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जिस जहर से 700 कुत्ते मारे थे, उसी से खदुकुशी

Fri, 03 Feb 2017 11:15 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Feb 2017 11:15 AM IST
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suicide commit with the same poison which is used to kill 700 dogs
अपने कुत्ते के साथ चेंग
ताइवान में जानवरों को मारने पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून शनिवार से लागू होने जा रहा है। देश में आवारा जानवरों की दुर्दशा से दुखी होकर एक पशु चिकित्सक की आत्महत्या के एक साल बाद यह कानून लागू होने जा रहा है। बीबीसी की ताइवान संवाददाता सिडी सुई ने इस पूरी त्रासदी को बयां किया है। शायद पशु डॉक्टर और जानवर प्रेमी चीन चिह चेंग गलत समय पर एक गलत पेशे में चली गई थीं।
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तओयुआन सिटी में आवारा कुत्तों के शेल्टर में उनकी सहकर्मी विनी लाई बताती हैं, ''वह अक्सर ओवरटाइम करती थीं। शायद ही कभी वह ठीक से लंच करने के लिए ब्रेक लेती थीं। कुत्तों की देखभाल करने के लिए वह अपनी छुट्टियां भी कुर्बान कर देती थीं। वह कुत्तों की बदतर स्थिति को दुरुस्त करने में लगी रहती थीं।''
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सिविल सेवा परीक्षा की टॉपर

ताइवान की टॉप यूनिवर्सिटी से उन्होंने ग्रेजुएशन किया था। सिविल सेवा की परीक्षा में वह अव्वल आई थीं। चेंग हेड ऑफिस में डेस्क जॉब का चुनाव कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने ताइवान में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने की चुनौती को स्वीकार किया था। शेल्टर की लॉबी में जानवरों की तस्वीर लगी है।

इन तस्वीरों के माध्यम से चेंग लोगों को इन आवारा जानवरों को गोद लेने के लिए उत्साहित करती थीं। पिछले साल पांच मई को चेंग ने खुद को ही मार डाला। खुद को मारने के लिए भी उन्होंने उसी दवाई का इस्तेमाल किया, जिसका इस्तेमाल जानवरों को मारने में किया जाता है। वह यह बताना चाहती थीं लोग समझें कि ताइवान में आवारा जानवरों के साथ क्या हो रहा है।

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आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहा ताइवान
इस आत्महत्या को लेकर ताइवान में काफी गुस्सा देखा गया था। लोगों ने पूछा कि छोड़ दिए गए पालतू कुत्तों से जूझने में ताइवान के वर्कर क्यों इतने दबाव में हैं। स्थानीय टीवी स्टेशन सीटीआई को चेंग ने एक इंटरव्यू दिया था। चेंग ने इस इंटरव्यू में कहा था कि पहली बार जब उन्होंने जानवर को मारते हुए देखा तो वह घर जाकर रात भर रोती रही थीं।

हालांकि मीडिया में यह बात उस तरह से नहीं आई और उन पर निजी हमले हुए। जब यह बात सामने आई तो वह पिछले दो सालों में 700 कुत्तों को खत्म कर चुकी थीं। उन्हें 'खूबसूरत कसाई' के रूप में पेश किया गया। शेल्टर वर्कर्स कुत्तों को मारने के लिए कुख्यात हैं। हालांकि चेंग इसे अनचाहे चीज की बढ़िया अंत के रूप में देखती थीं। बढ़ती उम्र में इन जानवरों को ठसाठस भरे शेल्टर में रखना जोखिम भरा होता है क्योंकि बीमारी फैलने की आशंका रहती है।

चेंग को लोग खूबसूरत कसाई कहते थे
चेंग के एक सहकर्मी काओ यू-जी ने बताया, ''उन्हें लोग कसाई कहते थे। हमें लोग आसानी से दोषी ठहराते हुए गाली देते हैं। कुछ लोग तो हमें कहते हैं कि नरक में जाएंगे। लोगों का कहना था कि हम हत्या से प्यार करते हैं। हालांकि लोग अब भी अपने पालतू कुत्तों को छोड़ दे रहे हैं।''ताइवान में पालतू कुत्तों को छोड़ने की कई वजहें हैं- उनके कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं या उनके कुत्ते कम भौंकते हैं।

 
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कुत्तों को घर से बाहर छोड़ने के खिलाफ अभियान
ताइवान में जानवरों को लेकर दो मुख्य समस्याएं हैं। भारी संख्या में पालतू कुत्तों को छोड़ दिया जाता है और फिर ये आवारा कुत्ते प्रजनन कर और कुत्तों को जन्म देते हैं। पिछले दशक से इस मामले में कुछ स्थिति सुधरी है। इसमें लोगों की जागरूकता का बड़ा योगदान है।

लोगों ने कुत्तों को घर से बाहर छोड़ने के खिलाफ कैंपेन चलाया और फिर इन्हें खरीदने के बजाय गोद लेने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया। लेकिन भारी संख्या में अब भी जानवर शेल्टर में रह रहे हैं और इन शेल्टरों की हालत बहुत खराब है। कुछ शेल्टरों में तो आधे से ज्यादा जानवरों को मार दिया गया।

2015 में 10,900 जानवरों को मारा गया। इसके साथ ही पिछले साल 8,600 जावनर शेल्टरों में अन्य कई वजहों से मर गए। सीटीआई को दिए इंटरव्यू में चेंग ने कुत्ते को मारने की प्रक्रिया के बारे में कहा था, ''हम इन्हें पहले सैर के लिए निकालते हैं। फिर उन्हें कुछ खाने के लिए देते हैं। इसके बाद हम इन्हें एक कमरे में ले जाते हैं।

जब इन्हें हम एक टेबल पर रखते हैं तो ये काफी डर जाते हैं। इसके बाद हम ड्रग का इंतजाम करते हैं। इस दवाई से इन्हें मरने में तीन से पांच सेकंड का वक्त लगता है। यह काफी दुखदायी प्रक्रिया है।'' शेल्टर स्टाफ को कोई मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग नहीं दी जाती है।
 
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