नेपाल में फिर तनाव: सरकार चुनाव पर अडिग, मधेसी कर रहे विरोध
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नेपाल में एक बार फिर से स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर तराई-मधेस क्षेत्र में जनांदोलन जोर पकड़ने लगा है। सरकार चुनाव कराने पर अडिग है लेकिन मधेसी नेता इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में तनाव का माहौल फिर से तैयार होने लगा है।
नेपाल में कुल 738 गांव पालिकाएं बनाई गई हैं। इसमें मधेस में केवल 223 और पहाड़-हिमालयी क्षेत्र में कुल 515 गांव पालिका हैं। 51 फीसदी आबादी वाले तराई-मधेस को मात्र 34 फीसदी सीटें और 49 प्रतिशत आबादी वाले पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों को 66 फीसदी सीटें देना ही मधेसियों के विरोध का मुख्य कारण है।
मधेस नेताओं के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में 13 हजार आबादी पर एक गांव पालिका, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में 22 हजार आबादी पर एक गांव पालिका और तराई-मधेस क्षेत्रों में चालीस हजार आबादी पर एक गांव पालिका का निर्धारण नए संविधान में किया गया है। इन नेताओं का कहना है कि जब देश में प्रचंड के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, तब संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा और प्रचंड, शेर बहादुर देउबा के बीच तीन बिंदु पर सहमति हुई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य संविधान संशोधन कर मधेस, थरुहट और आदिवासी और जनजातीय आंदोलन की जायज मांगों को मानना था। मगर सरकार इन मांगों को न मानते हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में व्यस्त है। नेपाल के पूर्व मंत्री और तमलोपा के केंद्रीय समिति के सदस्य ईश्वर दयाल मिश्र का कहना है कि संविधान लागू करने के नाम पर सरकार ने जल्दबाजी में स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा की है।
अदालत में पेश हुए मधेस गठबंधन के संयोजक राउत
स्वतंत्र मधेस गठबंधन के केंद्रीय संयोजक डॉ. चंद्रकांत राउत को कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को रूपनदेही अदालत में पेश किया गया। अदालत ने राउत को तीन दिन की पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया था। रूपनदेही पुलिस ने लहान में बलिदान दिवस पर उनके द्वारा दिए गए भाषण को आधार बनाकर देश के खिलाफ संगठित अपराध करने का मामला दर्ज किया है।
सिरहा की जिला अदालत ने बृहस्पतिवार को 10 हजार के मुचलके पर राउत सहित 19 स्वराजियों को रिहा करने के आदेश दिया था। रिहाई के बाद कोर्ट रूम के बाहर ही रूपनदेही पुलिस ने राउत को गिरफ्तार कर लिया।
डॉ. राउत को कोर्ट में पेश करने में नेपाल पुलिस के पसीने छूट गए। कोर्ट पहुंचाने वाले रास्ते पर लगभग तीन हजार से अधिक प्रहरी लगाए गए थे। कई स्थानों पर नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें कई लोग घायल हो गए।