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क्या सीरिया पर अमेरिकी हमला निश्चित है?
बीबीसी
Updated Tue, 27 Aug 2013 01:31 PM IST
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पिछले कुछ दिनों में अमेरिका के तेवर बदल गए है। अमेरिका अब सीरिया की सरकार के प्रति अधिक कठोर हो गया है। अमेरिका अब इसे लेकर पूरी तरह आश्वस्त है कि सीरिया में पिछले सप्ताह हुई मौतें रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से हुईं और ये हमले राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार ने कराए हैं।
अमेरिका के एक बयान में निरीक्षकों को अनुमति देने के सुझाव का मजाक उड़ाया गया है क्योंकि संभव है साक्ष्यों को पहले ही नष्ट कर दिया गया हो। जांच की कोशिश करने पर निरीक्षकों पर हुई गोलीबारी पर भी ऐसी ही बातें कही जाएंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को कई सैन्य विकल्प सुझाए गए हैं और इस बारे में उन्होंने अपने मुख्य सैनिक साझेदार ब्रिटेन और फ्रांस के नेताओं से बात की है। इस क्षेत्र में अमेरिका के तीन युद्धपोत मौजूद हैं और दूसरे युद्धपोत क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।
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कांग्रेस में कई लोग सीमित क्रूज मिसाइल हमले के पक्ष में हैं। ऐसे में सभी संकेत एक ओर ही इशारा कर रहे हैं।
क्या ईराक जैसी दोहराई जाएगी?
ब्रिटिश समाचार पत्रों का कहना है कि इस सप्ताह हमला हो सकता है। मैं एक बेहतरीन कॉमेडी श्रृंखला 'द डे टुडे' को नहीं भूल सकता जिसमें एक टीवी स्टूडियो को 'वार डेस्क' के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
जिसमें अलार्म बजते रहते थे, लाल बत्तियाँ जगमगाती थीं, मशीने तेजी से इधर से उधर झूलती थीं और रोशनी नाटकीय रूप से धुंधली हो जाती थी।
इसमें संभावित टकराव को लेकर ठीक मेरे पेशे जैसी उत्तेजना को दर्शाया गया था। मैंने बराक ओबामा की सतर्कता और कार्रवाई को लेकर अनिच्छा पर पहले भी जोर दिया है, लेकिन अब किसी बड़े बदलाव के बगैर उनके लिए वापसी की राह मुश्किल लगती है।
हालांकि एक सरकार का अपने लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की जा सकती है, लेकिन अमेरिका के नजरिए से देखें तो उसके लिए बड़ी चिंता का विषय ये है कि कहीं ये हथियार उसके अपने लोगों या सहयोगी देशों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल न हों।
गलत इस्तेमाल की आशंका
9/11 के हमले के बाद से ही इस बात को लेकर काफी भय है कि ऐसे हथियार उन हाथों में जा सकते हैं, जिन्हें पश्चिमी देश आतंकवादी मानते हैं।
यह आशंका इसलिए भी हकीकत बन सकती है क्योकि सीरिया में एक मुख्य विपक्षी दल ने औपचारिक रूप से अल-कायदा के साथ गठजोड़ की घोषणा की है।
मुझे ऐसा लगता है कि अमेरिका का मुख्य स्वार्थ उन हथियारों को सुरक्षित करना और उन्हें इस्तेमाल के लायक नहीं छोड़ना है।
लेकिन मैंने इस विकल्प पर काफी कम बातें सुनी हैं। याद कीजिए कि अमेरिका और रूस के राजनयिक नीदरलैंड के लिए शांति वार्ता की अगुवाई कर रहे हैं। अमेरिका हमले से उसकी सफलता की संभावना पर असर पड़ेगा। लेकिन खतरा संभव है।
हालांकि हो सकता है कि राष्ट्रपति ओबामा रूस की चेतावनी पर बहुत अधिक ध्यान न दें, लेकिन उसका मुख्य भाव एक ही होगा- रूस कह सकता है कि अगर अमेरिका युद्ध के लिए जाता है तो यह इराक में पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश की गलती को दोहराने जैसा होगा।
मुश्किल हालात
निश्चित रूप से यह खतरा राष्ट्रपति ओबामा के दिमाग में घूम रहा होगा। अमेरिका सेना ने लगातार चेतावनी दी है कि सीरिया की चुनौती काफी मुश्किल है।
यह लीबिया नहीं है और उसकी बेहतरीन वायु सेना को कामयाब होने के लिए काफी प्रयासों और प्रतिबद्धता की ज़रूरत होगी।
यह भी आश्चर्यजनक होगा अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा अधिकतम अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाए बिना कार्रवाई करते हैं और शायद इसका मतलब संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान की कोशिशों को अधिक समय देना है।
मैं गलत हो सकता हूँ: लाल बत्तियाँ जल्द ही जगमगा सकती हैं और वार डेस्क हरकत में आ सकता है। हालांकि धमकी का स्वर तेज हो सकता है, लेकिन संगीने अभी तैयार नहीं हैं।
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अमेरिका के एक बयान में निरीक्षकों को अनुमति देने के सुझाव का मजाक उड़ाया गया है क्योंकि संभव है साक्ष्यों को पहले ही नष्ट कर दिया गया हो। जांच की कोशिश करने पर निरीक्षकों पर हुई गोलीबारी पर भी ऐसी ही बातें कही जाएंगी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को कई सैन्य विकल्प सुझाए गए हैं और इस बारे में उन्होंने अपने मुख्य सैनिक साझेदार ब्रिटेन और फ्रांस के नेताओं से बात की है। इस क्षेत्र में अमेरिका के तीन युद्धपोत मौजूद हैं और दूसरे युद्धपोत क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।
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कांग्रेस में कई लोग सीमित क्रूज मिसाइल हमले के पक्ष में हैं। ऐसे में सभी संकेत एक ओर ही इशारा कर रहे हैं।
क्या ईराक जैसी दोहराई जाएगी?
