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बीजिंग: सीने मे जलन, आंखों में तूफान

Wed, 30 Jan 2013 12:11 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 30 Jan 2013 12:11 PM IST
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smog pollution chokes beijing china air

बीजिंग में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। लेकिन इस समस्या का निदान इतना सरल नहीं है और ये इस बात पर निर्भर करता है कि चीन की सरकार जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देती है या फिर आर्थिक विकास को।

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मैं जब सुबह सोकर उठता हूं तो खिड़की के पर्दे हटाने से पहले थोड़ा ठहर जाता हूं क्योंकि जो कुछ बाहर नजर आता है उसी से दिनभर की मेरी दिनचर्या तय हो जाती है।
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मैं दरअसल मौसम का मिजाज नहीं देख रहा होता बल्कि ये जानने की कोशिश कर रहा होता हूं कि प्रदूषण का हाल क्या रहनेवाला है।

कई सुबह तो प्रदूषण का स्तर वाकई भयावह हो जाता है। ऐसा लगता है मानो जैसे पूरा शहर धूम्रपान करनेवालों से भर गया हो और आसमान में निकोटिन के रंग का गहरा पीलापन पसर गया हो।
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इस महीने तो बीजिंग में प्रदूषण का स्तर खराब से खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बीजिंग के मौजूदा प्रदूषण स्तर ने ख़तरे के पिछले सभी स्तर को पार कर लिया है।

और हां, मैं एक बात और साफ कर देना चाहता हूं कि मैं उस समय दरअसल हैनान के सुनहरी धूप वाले द्वीप पर मौजूद था और साफ़ हवा में सांस ले रहा था जब प्रदूषण का कोहरा बीजिंग पर छा गया।

सांस की तकलीफ
इस प्रदूषित कोहरे की वजह से बीजिंग के अस्पताल युवा और बुज़ुर्गों से भर गए जिन्हें सांस संबंधी समस्या हो रही थी। ऐसे में लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई और राजधानी की सड़कें असामान्य रूप से शांत नजर आईं।

प्रदूषण की वजह से घरों की हवा स्वच्छ रखने वाले उपकरणों और चेहरे के मास्क की बिक्री इतनी बढ़ गई कि कुछ दुकानों मांग को पूरा करने में असमर्थ हो गए। एक ऐसे शहर में जो आमतौर से प्रदूषण का आदि हो चुका है, उसके लिए ये आपातकाल जैसे हालात थे।

सालों से अधिकारी बीजिंग में प्रदूषण के ख़तरे के स्तर तक पहुंचने की बात को टालते रहे थे लेकिन अब हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो गए थे। आम लोगों के दबाव की वजह से इस साल की शुरुआत में अधिकारिओं ने प्रदूषण के नए आंकड़े जारी किए।

इन आंकड़ों में बीजिंग में अमेरिकी दूतावास के घंटावार हवा की गुणवत्ता संबंधी आंकड़ों की तर्ज पर प्रदूषण की जानकारी दी गई जिसे पहले चीन की सरकार विदेशी हस्तक्षेप कहा करती थी।

स्मॉग
जब हानिकारक प्रदूषण का कोहरा जिसे अंग्रेजी में स्मॉग कहा जाता है, बीजिंग पर छा गया तब देश की मीडिया पहली बार हरकत में आई।

टीवी के प्राइम टाइम बुलेटिन में प्रदूषण की ख़बर पहली ख़बर बनी और कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'पीपुल्स डेली' में सुर्खी छपी- 'हमारी हवा को क्या हो गया है?'

इस प्रश्न का सीधा जवाब चीन के अभूतपूर्व और तेज रफ्तार आर्थिक विकास में छुपा है। प्रदूषण की समस्या इसी वजह से पैदा हुई है। किसी भी कीमत पर विकास की भूख ने ही चीन के पर्यावरण को ख़तरे के स्तर तक प्रदूषित कर दिया है।

कोयले पर आधारित बिजली संयंत्र देश के कारख़ानों को ऊर्जा तो देते ही हैं, लाखों घरों को भी बिजली की आपूर्ति करते हैं, लेकिन इसके साथ ही ये प्लांट हवा में विषैले तत्व की मात्रा भी बढ़ाते हैं।

अकेले बीजिंग में पचास लाख कारें सड़कों पर जाम लगा देती हैं। ये इस बात का प्रमाण है कि देश में लोग धनी हुए हैं। लेकिन ये इस बात का भी प्रमाण है कि चीन गाड़ियों से हो रहे प्रदूषण से निपटने को लेकर गंभीर नहीं है।

चीन में सिर्फ वायु प्रदूषण की समस्या ही नहीं है बल्कि देश के झील, नदियां और भूमिगत जल भी उद्योगों के प्रति उदार रवैय्या रखने की वजह से गंभीर रूप से प्रदूषित हो गए हैं।

जल प्रदूषण
बीजिंग में शायद ही कोई हो जो नलके से आनेवाले पानी की गुणवत्ता पर भरोसा करता हो। ऐसे हालात में ये उम्मीद है कि बीजिंग में हाल में छाया गंभीर स्मॉग एक बड़ा बदलाव लाएगा और चीन की सरकार कहेगी कि, "अब बहुत हो गया। हमें आर्थिक विकास की जगह जीवन की गुणवत्ता को तरजीह देनी है।"

हाल के महीनों में चीन के कई शहरों में नए कारखानों की स्थापना के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। धीरे-धीरे चीन में ये स्वर उभरने लगे हैं कि लोग अपने घर के पिछवाड़े में कारखाने नहीं चाहते।

लेकिन मौजूदा हालात में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं रखी जा सकती। आज भी आर्थिक विकास देश की सरकार की पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों को लगता है कि आर्थिक विकास के बिना आर्थिक असंतुलन पैदा हो जाएगा और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

आज भी चीन में लाखों ऐसे लोग हैं जो अपनी पहली कार, पहला एयरकंडीशनर और पहला फ्रीज ख़रीदना चाहते हैं। ऐसे लोगों के सपनों पर लगाम लगाने की हिम्मत कौन कर सकेगा? इसी वजह से इस बात की संभावना कम है कि आने वाले कई वर्षों में बीजिंग की हवा स्वच्छ हो सकेगी।


ऐसे हालात में कुछ धनवान चीनी अब अपने बच्चों को कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में बसाने लगे हैं। लेकिन बहुसंख्यक चीनियों के लिए ये कोई विकल्प नहीं हो सकता है।

मैं बीजिंग में पिछले ढाई साल से रह रहा हूं और प्रदूषण के मौजूदा हालात को देखते हुए मैंने अपने पहले एयर प्यूरिफ़ायर का ऑर्डर दे दिया है और दफ्तर जाते समय बाइक पर मैं फेस मास्क का इस्तेमाल करने लगा हूं।

हर सुबह खिड़की का पर्दा हटाने से पहले उम्मीद करता हूं कि काश! तेज हवा शहर के प्रदूषण को कहीं उड़ा ले गई हो।

मार्टिन पेशेंस, बीबीसी संवाददाता (बीजिंग)

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