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जहां वाइन पीकर मस्त हो जाते हैं लंगूर

Sun, 28 Oct 2012 09:25 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sun, 28 Oct 2012 09:25 AM IST
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where baboons drink wine

केपटाउन आबादी के हिसाब से दक्षिण अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा शहर है जहां लंगूर भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ये लंगूर, आबादी वाले इलाकों में अपने भोजन की तलाश में आते हैं। यहीं से इनसानों और लंगूरों के बीच टकराव की शुरुआत होती है। लेकिन लंगूरों को संरक्षित प्रजाति का दर्जा हासिल है।

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केपटाउन में अक्सर सुनाई पड़नेवाली गोलियों की आवाज़ सुनकर ऐसा लग सकता है कि कोई जंग लड़ी जा रही है, लेकिन ये वो गोलियां हैं जिनकी आवाज़ सुनकर लंगूर भाग खड़े होते हैं। ये उन चंद तरीक़ों में से एक है जिन्हें केपटाउन से लंगूरों को भगाने के लिए आज़माया जा रहा है। फील्ड रेंजर फिलानी मेयो बताते हैं, ''हमारा काम इन लंगूरों की निगरानी करना है, ये देखना है कि वो कहां आ-जा रहे हैं। हमारा काम इन्हें रिहाइशी इलाकों से दूर रखना है।''
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फील्ड रेंजर फिलानी मेयो पूरा दिन इन लंगूरों पर नज़र रखते हैं। वो इनमें से कई को बख़ूबी पहचानने लगे हैं और उन्होंने इनका नामकरण भी कर दिया है। इन लंगूरों में खास तरह की डिवाइस लगाई गई है जिससे पता चलता है कि वो कहां हैं और क्या कर रहे हैं। फिलानी बताते हैं कि लंगूर की लोकेशन पता चलने के बाद उसे वहां से भगाया जाता है ताकि वो स्थानीय लोगों के लिए किसी तरह की सिरदर्दी पैदा न कर सकें।
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वे कहते हैं, ''हम इन लंगूरों को रिहाइशी इलाकों से जंगलों की तरफ भेजने की कोशिश करते हैं। हमारी दोहरी ज़िम्मेदारी है। एक तरफ हमें इनसानों को लंगूरों से बचाना है, दूसरी ओर ये भी तय करना है कि लंगूरों को किसी तरह का नुक़सान न हो।''

बढ़ती नजदीकी, बढ़ता ख़तरा

केपटाउन की आबादी बढ़ने से शहर का विस्तार हुआ और शहर का विस्तार होने से लंगूरों का कुदरती आवास सिकुड़ता गया। नतीजा ये हुआ कि लंगूर पहले इनसानों से डरते थे, अब उनके क़रीब आने लगे।

भोजन की तलाश में ये लंगूर अब खाने-पीने की जगहों पर धावा बोलने लगे हैं और कई बार वो आक्रामक भी हो जाते हैं। एक अन्य रेंजर मार्क डफेल्स कहते हैं कि पर्यटकों ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। वे कहते हैं, ''पर्यटक आते हैं और चले जाते हैं। उन्हें लगता है कि लंगूर भूखे हैं, वो इन्हें खाने की चीजें देते हैं, इससे लंगूर इनसानों के और करीब आने लगते हैं। लेकिन ये ठीक नहीं है।''

लंगूरों का शहर की ओर आना इनसानों के लिए ख़तरनाक हो सकता है। लेकिन खुद लंगूरों के लिए भी शहर की ओर आना अच्छा नहीं है। रेंजर फिलानी बताते हैं, ''शहर आकर ये लंगूर ऐसी चीजें खा-पी रहे हैं जो उनके लिए ठीक नहीं है। जैसे ये लंगूर वाइन का बॉक्स उठाकर ले जाते हैं और वाइन पी भी लेते हैं। वाइन पीकर लंगूर मस्त हो जाते हैं और फिर चलने-फिरने के लायक नहीं बचते। आपको मेरी बात पर यकीन नहीं होगा, पर हमने ऐसे कई मामले देखे हैं।''

फ़िलिप रिचर्डसन, जानवरों के व्यवहार विशेषज्ञ हैं। वे लंगूरों को शहर से दूर रखने की इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि रेंजर जिन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनसे लंगूरों को समझ में आएगा कि उनका कुदरती घर कहां है।

वो कहते हैं, ''लंगूरों को भगाने के लिए हम एक खास तरह का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें कुछ चीजों की पहचान करा रहे हैं जिनसे उन्हें डरकर भागना है। जैसे उन्होंने कोई पेपर उठाया और हमने तभी गोली चलाई, हर बार यही घटनाक्रम दोहराया तो लंगूर को शायद इस बात का अहसास हो जाएगा कि ऐसा करने से गोली चलती है और वो वैसा करना बंद करके सोच सकता है कि ये जगह हमारे लिए सही नहीं है।''


दक्षिण अफ्रीका के कानून के मुताबिक़ लंगूर को मारा नहीं जा सकता, उन्हें बचाया जा रहा है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि कोई लंगूर किसी इनसान के लिए बहुत आक्रामक हो जाता है, तब उसे न चाहते हुए भी मारना पड़ता है। उम्मीद है कि इनसानों के प्रति जो कुदरती डर इन लंगूरों के मन से निकल गया है, उसे दोबारा पैदा किया जा सकेगा और फिर उन्हें मारने की नौबत नहीं आएगी।

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