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माली: संयुक्त फौजें टिम्बकटू में दाखिल

Tue, 29 Jan 2013 01:21 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 29 Jan 2013 01:21 PM IST
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troops secure hold on timbuktu

फ्रांस और माली की सेना के सूत्रों का कहना है कि फ्रांस के नेतृत्व वाली सेना ऐतिहासिक शहर टिंम्बकटू में दाखिल हो गई हैं।

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लेकिन टिम्बकटू से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक वहां कई हजार प्राचीन पांडुलिपियों को नष्ट कर दिया गया है। वहां के पुस्तकालयों के वीडियो फुटेज में जली हुई किताबें और खाली डिब्बे नजर आ रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने घोषणा की है कि संयुक्त फौजें लड़ाई में जीत की ओर बढ़ रही हैं।
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उन्होंने उत्तर में मौजूद इस्लामी विद्रोहियों को पीछे ढकेलना शुरू कर दिया है। शनिवार को फौजौं ने उत्तरी माली के सबसे बड़े शहर गाओ को कब्जे में ले लिया था।
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इस्लामी लड़ाकों ने पिछले साल माली के उत्तरी इलाकों को कब्जे में ले लिया था लेकिन फ्रांस की फौजों के आने के बाद उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

माली की राजधानी से बीबीसी संवाददाता थॉमस फेसी ने बताया है कि ऐसा लगता है कि ज्यादातर चरमपंथी रेतीले इलाकों में स्थित अपने ठिकानों की ओर चले गए हैं।

उधर अफ्रीकी यूनियन के नेताओं ने इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में बैठक की है। इस बैठक में माली की स्थिति एक प्रमुख मुद्दा था। अफ्रीकी यूनियन ने संयुक्त फौजों को 50 मिलियन डॉलर दिए जाने की घोषणा की है।

बीबीसी संवाददाता जेम्स कॉपनैल के मुताबिक ऐसा लगता है कि ये लड़ाई काफी महंगी साबित होगी। सोमवार दोपहर को फ्रांस की सेना के एक प्रवक्ता ने कहा था कि संयुक्त सेना टिम्बकटू में दाखिल हो गई है।

वहां लोगों ने फौजों का फ्रांस और माली के झंडे दिखाकर स्वागत किया। वो ‘माले, माले’ के नारे लगा रहे थे। एक व्यक्ति ने कहा कि हमें फ्रांस और माली पर गर्व है। हम आपका शुक्रिया अदा करते हैं।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक एक व्यक्ति हामा सिसे ने कहा कि हम एक बार फिर आजाद हैं। हम पिछले 10 महीनों से बंदी थे लेकिन ये 10 महीने 10 साल की तरह थे।

पुस्तकालय
उधर माली के सैन्य अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि माली और फ्रांस की सेनाओं ने टिंबक्टू को अपने नियंत्रण में ले लिया है। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक चरमपंथियों ने एक पुस्तकालय को तबाह कर दिया है। इस पुस्तकालय में 13वीं सदी की प्राचीन पांडुलिपियां रखी हुई थीं।

संयुक्त सेना के साथ यात्रा कर रहे स्काई न्यूज संवाददाता ऐलेक्स क्रॉफोर्ड ने कुछ जले हुए दस्तावेज दिखाए। अहमद बाबा इंस्टिट्यूट नाम के इस पुस्तकालय में करीब 30,000 पांडुलिपियां रखी हुई थीं। इनमें माली और पड़ोसी देशों के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे।

इससे पहले फ्रांस की सेना के प्रवक्ता कर्नल थिएरी बुर्खाड ने बीबीसी को बताया था कि इस युद्ध में हवाई सेना ने 1,000 फ्रांस की सेना और 200 माली के सैन्यकर्मियों की मदद की। टिम्बकटू पर कब्जे के बाद संयुक्त सेना की नजर अल्जीरिया की सीमा के पास स्थित विद्रोहियों के आखिरी गढ़ किदाल पर होगी।


लेकिन उत्तरी माली के प्रमुख चरमपंथी गुट अंसार दीन के गढ़ किदाल से आ रही रिपोर्टों के अनुसार इस गुट का भी असर वहां खत्म हो गया है। धर्मनिर्पेक्ष विद्रोही टुआरेग गुट एमएनएलए ने कहा है कि उसने किदाल को नियंत्रण में ले लिया है।

बीबीसी संवाददाता के अनुसार किदाल पर कब्जे के बाद फ्रांस के सैन्य ऑपरेशन का पहला चरण पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण का लक्ष्य होगा रेतीले इलाकों में छिपे चरमपंथियों के ठिकानों से उन्हें ढूंढ निकालना।

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