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कंबोडिया में बिना विपक्ष के चुनाव में पड़े वोट, पश्चिमी देशों ने कहा- दिखावा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:48 AM IST
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कंबोडिया में रविवार को आम चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। मुख्य विपक्षी दल के विघटन के बाद हो रहे चुनाव में 33 साल से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री हुन सेन की जीत तकरीबन तय मानी जा रही है। साथ ही देश में एक पार्टी शासन का रास्ता भी साफ हो गया है। गृह युद्ध का सामना कर रहे कंबोडिया में हुन सेन 1985 से ही सत्ता में हैं।
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प्रधानमंत्री हुन सेन की जीत तय मानी जा रही है
65 वर्षीय हुन सेन पर आरोप है कि जीत हासिल करने लिए उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों, स्वतंत्र मीडिया, सिविल सोसायटी पर अपना समर्थन करने का दबाव डाला। एक वोटर सिम चंथा ने कहा कि प्रधानमंत्री हुन सेन देश के रक्षक हैं। मैंने अपना वोट उन्हें और कंबोडियन पीपुल्स पार्टी को दिया। वहीं सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता ने चुनाव में भारी जीत का दावा किया।
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प्रतिबंधित विपक्षी दल कंबोडिया नेशनल रेस्क्यू पार्टी के पूर्व प्रमुख खेम चान वांनक ने कहा कि मैंने अपना वोट नहीं डाला और घर पर सोया रहा। मेरे कई दोस्तों ने भी वोट नहीं डाला। चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कई पश्चिमी देशों ने चुनाव में मदद के प्रस्ताव को वापस ले लिया। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को महज दिखावा और धोखा करार दिया।
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मुख्य विपक्षी दल कंबोडिया नेशनल रेस्क्यू पार्टी की गैरमौजूदगी में 19 छोटी पार्टी हुन सेन की सत्तारूढ़ कंबोडियन पीपुल्स पार्टी को टक्कर दे रही हैं लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह देश लोगों और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि चुनाव खत्म होने से दो घंटे पहले तक 70 फीसदी से ज्यादा वोट पड़ चुके थे जोकि 2013 में पड़े 69 फीसदी वोटों से ज्यादा है।
देश में 83 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। देशभर में करीब 23 हजार मतदान केंद्र बनाए गए। सोशल मीडिया पर खराब बैलेट पेपर की कई तस्वीर वायरल हो रही हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये तस्वीरें समर्थकों द्वारा भेजी गई हैं लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हुन सेन ने अपनी पत्नी के साथ वोट डाला और स्याही गई उंगली फोटोग्राफरों को दिखाई। सत्तारूढ़ पार्टी 1998 के बाद से सभी चुनाव जीत रही है।