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कमजोर नहीं, वीडियो गेम से ठीक होगी आंख

Sun, 28 Apr 2013 04:40 PM IST
मिचेल रॉबर्ट्स
मिचेल रॉबर्ट्स Updated Sun, 28 Apr 2013 04:40 PM IST
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video games will be treat eyes

कनाडा के डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने सुस्त-आंख के इलाज का नया और मज़ेदार तरीका ढूंढ निकाला है- और यह है टेटरिस वीडियो गेम खेलना।

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मैकगिल विश्वविद्यालय के डॉक्टरों की टीम का कहना है कि, एक बिल्डिंग के गिरते हुए टुकड़ों को एक लाइन में लगाए जाने वाले, इस खेल से दोनों आंखों को साथ काम करना सिखाया जा सकता है।
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चिकित्सा की भाषा में एमब्लिओपिया कही जाने वाली सुस्त-आंख की समस्या पचास में से एक बच्चे को होती है।

यह समस्या तब होती है जब एक आंख में दृष्टि का ठीक से विकास नहीं हो पाता। अक्सर इस आंखं में भेंगापन भी पाया जाता है।

नया तरीका ज़्यादा कारगर
इलाज न कराए जाने पर कमज़ोर आंख की दृष्टि पूरी तरह जा सकती है।

इसी वजह से डॉक्टर इस समस्या का जल्द से जल्द इलाज करवाने पर ज़ोर देते हैं।

सामान्यतः डॉक्टर इसके इलाज के लिए ठीक आंख को ढक देते हैं और बच्चे को सुस्त-आंख से ही देखने को कहा जाता है।

बच्चे को आंख कई महीने तक करीब-करीब पूरे दिन ढक कर रखना पड़ता है, जिससे बच्चा हताश होने लगता है।

एक छोटे से शोध में सुस्त आंख की दिक्कत से ग्रस्त 18 जवान लोगों को शामिल किया गया। डॉक्टरों के अनुसार आंख को ढकने के पारंपरिक तरीके के मुताबिक इससे बेहतर परिणाम हासिल हुए।
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अब शोधकर्ता इस तरीके को बच्चों पर भी आज़माना चाहते हैं।

मांट्रियल में शोधकर्ता रॉबर्ट हेस और उनके साथी यह पता लगाने की कोशिश में थे कि क्या सुस्त आंख के इलाज के लिए और कोई तरीका कारगर हो सकता है।

एक ख़ास किस्म के वीडियो चश्मे के साथ उन्होंने यह प्रयोग किया जिससे दोनों आंखें एक साथ काम कर सकें।

एमब्लिओपिया के शिकार नौ वॉलंटियर्स को अगले दो हफ़्तों तक दिन में एक घंटे के लिए यह गॉगल्स पहनकर टेटरिस खेलने के लिए कहा गया।

इस ख़ास चश्मे की एक आंख से उन्हें गेम के अंदर सिर्फ़ गिरते हुए बिल्डिंग के टुकड़े दिखते थे तो दूसरी आंख से ज़मीन पर जमा होते हुए टुकड़े।

तुलना के लिए नौ वॉलंटियर्स को यही चश्मे दिए गए लेकिन उनकी सही आंख को ढक दिया गया और वह सिर्फ़ सुस्त-आंख से ही देख पा रहे थे।

दो हफ़्ते बाद दोनों आंखें इस्तेमाल कर खेलने वाले समूह की दृष्टि में, आंख ढक कर देखने वाले, की दृष्टि के मुकाबले ज़्यादा सुधार नज़र आया।

इसके बाद दूसरे ग्रुप को भी दोनों आंखों का इस्तेमाल कर चश्मे के साथ टेटरिस खेलने को कहा गया। उनकी दृष्टि में भी उल्लेखनीय सुधार आया।

डॉ. हेस का कहना है कि यह तरीका आंख ढकने के मुकाबले ज़्यादा कारगर है, ख़ासकर जवान लोगों में क्योंकि आंख ढकने से उन्हें यूं भी कोई फ़ायदा नहीं होता।

सही आंख न हो जाए ख़राब
वह कहते हैं कि सिर्फ़ टेटरिस ही नहीं कोई भी कंप्यूटर गेम खेला जा सकता है।

डॉ. हेस के अनुसार, “जब दोनों आंखें साथ काम करती हैं तो दृष्टि में सुधार होता है।”

“आंख ढकने के मुकाबले यह बेहतर है, इसमें मज़ा आता है और इसका फ़ायदा भी जल्दी होता है।”

वह कहते हैं कि उनके और अन्य शोधों से यह पता चलता है कि एमब्लीयोपिया दरअसल दोनों-आखों की समस्या है। सही आंख को ढकने से सुस्त के ठीक होने के बजाय ठीक के भी ख़राब होने का ख़तरा रहता है।

दोनों आंखों के साथ काम करने की स्थिति में दिमाग में सामंजस्य और अनुकूलता बढ़ती है। यह सुस्त-आंख को फिर से देखना सीखने में मदद करता है।

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