कहीं नोट मिल नहीं रहे, कहीं नोट तुल रहे हैं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में एटीएम के आगे लोगों की लंबी कतारें हैं उधर भारत से करीब 14 हजार किलोमीटर दूर दक्षिण अमरीकी देश वेनेजुएला में लोग बैग में भर-भरकर नोट ले जा रहे हैं और उन पैसों से वे जरूरत का मामूली सामान भर खरीद पा रहे हैं। ऐसी खबरें भी हैं कि वेनेजुएला में कई जगह नोट गिनकर नहीं, बल्कि तौलकर लिए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मुद्रा की वैल्यू लगातार गिर रही है।
पहली नवंबर, 2016 को एक डॉलर का मूल्य 1567 बॉलिवर के बराबर था, जो 28 नवंबर को करीब 3500 बॉलिवर तक पहुंच गया है। बॉलिवर की गिरती कीमत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आधिकारिक तौर पर एक डॉलर का मूल्य दस बॉलिवर के बराबर है। सवाल ये है कि वेनेजुएला की मुद्रा इस रफ्तार से क्यों गिर रही है?
जवाब ये है कि कोई भी शख्स बॉलिवर को अपने पास नहीं रखना चाहता। वह हर कीमत पर इसे कहीं ज्यादा स्थिर मुद्रा, डॉलर से बदल लेना चाहता है। इस वजह से वेनेजुएला में इन दिनों डॉलर की मांग लगातार बढ़ रही है।
सामान्य दवाइयों के लिए उन्हें हजारों के नोट खर्च करने पड़ रहे हैं
तीन करोड़ की आबादी वाले वेनेजुएला का आर्थिक संकट 2014 में तब शुरू हुआ जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमत दो तिहाई कम हो गई। इससे देश की आमदनी कम हो गई। वैसे तो वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़े तेल भंडार वाला क्षेत्र है लेकिन बीते दो साल से तेल बिक्री से होने वाली आमदनी में करीब 40 फीसदी की कमी हो गई है।
अगर वहाँ नोटों की भरमार है तो लोग मजे में होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। आम जनता के सामने खाने पीने का संकट बढ़ता जा रहा है, सामान्य दवाइयों के लिए उन्हें हजारों के नोट खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि राहत की बात ये है कि वेनेजुएला की आम जनता सरकारी राशन दुकानों पर निर्भर है, लेकिन वहां भी सामान की कमी है।
वेनेजुएला में भी एटीएम से लोगों को राहत नहीं मिल रही है
मौजूदा समय में अगर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी नहीं होती है तो वेनेजुएला के संकट का कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है। कुछ विश्लेषकों को ये उम्मीद है कि शायद चीन वेनेजुएला की मदद को सामने आए। वेनेजुएला की तेल खानों पर सबसे ज्यादा ठेका चीनी कंपनियों को ही मिला हुआ है, लेकिन अब तक चीन ने वेनेजुएला की आर्थिक मदद की कोई पहल नहीं की है।
वैसे तो बात हमने भारतीय एटीएमों से शुरू की थी, तो वेनेजुएला में भी एटीएम से लोगों को राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि लोग जिस रफ्तार से पैसे निकाल रहे हैं उसके सामने एटीएम दो से तीन घंटे के बीच खाली हो जा रहे हैं और फिर उसमें पैसा डालने में भी वक्त लग रहा है, लिहाजा वेनेजुएला में भी एटीएम के सामने लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।