ब्रिटिश समाचार पत्रों का कहना है कि इस सप्ताह हमला हो सकता है। मैं एक बेहतरीन कॉमेडी श्रृंखला 'द डे टुडे' को नहीं भूल सकता जिसमें एक टीवी स्टूडियो को 'वार डेस्क' के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
जिसमें अलार्म बजते रहते थे, लाल बत्तियाँ जगमगाती थीं, मशीने तेजी से इधर से उधर झूलती थीं और रोशनी नाटकीय रूप से धुंधली हो जाती थी।
इसमें संभावित टकराव को लेकर ठीक मेरे पेशे जैसी उत्तेजना को दर्शाया गया था। मैंने बराक ओबामा की सतर्कता और कार्रवाई को लेकर अनिच्छा पर पहले भी जोर दिया है, लेकिन अब किसी बड़े बदलाव के बगैर उनके लिए वापसी की राह मुश्किल लगती है।
हालांकि एक सरकार का अपने लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की जा सकती है, लेकिन अमेरिका के नजरिए से देखें तो उसके लिए बड़ी चिंता का विषय ये है कि कहीं ये हथियार उसके अपने लोगों या सहयोगी देशों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल न हों।
गलत इस्तेमाल की आशंका
9/11 के हमले के बाद से ही इस बात को लेकर काफी भय है कि ऐसे हथियार उन हाथों में जा सकते हैं, जिन्हें पश्चिमी देश आतंकवादी मानते हैं।
यह आशंका इसलिए भी हकीकत बन सकती है क्योकि सीरिया में एक मुख्य विपक्षी दल ने औपचारिक रूप से अल-कायदा के साथ गठजोड़ की घोषणा की है।
मुझे ऐसा लगता है कि अमेरिका का मुख्य स्वार्थ उन हथियारों को सुरक्षित करना और उन्हें इस्तेमाल के लायक नहीं छोड़ना है।
लेकिन मैंने इस विकल्प पर काफी कम बातें सुनी हैं। याद कीजिए कि अमेरिका और रूस के राजनयिक नीदरलैंड के लिए शांति वार्ता की अगुवाई कर रहे हैं। अमेरिका हमले से उसकी सफलता की संभावना पर असर पड़ेगा। लेकिन खतरा संभव है।
हालांकि हो सकता है कि राष्ट्रपति ओबामा रूस की चेतावनी पर बहुत अधिक ध्यान न दें, लेकिन उसका मुख्य भाव एक ही होगा- रूस कह सकता है कि अगर अमेरिका युद्ध के लिए जाता है तो यह इराक में पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश की गलती को दोहराने जैसा होगा।
मुश्किल हालात
निश्चित रूप से यह खतरा राष्ट्रपति ओबामा के दिमाग में घूम रहा होगा। अमेरिका सेना ने लगातार चेतावनी दी है कि सीरिया की चुनौती काफी मुश्किल है।
यह लीबिया नहीं है और उसकी बेहतरीन वायु सेना को कामयाब होने के लिए काफी प्रयासों और प्रतिबद्धता की ज़रूरत होगी।
यह भी आश्चर्यजनक होगा अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा अधिकतम अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाए बिना कार्रवाई करते हैं और शायद इसका मतलब संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान की कोशिशों को अधिक समय देना है।
मैं गलत हो सकता हूँ: लाल बत्तियाँ जल्द ही जगमगा सकती हैं और वार डेस्क हरकत में आ सकता है। हालांकि धमकी का स्वर तेज हो सकता है, लेकिन संगीने अभी तैयार नहीं हैं।