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टॉपलेस कार्यकर्ता की तस्वीर से ट्यूनीशिया में विवाद

Sat, 30 Mar 2013 08:10 AM IST
बीबीसी हिंदी/विकास पांडेय
बीबीसी हिंदी/विकास पांडेय Updated Sat, 30 Mar 2013 08:10 AM IST
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topless photo of worker disputes in tunisia

ट्यूनीशिया की एक महिला कार्यकर्ता ने जब अपनी तस्वीरें ट्यूनीशिया की सोशल मीडिया पर जारी की, तो एक नई बहस छिड़ गई।

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महिलाओं के मुद्दों पर सक्रिय ये कार्यकर्ता हैं 19 साल की अमीना।

फेसबुक पर जारी उनकी विवादास्पद तस्वीर में अमीना के बाएं हाथ में सुलगती हुई सिगरेट है। और खुले सीने पर अरबी में लिखा हैः “ये मेरी देह है, कोई तुम्हारी इज्जत नहीं।”

इस नग्न तस्वीर से खफा ट्यूनीशिया के रूढिवादी धार्मिक नेताओं ने अमीना के खिलाफ पहले ही फतवा जारी कर दिया है। यही नहीं, इन धार्मिक नेताओं ने अमीना को कोड़े लगाने और पत्थर से मार-मार कर खत्म कर देने का फरमान भी जारी कर दिया।
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एक और एक्टिविस्ट

मगर इन फतवों और फरमानों का खुल्लमखुल्ला विरोध करते हुए अमीना के समर्थन में एक और कार्यकर्ता सामने आई हैं। उन्होंने अमीना का साथ देते हुए 20 मार्च को अपनी एक टॉपलेस तस्वीर ऑनलाइन पोस्ट की।
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ऐसा माना जा रहा है कि हार्लेम शेक नाम के इंटरनेट डांस को लेकर ट्यूनीशिया में जो बवाल मचा उसके बाद से ट्यूनीशिया के इस्लामिक चरमपंथियों और उदारवादियों के बीच ठन गई।

यह इस्लामी चरमपंथियों के खिलाफ गुबार ही हैं जो इन पहलकदमियों के रूप में एक-एक कर सामने आने लगे हैं।

नारीवादी विरोध
“अमीना की टॉपलेस तस्वीर” पर ट्यूनीशिया में इस महीने खूब बहस हुई।

ट्यूनीशिया में महिलाओं के मुद्दों पर आंदोलन कर रहे लोगों ने अमीना के समर्थन में फेसबुक पर ‘फेमेन’ नाम से एक अलग पेज ही बना डाला। संयोग से यह पेज महिलाओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस 8 मार्च को बनाया गया।

निजी समाचार चैनल अर्रकामिया ने 15 मार्च को एक रिपोर्ट दिखाई। इस रिपोर्ट के जरिए यह बात सामने आई कि एक महिला की ‘खुले बदन’ वाली तस्वीर ने ट्यूनीशिया में भारी विवाद हो रहा है।

उस लड़की के इस कदम के खिलाफ लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। उनके अनुसार विरोध जाहिर करने का यह तरीका अरब और मुसलमानों की परंपराओं के खिलाफ है।

वेबसाइट का ये भी कहना है कि ट्यूनीशिया की महिलाएं अपनी संस्कृति के प्रति बेहद जागरुक होती हैं, वे अपने परिवार ओर देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बखूबी जानती हैं, इसलिए ये तस्वीरें ट्यूनीशिया की महिलाओं की गरिमा के भी खिलाफ है।

‘फेमेन’ से जुड़ाव
एक ओर तो ट्यूनीशिया में इस्लामिक चरमपंथियों की सक्रियता बढ़ रही है। दूसरी ओर यहां की पुरातन जीवनशैली के प्रति स्त्रियों के बीच असंतोष भी बढ रहा है।

फरवरी के मध्य में, एक फ्रांसीसी टीवी ने अपनी एक रिपोर्ट पेश की। उसने इस रिपोर्ट में बताया कि ‘फेमेन’ से जुड़े फ्रांसीसी कार्यकर्ता ट्यूनीशिया में अपनी एक शाखा शुरू करना चाहते हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य यही है कि, “हम ट्यूनीशिया की महिलाओं को ऐसे किसी भी दमन से बचाना चाहते हैं जो उनकी आजादी खत्म कर दे।”

