खाड़ी देशों के बैन के बावजूद कतर-ईरान में है दोस्ती, ये खास वजह दोनों को बनाती है दोस्त!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कतर पर खाड़ी देशों द्वारा लगाए गए तमाम प्रतिबंधों और राजनयिक संबंधों के टूटने पर भी कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ा। उसकी अमेरिका के साथ सामरिक साझेदारी और भी तेजी से बढ़ रही है, तो उसके पुराने सहयोगी भी सहयोग कर रहे हैं। दरअसल, कतर अबतक के सभी विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाता रहा है, पर इस बार अचानक से कई देशों द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद वो अड़ियल रवैया अपना रहा है। और इसकी वजह है उसका प्राकृतिक गैस को लेकर दुनिया पर राज। इसी प्राकृतिक गैस को लेकर उसके साथ खड़ा है ईरान, जिसकी खाड़ी देशों के साथ पुरानी अदावत है। खाड़ी देशों ने कतर से संबंध तोड़ते समय आतंकवादियों को मदद के साथ ईरान की भी मदद का आरोप लगाया था। पर कतर इन सबसे बेपरवाह अपनी धुन में लगा हुआ है।
मौजूदा समय में कतर प्राकृतिक गैस के मामले में सबसे अमीर देश है। उसके पास कई गैस क्षेत्र हैं। कतर ने अप्रैल 2017 में घोषणा की है कि वो खाड़ी राज्य के उत्तरी तट से दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र 'नार्थ डोम' में उत्पादन बढ़ा रहा है। दरअसल, ईरान और कतर के बीच समंदर में प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार है, जिसे दुनिया में सबसे बड़ा भंडार माना जा रहा है। इस पूरे हिस्से पर कतर और ईरान का अधिकार है। यही वजह है कि कतर पर लगे तमाम प्रतिबंधों के बावजूद आपसी हितों को देखते हुए ईरान हर संभव कतर की मदद कर रहा है।
कतर दुनिया में तरल प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा निर्यातक है। प्राकृतिक गैस की कतर से होने वाली आपूर्ति पर कई देश निर्भर हैं। खाड़ी देश का यह मुल्क विश्व को बड़ी मात्रा में LNG गैस सप्लाई करता है। कतर हरेक साल 77 मिलियन टन गैस का उत्पादन करता है।
चूंकि कतर 2022 में फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी भी करने जा रहा है। तेल की कमाई से ही स्टेडियम बनेंगे और राजधानी दोहा को कहीं ज्यादा विकसित किया जाएगा। इसी प्राकृतिक गैस के भंडार ने कतर के विकास में सबसे ज्यादा मदद की है और मौजूदा समय में प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी कतर दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार है।
बहरहाल, कतर पेट्रोलियम ने कहा है कि कतर और उसके पड़ोसी देशों के बीच हालिया राजनयिक दरार से उत्पादन में कोई असर नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि कतर पर खाड़ी देशों के प्रतिबंधों के बाद ईरान ने कतर को अपना सहयोग बढ़ा दिया है। ईरान कतर को न सिर्फ राजनीतिक मदद कर रहा है, बल्कि वो रोजमर्रा के इस्लेमाल में आने वाले सामानों की आपूर्ति भी कर रहा है।