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50 साल पहले अमेरिका चांद पर पहुंचा था या नहीं, रूस की रिसर्च से सामने आएगा सच

Sun, 25 Nov 2018 12:35 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 25 Nov 2018 12:35 AM IST
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US moon landing was real or not now Russia space agency chief will verify this
neil armstrong

अमेरिका ने 1969 के जुलाई महीने में यह दावा किया था कि भले ही रूस ने अंतरिक्ष में अपना यान पहले भेजा हो लेकिन चांद की धरती पर पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री उतरे थे। फिर लंबे समय के लिए इस बात पर बहस छिड़ गई कि क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? दरअसल, नासा ने चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यान के लैंड करने की जो तस्वीरें सार्वजनिक की थी उन्हें नासा के विरोधियों ने कभी नहीं स्वीकारा। 

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उसके बाद से लेकर आज तक नासा के उस मिशन पर सवालिया निशान लगाए जाते रहे हैं। अब रूस की रोस्कॉस्मोस स्पेस एजेंसी के प्रमुख ने इस सवाल का जवाब तलाशने की बात कही है। वे कहते हैं कि वे दुनिया को बताना चाहते हैं कि आखिर सच क्या था। क्या वाकई नासा का अंतरिक्ष यान लगभग 50 साल पहले चंद्रमा पर उतरा था या फिर नहीं?
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बताना चाहेंगे कि रूस की प्रमुख रोस्कॉस्मोस स्पेस एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि चंद्रमा के लिए एक प्रस्तावित रूसी मिशन को यह सत्यापित करने के लिए भेजा जाएगा कि क्या वाकई अमेरिकी अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर उतरा था या नहीं। इस संबंध में शनिवार को ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दिमित्री रोगोजिन ने कहा, 'हमने इस मिशन को ये सत्यापित करने के लिए निर्धारित किया है कि वे वहां गए भी थे या नहीं।'

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रोगोजिन लगभग 50 साल पहले चंद्रमा पर नासा के छोड़े निशान तलाशने जा रहे हैं। रूस ने नासा के इस मिशन को कभी सच नहीं माना क्योंकि उनका सोचना था कि नासा चंद्रमा मिशन के नाम पर दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहा है। 

उधर सोवियत संघ ने चार प्रयोगात्मक चंद्रमा रॉकेट ऑपरेशन विफल रहने के बाद 1970 के दशक के मध्य में अपने चंद्रयान कार्यक्रम को ही त्याग दिया था। 2015 में, रूसी जांच समिति के एक पूर्व प्रवक्ता ने 'नासा मून लैंडिंग ऑपरेशन' की जांच की मांग की थी।

कहा जाता रहा है कि अमेरिका ने एक फिल्मी सेट के ऊपर अपने तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चांद जैसी लोकेशन पर फिल्माया था। विरोधियों का पहला आरोप है कि चांद पर जब हवा नहीं है तो फिर चित्रों में अमेरिकी झंडा लहराता हुआ कैसे दिख रहा है।

फिर उनका कहना है कि चांद पर वैज्ञानिक उपकरणों की जो रीडिंग आनी चाहिए वो न होकर कुछ और आ रही है। चांद के ऊपर के आसमान में तारे बहुत कम नजर आ रहे हैं जबकि चांद से कहीं ज्यादा तारे नजर आने चाहिए। यह भी कहा जा रहा है कि चांद पर छायाएं जिस दिशा में होनी चाहिए उससे उल्टी दिशा में दिख रही हैं।

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