‘फेमेन’ समूह खुद को “विश्व भर में महिलाओं को गोलबंद” करने वाला मानता है। इसका दावा है, “हम महिलाओं की यौन और सामाजिक समानता की पुरजोर समर्थन करते हैं।”

‘फेमेन’ ने नग्नता को विरोध का हथियार बनाया है। यही वजह है कि इस गुट को ट्यूनीशिया में खारिज कर दिया गया है।

अर्रकामिया की वेबसाइट के अनुसार ‘फेमेन’ ट्यूनीशिया में अपनी शाखा खोलना चाहता था। मगर महिला मामलों की पूर्व मंत्री सिहम बदी ने इसकी इजाजत नहीं दी। बदी ने इस संस्था की निंदा करते हुए कहा, “यह इस्लाम और ट्यूनीशिया की परंपराओं के विरुद्ध है।”

“फेमेन ट्यूनीशिया” के नाम से फेसबुक पर दो पेज बनाए गए हैं। एक पेज खुद को “फेमेन ट्यूनीशियन के चाहने वालों का पेज” बताता है। इस पेज पर अमीना और दूसरी कार्यकर्ता मरियम की तस्वीरें उपलब्ध हैं।

फेसबुक पर मौजूद दूसरा पेज “फेमेन ट्यूनीशिया” के नाम से खोला गया था। मगर अब यह दिखता नहीं। निजी रेडियो मोजैक के अनुसार 20 मार्च को यह पेज हैक कर लिया गया है।

ट्यूनीशिया के इस्लामिक चरमपंथियों से सहानुभूति रखने वाले फेसबुक पर बने पेज ने भी रिपोर्ट की है कि फेमेन ट्यूनीशिया पेज हैक कर लिया गया है। इस पेज पर मौजूद कुरान की लिखी लाइनों वाली नग्न तस्वीरों को बदल दिया है।

इसी मसले पर बने ट्विटर के पेज के भी 20 मार्च को ही हैक कर लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

फतवा जारी
18 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक अखबार अस्सबाह न्यूज ने अपने एक बयान में बताया कि ट्यूनीशिया के रूढिवादी धार्मिक नेता और वहाबी सलाफी के प्रमुख अल्मी अदेल ने मीडिया को बुलाया और उनसे गुजारिश की कि वे ऐसी बेकार की खबरों को न छापें।

अखबार ने आगे बताया कि उन नेताओं ने उस लड़की की बकायदा ‘मेडिकल जांच’ की मांग की। उन्हें आशंका है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उस लड़की ने कोई दवा ली हो या, फिर वह दिमागी तौर पर बीमार हो।

उन्होंने आगे कहा कि शरिया (इस्लामिक धार्मिक कानून) के मुताबिक तो "उस गुस्ताख लड़की" को 80-100 कोड़े मारे जाने चाहिए। “उसने जो किया है, उसके लिए तो पत्थर मार-मार कर उसकी जान ले ली जाए।”

इन धार्मिक गुरुओं के ऐसे विचारों को कुछ समालोचकों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। एक न्यूज वेबसाइट नवात पर फरहात ओतमन ने लिखा हैः “भविष्य में आप ऐसी चीजें ना देखें जो आपकी आंखों को नहीं भाती हों। और जिन बातों से आपको परेशानी हो, उसे भी ना सुनें।”

अमीना ने कहा, 'मैं सही हूं'
निजी टीवी इट्टोनस्या पर प्रसारित अपनी बातचीत में 19 साल की अमीना ने अपनी नंगी तस्वीरों के जरिए विद्रोह करने के कदम को पूरी तरह सही ठहराया है।

अमीना के अनुसार, उनकी प्रेरणा मिस्र की एक कार्यकर्ता अलिला अल-महदी हैं। इस कार्यकर्ता ने 2011 में अपनी निःवस्त्र तस्वीरें सोशल साइट पर अपलोड की थीं। उस समय भी इन तस्वीरों पर भी काफी हो-हल्ला हुआ था।


अलिला अल-महदी अब मिस्र में रहती हैं। अलिला भी ‘फेमेन’ की एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं।

अमीना ने आगे कहा, “मुझे अच्छी तरह मालूम था कि मुझे इस संघर्ष के कैसे नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।”

अमीना ने अपने विचारों को सबसे शेयर करने के लिए फेसबुक पर एक पेज बनाया है। हाल के अपने फेसबुक स्टेटसों में से एक में अमीना ने इन कार्रवाइयों को “ट्यूनीशिया के समाज का पाखण्ड” बताया।

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