फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Six settlements of five million dollars in Indo-Palestine

भारत-फलस्तीन में पांच करोड़ डॉलर के छह समझौते- स्वास्थ्य, शिक्षा समेत प्रिंटिंग प्रेस मशीनों पर करार

Sun, 11 Feb 2018 12:49 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रामल्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रामल्ला Updated Sun, 11 Feb 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
Six settlements of five million dollars in Indo-Palestine

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फलस्तीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पांच करोड़ डॉलर यानी करीब 325 करोड़ रुपये के छह समझौते हुए। इसमें करीब 200 करोड़ रुपये से बनने वाला सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल शामिल है। इसके अलावा 50 लाख डॉलर की लागत से महिला सशक्तीकरण केंद्र बनेगा। वहीं 50 लाख डॉलर का शिक्षा क्षेत्र में एक समझौता हुआ और रामल्ला स्थित राष्ट्रीय प्रिंटिंग प्रेस की मशीनों को लेकर भी एक करार हुआ। 

विज्ञापन


तीन करोड़ डॉलर से बनेगा सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल

रामल्ला में फलस्तीन के प्रधानमंत्री रामी हमदल्ला ने उनका स्वागत किया। फलस्तीन में उतरते ही मोदी ने ट्वीट किया, यह ऐतिहासिक दौरा है। यह द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाएगा। मोदी और प्रधानमंत्री हमदल्ला के साथ फलस्तीन के महान नेता यासर अराफात के मकबरे पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। 
विज्ञापन


प्रधानमंत्री ने पास में स्थित अराफात म्यूजियम का भी दौरा किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी आधिकारिक समारोह के लिए रामल्ला स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। वहां राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले। उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। राष्ट्रपति कार्यालय में आधिकारिक वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, साझा प्रेस वार्ता की और साथ में लंच किया। फिर मोदी हेलीकॉप्टर से अम्मान के लिए रवाना हो गए। जहां से वो यूएई पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नौ फरवरी से जॉर्डन, फलस्तीन और यूएई के दौरे पर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यरुशलेम को राजधानी घोषित किए जाने से है तनाव

मोदी का यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने यरुशलेम को इस्राइल की राजधानी घोषित कर दिया था। इसके चलते पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया था। बाद में ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पेश हुआ। इसके समर्थन में भारत समेत 128 देशों ने मतदान किया और ट्रंप के फैसले को अमान्य करार दिया। 

भारत निभा सकता है शांति वार्ता में भूमिका

राष्ट्रपति अब्बासी ने कहा कि हम इस्राइल के साथ हर तरह की वार्ता को तैयार हैं अगर पूर्वी यरुशलम को फलस्तीन की राजधानी बनाया जाए। अब्बासी ने पहले कहा था, हम हाल में हुईं चीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करेंगे। इस्राइल फलस्तीन शांति प्रक्रिया, भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रिय स्थिति के संबंध में बात करेंगे। चर्चा होगी कि क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने में भारत क्या भूमिका निभा सकता है। 


फलस्तीन और इस्राइल के बीच अंतिम समझौते में भी भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। आर्थिक मुद्दों पर भी बात होगी। अब्बासी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा क्षेत्र में शांति और स्थिरता को समर्थन देने की भारत की चिर स्थायी नीति को दर्शाता है। भारत शुरुआत से टू स्टेट समझौते का समर्थन करता है, जिसके मुताबिक इस्राइल और भविष्य का फलस्तीन साथ में शांति से रहेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed