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हसीना ईशनिंदा क़ानून के ख़िलाफ़

Mon, 08 Apr 2013 12:54 PM IST
Updated Mon, 08 Apr 2013 12:54 PM IST
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sheikh hasina rejects blasphemy law

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में नया ईशनिंदा विरोधी क़ानून बनाने की मांग को सख्ती से नामंजूर कर दिया है।

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बीबीसी को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि देश में पहले से मौजूद कानून ईशनिंदा करने वालों को सज़ा देने के लिए पर्याप्त हैं।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले हफ्ते ही हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के बैनर तले हज़ारों इस्लामी कार्यकर्ताओं ने इस्लाम या पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने वालों के लिए कड़ा कानूने बनाने की मांग को लेकर राजधानी ढाका में बड़ी रैली आयोजित की थी।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा, ''उन्होंने इसकी मांग की है। लेकिन वास्तव में हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है (नया कानून लाने की)। हमें इसकी ज़रूरत नहीं है। उन्हें यह समझना चाहिए कि मौजूदा कानून ही इसके लिए पर्याप्त हैं।''
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धर्मनिरपेक्ष देश

उन्होंने कहा,''यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है। इसलिए हर धर्म को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। लेकिन किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना ठीक नहीं है। हम हमेशा धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने का प्रयास करते हैं।''
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प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को तीन हफ़्ते का समय दिया है। इसमें ऐसे लोगों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की गई है, जो ख़ुद को नास्तिक बताते हैं और जो इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के दोषी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा,''हम सभी मांगों को देखेंगे, अगर उनमें से कोई उचित होगी, तो हम उसे पूरा करेंगे। अगर यह हमारे समाज और देश के उचित और उपयुक्त नहीं है तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।''

शेख हसीना ने पिछले हफ्ते धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने के आरोप में हुई चार ब्लॉगरों की गिरफ़्तारी के सरकार के फैसले का भी बचाव किया।

इस गिरफ़्तारी के बाद आठ ब्लॉगरों की वेबसाइट को बंद कर दिया गया था। इसे देखते हुए उदारवादियों ने सरकार पर इस्लामिक संगठनों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था।

फ़ैसले का बचाव

लेकिन प्रधानमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ''नहीं।।नहीं। अगर किसी ने किसी धर्म या किसी धार्मिक नेता की भावनाओं को चोट पहुंचाने की कोशिश की तो, यहां कानून हैं और हम किसी भी तरह की कार्रवाई कर सकते हैं।''


प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान से हाथ मिलाने वाले और लोगों का उत्पीड़न करने वालों के लिए बने विशेष युद्ध अपराध न्यायाधिकरण की आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया।

बांग्लादेश में पिछले हफ़्ते विपक्षी दलों ने कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे।

देश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने प्रदर्शन करते हुए युद्ध अपराध के आरोपों का सामना कर रहे अपने नेताओं की रिहाई की मांग की थी।

जमात-ए-इस्लामी के दो वरिष्ठ नेताओं को एक विशेष न्यायाधिकरण दोषी ठहरा चुका है। वहीं उसके सात और नेताओं पर मुकदमा चल रहा है।

पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हुई हिंसक झड़पों में 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश की मौत पुलिस की गोली से हुई।

मानवाधिकार संगठन सुरक्षा बलों पर लोगों को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाते रहे हैं।

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