रोकने के लिए अल-शबाब का समर्थन करता है। इथोपिया और इरीट्रिया के बीच शत्रुता है।

अमेरिका के समर्थन से इथोपिया ने 2006 में सोमालिया में सैनिक भेजे थे, ताकि इस्लामिक लड़ाकों को हराया जा सके।

हालांकि जानमाल के भारी नुकसान के बाद 2009 में इथोपियाई सेना को वापस बुला लिया गया। हालांकि इथोपिया ने एक बार फिर 2011 में अफ्रीकी यूनियन की अगुवाई में हस्तक्षेप किया।

सोमाली सरकार की स्थिति
सोमालिया के राष्ट्रपति पूर्व शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हसन शेख़ मोहम्मद हैं। उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में एक शांति प्रक्रिया के तहत नवनिर्वाचित सोमाली संसद ने किया।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति शेख़ शरीफ़ शेख़ अहमद को हराया है। शेख़ अहमद पर आरोप थे कि उनके तीन वर्षीय शासनकाल में भ्रष्टाचार काफी बढ़ गया था।

अल-शबाब ने यह कहते हुए इस प्रक्रिया का आलोचना की थी कि यह सोमालिया पर कब्ज़े की विदेशी कोशिश है।

सोमालिया काफी हद तक असफल राज्य है। यहां पिछले बीस साल से प्रभावशाली राष्ट्रीय सरकार नहीं है और ज़्यादातर हिस्सा युद्ध से जूझ रहा है।

ऐसे वातावरण में अल-शबाब को सोमाली लोगों का विश्वास हासिल करने में कामयाबी मिली। उसने लोगों को सुरक्षा देने का वादा किया।

हालांकि उसकी लोकप्रियता को तब झटका लगा जब उसने 2011 में सूखे और अकाल के दौरान पश्चिमी खाद्य सहायता लेने से इनकार कर दिया।

अल-शबाब इस्लाम के वहाबी संस्करण की वकालत करता है, जबकि ज्यादातर सोमाली सूफ़ी हैं। अल-शबाब ने बड़ी संख्या में सूफ़ी धार्मिक स्थल तोड़े हैं।

युद्ध और तनाव के लंबे दौर के बाद सोमालिया में शांति की उम्मीद दिखाई दे रही है। शायद सोमालिया पिछले दो दशक के अंधकार से खुद को उबार पाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed