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खशोगी की हत्या के बाद ट्रंप ने दी सऊदी को परमाणु तकनीक
Thu, 06 Jun 2019 06:19 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 06 Jun 2019 06:19 AM IST
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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
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विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के एक सीनेटर ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बावजूद सऊदी अरब का साथ देने का आरोप लगाया। सीनेटर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी पत्रकार की हत्या के बाद सऊदी अरब को दो बार परमाणु तकनीक विशेषज्ञता के हस्तांतरण को मंजूरी दी थी।
बता दें कि सऊदी मूल के खशोगी की इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के दूतावास में हत्या करने के बाद शव गायब कर दिया गया था। अमेरिकी खुफिया विभाग का कहना है कि इस हत्या का आदेश सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सलमान को दोषी मानने से इंकार कर दिया था।
डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने कहा कि सऊदी अरब को तकनीक हस्तांतरण की शुरुआत दिसंबर, 2017 में हुई थी। सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्य केन इस साल मार्च से देश के ऊर्जा विभाग पर सऊदी अरब को किए गए ऐसे हस्तांतरण की जानकारी देने के लिए दबाव बना रहे हैं। समिति के अध्यक्ष को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन केन का कहना है कि उन्हें करीब दो महीने बाद जाकर जवाब मिल पाया।
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केन का कहना है कि पहली बार तकनीक का हस्तांतरण खशोगी की हत्या के 16 दिन बाद 18 अक्तूबर, 2018 को किया गया, जबकि दूसरी बार इस साल 18 फरवरी को तकनीक से जुड़ी जानकारियां सऊदी अरब को दी गईं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर पिछले महीने भी सऊदी अरब को हथियार बेचने के मामले में संसद की अनदेखी करने के आरोप लगे थे।
राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी अरब की हर मांग पूरी करने को तैयार हैं। इसके लिए वह संसद के विरोध को बाईपास करने, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की अनदेखी करने और क्षेत्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ावा देने वाले तमाम प्रशासनिक कदम भी उठाने को तैयार हैं। - टिम केन, डेमोक्रेटिक सीनेटर
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बता दें कि सऊदी मूल के खशोगी की इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के दूतावास में हत्या करने के बाद शव गायब कर दिया गया था। अमेरिकी खुफिया विभाग का कहना है कि इस हत्या का आदेश सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सलमान को दोषी मानने से इंकार कर दिया था।
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डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने कहा कि सऊदी अरब को तकनीक हस्तांतरण की शुरुआत दिसंबर, 2017 में हुई थी। सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्य केन इस साल मार्च से देश के ऊर्जा विभाग पर सऊदी अरब को किए गए ऐसे हस्तांतरण की जानकारी देने के लिए दबाव बना रहे हैं। समिति के अध्यक्ष को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन केन का कहना है कि उन्हें करीब दो महीने बाद जाकर जवाब मिल पाया।
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केन का कहना है कि पहली बार तकनीक का हस्तांतरण खशोगी की हत्या के 16 दिन बाद 18 अक्तूबर, 2018 को किया गया, जबकि दूसरी बार इस साल 18 फरवरी को तकनीक से जुड़ी जानकारियां सऊदी अरब को दी गईं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर पिछले महीने भी सऊदी अरब को हथियार बेचने के मामले में संसद की अनदेखी करने के आरोप लगे थे।
राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी अरब की हर मांग पूरी करने को तैयार हैं। इसके लिए वह संसद के विरोध को बाईपास करने, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की अनदेखी करने और क्षेत्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ावा देने वाले तमाम प्रशासनिक कदम भी उठाने को तैयार हैं। - टिम केन, डेमोक्रेटिक सीनेटर