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इसराइली हमले का देंगे जवाब: असद
Updated Fri, 31 May 2013 07:38 AM IST
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सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कहा है कि रूस उन्हें हथियारों की सप्लाई कर रहा है और इस करार का सीरिया में जारी तनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
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हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि रूस द्वारा भेजे जा रहे हथियारों में विमान-विरोधी मिसाइल एस-300 शामिल है या नहीं।
इससे पहले इसराइल ने चेतावनी दी थी कि अगर एस-300 मिसाइल सीरिया में भेजी जाती हैं, तो वो इसका जवाब देगा।
इसराइल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बशर अल असद ने कहा कि अगर इसराइल सीरिया पर एक और हवाई हमला करता है, तो इस बार वे जवाब देंगें।
इस साल सीरिया में इसराइल की ओर से तीन हवाई हमले हो चुके हैं।
इस घटनाक्रम से मध्यपूर्व में तनाव बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है।
सीरियाई राष्ट्रपति ने लेबनान के शिया चरमपंथी संगठन हेज़बुल्लाह के टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में ये बयान दिया है।
सैन्य संतुलन
उन्होंने बताया कि सीरियाई सेना ने विद्रोहियों के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की है और अब इस युद्ध में सैन्य संतुलन स्थापित हो गया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी सेना की जीत होगी।
सीरिया में हिज़बुल्लाह की मौजूदगी के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जहां तक हेज़बुल्लाह की बात है, ये एक बड़ा मुद्दा है जिसके कई पहलू हैं। हाल ही में जो भी हेज़बुल्लाह के बारे में कहा गया है, उस संदर्भ में मुझे पूरी बात समझानी होगी। अगर हेज़बुल्लाह को सीरिया की लड़ाई लड़नी होती, तो वे यहां हज़ार या दो हज़ार लड़ाकू भेजते। लेकिन इससे कहीं ज़्यादा सैनिक सीरियाई सेना के पास हैं। बाहरी देश सीरियाई चरमपंथियों को समर्थन दे रहे हैं। उन चरमपंथियों के बजाय तो हम अपने देश की रक्षा ही कर रहे हैं।"
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इससे पहले सीरियाई विद्रोही सेना के कमांडर ने लेबनॉन के शिया इस्लामी गुट हेज़बुल्ला पर आरोप लगाया था कि वो इरान की मदद से सीरिया पर कब्ज़ा कर रहा है।
शांति वार्ता
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में जनरल सलीम इदरिस ने कहा कि विद्रोही सेना के पास इतने हथियार नहीं है कि वे हिज़बुल्ला द्वारा हमले की स्थिति में उनका सामना कर सकें।
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उनके मुताबिक कुसैर नाम के सीरियाई शहर पर करीब सात हज़ार हेज़बुल्ला चरमपंथियों का कब्ज़ा है। उन्होंने पश्चिमी ताकतों से मदद की अपील की, जिसके बाद अमेरिका ने मांग की है कि हेज़बुल्ला तत्काल रूप से अपने लड़ाकुओं को सीरिया से बाहर निकाल ले।
इस बीच मुख्य विपक्षी गुटों ने शांति वार्ता में भाग लेने से इंकार कर दिया है।
बशर अल असद ने कहा कि सीरिया शांति वार्ता में उसी स्थिति में भाग लेगा जिसमें कोई शर्तें न रखी गई हों।
हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें अचंभा नहीं होगा अगर ये वार्ता असफल हो जाती है क्योंकि उससे ज़मीनी हालात पर उतना फर्क नहीं पड़ेगा और विद्रोहियों की चरमपंथी गतिविधियां जारी रहेंगी।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरिया में सैकड़ों घायल नागरिक मुश्किल हालात में फंस गए हैं क्योंकि दवाओं की आपूर्ति ख़त्म होती जा रही है।