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थाईलैंड की गुफा से अब तक बचाए गए कुल 8 बच्चे, बाकियों के लिए मंगलवार को फिर शुरू होगा ऑपरेशन

Mon, 09 Jul 2018 07:56 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 09 Jul 2018 07:56 PM IST
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Total 8 children saved from Thailand cave, rescue will restart tomorrow

थाईलैंड की थाम लुआंग गुफा से आठवें बच्चे को सोमवार देर शाम बाहर निकाल लिया गया है। अपने कोच के साथ फंसे फुटबॉल टीम के आठवें बच्चे को निकालने के बाद अब बाकी 5 सदस्यों को निकालने के लिए बचाव दल के कर्मचारी मंगलवार सुबह अभियान शुरू करेंगे। इससे पहले रविवार शाम तक गुफा से 6 बच्चों को निकाल लिया गया था।

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बचाव में जुटे हैं 90 गोताखोर  

रविवार को करीब 12 घंटे तक चले अभियान में 18 गोताखोरों ने 6 बच्चों को बाहर निकाल लिया था। इस रेस्क्यू के हीरो ब्रिटिश गोताखोर जॉन वोलेंनथन और रिक स्टैटन हैं। दोनों ने ही गुफा में फंसे बच्चों को सबसे पहले खोजा। थाईलैंड के अलावा अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के 90 गोताखोर बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एक हजार से ज्यादा जवान और एक्सपर्ट इस अभियान में मदद कर रहे हैं। यह फुटबॉल टीम 23 जून को गुफा देखने गई थी और बारिश से आई बाढ़ में फंस गई। इन लड़कों की उम्र 11 से 16 साल के बीच है। उनके कोच की उम्र 25 साल है। 
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रेस्क्यू के ये दो हीरो

जॉन वोलेंनथन और रिक स्टैटन के मुताबिक ये बच्चे कीचड़ के बीच एक छोटी सी चट्टान पर बैठे मिले थे। जॉन ने जब उनसे पूछा था कि आप कितने लोग हो? तो अंदर से आवाज आई थी थर्टीन। जॉन और रिक दुनिया के सबसे माहिर गोताखोर हैं। 2004 में दोनों ने ब्रिटेन की बुकी होल गुफा की गहराई में जाकर रिकॉर्ड बनाया था। रिक फायर ब्रिगेड विभाग से रिटायर्ड हैं और जॉन आईटी सलाहकार हैं। 


रिक ने 2004 में मैक्सिको में आई बाढ़ में 9 दिन तक फंसे रहे 6 सैनिकों को बचाया था। रिक को उन्हें बाहर निकालने में 9 घंटे लगे थे। इसके अलावा 2010 में फ्रांस की गुफा में फंसे वहां के गोताखोर एरिक एस्टाबिले की जान भी इन्होंने बचाई थी। वह ऑपरेशन 8 दिन चला था। हालिया मामले के बाद थाइलैंड नेवी ने जैसे ही इनसे संपर्क किया, दोनों तत्काल राजी हो गए और 27 जून को मौके पर पहुंचकर मिशन शुरू कर दिया।

टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि स्वस्थ बच्चों को सबसे पहले बाहर निकाला जा रहा है। हालांकि सोमवार सुबह तेज बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी भी हुई, लेकिन बचाव दल में शामिल लोगों ने इस कोशिश को ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का नाम देकर अभियान शुरू कर दिया। 

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