फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   smart mask will give news of pollution

प्रदूषण की खबर देगा ‘स्मार्ट मास्क’

Tue, 12 Mar 2013 05:57 PM IST
बीबीसी हिंदी/मैट ग्लेजब्रुक
बीबीसी हिंदी/मैट ग्लेजब्रुक Updated Tue, 12 Mar 2013 05:57 PM IST
विज्ञापन
smart mask will give news of pollution

स्मार्टफ़ोन की बात अब बहुत पुरानी पड़ चुकी है। प्रदूषण से बचाव के लिए हम लोगों को अक्सर मास्क पहने हुए देखते हैं। लेकिन आपने कभी ये सोचा है कि क्या ऐसा मास्क भी मुमकिन है जो सबको शहर की खराब आबोहवा की ख़बर दे?

विज्ञापन


मौजूदा मास्क हवा में मौजूद नुकसानदेह चीजों को छान कर हमारी सांसों को कुछ हद तक बेहतर बनाते हैं। पहली नजर में प्रदूषण के स्तर को बताने वाले मास्क पर यकीन करना मुश्किल लगता है।
विज्ञापन


ऐपल और सोनी के कुछ उत्पादों की डिजाइन बनाने वाली एक फर्म ने वायु प्रदूषण की समस्या का ऐसा समाधान पेश किया है जो 21 वीं सदी के माकूल है।

चीन में प्रदूषण
मास्क लगाए हुए आम शहरियों को चीन की आधुनिकता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। ये मास्क दिखने में ऐसे लगते हैं मानो डॉक्टरों के इस्तेमाल में लाए जाते हों।
विज्ञापन
विज्ञापन


मास्क के कई और पहलू भी हैं। चीन के औद्योगिक विकास का वहां के पर्यावरण पर पड़े बुरे असर के नतीजे के तौर पर भी इसे देखा जाता है।

शंघाई और बीजींग जैसे शहरों के बाशिंदों के लिए मास्क पहनना एक नीरस सी कवायद बन कर रह गई है। चाहे वो गर्मी के दिन हों या जाड़े का मौसम, कभी कभार तो ये फ़ैशन सरीखा भी लगने लगता है।

मास्क की मांग
हाल के महीनों में प्रदूषण के स्तर में हुए इजाफ़े का असर मास्क की बिक्री में आए उछाल पर भी देखा जा सकता है।

जनवरी के महीने में जब बीजिंग शहर कोहरे से लिपटा हुआ था तो उस दौरान मास्क की रोज़ाना की ब्रिकी एक लाख के करीब पहुंच गई थी।

इन हालात में ऐपल और सोनी जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुकी अंतराष्ट्रीय फर्म ‘फ्रॉग’ ने मौजूदा मास्क को फिर से डिजायन करके उसे एक समझदार मशीन में तब्दील कर दिया।

नए मास्क में ब्लूटूथ लगा हुआ है। वह हवा में मौजूद प्रदूषण के स्तर को माप सकता है और उससे जुड़े आंकड़ों को शेयर कर सकता है।

फ्रॉग के क्रिएटिव डाइरेक्टर रेनर रेसलर ने बीबीसी को इस नए मास्क के बारे में कई बातें बताई।

फ्रॉग का एयरवेव्स
इस मास्क को ‘एयर वेव्स’ नाम दिया गया है।

मौजूदा मास्क को ही फिर से डिजायन किए जाने की जरूरत के सवाल पर रेनर ने कहा, “चीन में मास्क पहनने का रिवाज सा बन गया है। लोग कई वजहों से मास्क पहनते हैं। केवल हवा साफ करने के लिए ही नहीं बल्कि कुछ लोग मास्क सर्दी, धूप या हवा में मौजूद विषाणुओं से खुद को बचाने के लिए भी पहनते हैं। कुछ शिष्टाचारवश भी मास्क पहनते हैं।”


मौजूदा मास्क में खामियों की बात पर रेनर ने बताया, "प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ ही मोबाइल टेक्नॉलॉजी को लेकर लोगों का रूझान बढ़ा है। लोग प्रदूषण के भरोसेमंद आंकड़ों में दिलचस्पी रखते हैं।"

आकार लेती कल्पना
रेनर ने यह कबूल किया कि एयरवेव्स की डिजायन पर नाइके प्लस, फिटबिट, ग्लोकैप और गूगल ग्लास जैसे उत्पादों का असर है।

यह सवाल अहम था कि एयरवेव्स को डिजायन करने में किस तरह की चुनौतियां पेश आई।

उन्होंने बड़ी सादगी से कहा कि यह अभी एक विचार ही है और हम यह दावा नहीं कर रहे हैं कि यह फिलहाल पूरी तरह से काम भी कर रहा है।

सबसे चुनौती यह है कि एक मास्क में उससे मिलने वाले आराम से समझौता किए बिना उसमें छन्नी, ब्लूटूथ, बैटरी और बिजली की सर्किट कैसे फ़िट किया जाए।

रेनर को लगता है कि ब्लूटूथ वाले मास्क का उत्पादन तकनीक की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

एयरवेव्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चीज पर वह कहते हैं कि इसे प्लास्टिक और सिलिकॉन से मिला कर बनाया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed