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श्रीलंका की प्रधान न्यायाधीश बर्खास्त

Mon, 14 Jan 2013 09:47 AM IST
Updated Mon, 14 Jan 2013 09:47 AM IST
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sri lankan chief justice shirani bandaranayake sacked

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने प्रधान न्यायाधीश शिरानी भंडारनायके को बर्खास्त कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि महिंदा राजपक्षे के दस्तखत वाली चिठ्ठी डॉक्टर भंडारनायके के दफ्तर पहुंचा दी है।

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इससे पहले राजपक्षे के समर्थकों के वर्चस्व वाली श्रीलंका की संसद ने भ्रष्टाचार के संदेह के आधार पर भंडारनायके पर चल रहे महाभियोग प्रस्ताव को पारित कर दिया था। हालांकि शिरानी भंडारनायके इन आरोपों से इनकार करती है।
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हाल ही में आए अदालत के फैसलों में महाभियोग की कार्यवाही को अंसवैधानिक कहा गया था। 11 सदस्यों वाली एक संसदीय समिति ने नवंबर में डॉक्टर भंडारनायके पर लगाए गए वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के 14 आरोपों की जांच की थी। समीति ने 54 वर्षीय भंडारनायके को कदाचार का दोषी पाया।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के करीबी वकीलों ने राष्ट्रपति की नोटिस मिलने की पुष्टि की है लेकिन डॉक्टर भंडारनायरके ने ताजा घटनाक्रम पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

बीबीसी के चार्ल्स हैविलैंड के मुताबिक अब इस बात की संभावना है कि वह पद छोड़ने से इनकार कर सकती हैं, क्योंकि श्रीलंका की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय अदालत ने पिछले महीने महाभियोग की प्रक्रिया को अनियमित और अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया।

श्रीलंका के विपक्ष का कहना है कि सरकार ने कभी भंडारनायके का समर्थन किया था और अब अपना रुख बदल लिया है क्योंकि भंडारनायके ने ऐसे फैसले किए थे जो राष्ट्रपति के पक्ष में नहीं थे। हालांकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती है।

बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि सरकार ने अपने हजारों समर्थकों को भंडारनायके को भ्रष्ट करार देने के लिए सड़कों पर उतार दिया। राज्य के नियंत्रण वाली मीडिया का रुझान भी सरकार समर्थक ही था।


उधर श्रीलंका पर नजर रखने वाले जानकारों ने चेतावनी दी है कि श्रीलंका संविधानिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। वकीलों ने पहले से ही अदालत के कामकाज का बहिष्कार कर रखा है। उनका कहना है कि वे नए प्रधान न्यायाधीश को स्वीकार नहीं करेंगे।

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