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यूएई: तख्तापलट के आरोप में 94 लोगों पर मुकदमा
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 05 Mar 2013 08:45 AM IST
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संयुक्त अरब अमीरात में सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोप में 94 लोगों पर मुकदमा शुरू हो गया है। ये सभी लोग एक इस्लामी संगठन के सदस्य बताए जा रहे हैं।
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आल अमीरात नाम के संगठन से जुड़े इन लोगों को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो नामी मानवाधिकार वकीलों के अलावा कई जज, अध्यापक, और छात्र नेता भी शामिल हैं। इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं
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यदि इन लोगों को दोषी पाया जाता है तो इन्हें पंद्रह साल तक जेल की सजा हो सकती है। इस सजा के खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती है।
मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ाव
सरकार का कहना है कि इन लोगों के मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन से जुड़े होने के पुख्ता सुबूत हैं। गिरफ्तार लोगों में से ज्यादातर अल इस्लाह नामक रूढ़िवादी धार्मिक समुदाय से संबंध रखते हैं।
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जानकारों का कहना है कि अल इस्लाह संगठन अमीरात में सत्तारूढ़ शासक परिवार को हटाकर शरीया के आधार पर एक सख्त इस्लामी सरकार को लाना चाहती है।
ह्यूमन राइट्स वॉच के निक मैक्गीहान ने बीबीसी को बताया, “हमें आम लोगों के बीच ऐसा कोई प्रमाण नहीं देखने को मिला जिसके आधार पर इन्हें दोषी ठहराया जा सके। जहां तक हम जानते हैं अल इस्लाह एक शांतिपूर्ण काम करने वाला संगठन है और वो यही चाहती है कि देश में पारंपरिक इस्लामिक कानूनों के आधार पर शासन हो।”
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद नशमी अल डफीरी को अल इस्लाह की तरफ से मुकदमे की पैरवी करनी थी लेकिन उन्हें संयुक्त अरब अमरीत में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक के परिवार वालों का कहना था कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान सभी गिरफ्तार लोग बेहद परेशान और अस्तव्यवस्त लग रहे थे। इसके अलावा इन लोगों को प्रताड़ित करने के भी आरोप लगे हैं।
एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने नाम न जाहिर होने की शर्त पर बताया कि गिरफ्तार लोगों को अपने वकीलों और परिवार वालों के साथ किसी तरह की बातचीत करने की मोहलत नहीं दी गई।
इस कार्यकर्ता का कहना था, “यह पूरी तरह से मानवाधिकार हनन का मामला है।”
वहीं संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल का कहना था कि कैदियों के साथ कानून के तहत वार्ता की गई है। मुकदमे की सुनवाई अबू धाबी स्थित संघीय अदालत में हो रही है।