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नेपाल भूकंप के बाद पहली बार सामने आई ये चौंकाने वाली बात

Fri, 01 May 2015 05:49 PM IST
Updated Fri, 01 May 2015 05:49 PM IST
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satellite images of nepal earthquake

यूरोप के सेंटिनल-1ए सैटेलाइट से मिले ताजा आंकड़ों से पता चला है कि भूकंप के दौरान काठमांडू के आसपास का एक बड़ा भूभाग एक मीटर तक उठ गया है। रडार से लैस यह सैटेलाइट अपनी कक्षा से ली गई पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर ज़मीनी हलचल का पता लगाने में सक्षम है।

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वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट से मिली जानकारी को एक इंटरफेरोग्राम के जरिए प्रस्तुत किया है। इंटरफेरोग्राम एक रंगीन लेकिन जटिल तकनीक वाला नक्शा होता है, जिससे धरती के अंदर के फॉल्टलाइन के समांतर होने वाले विस्थापन का पता चलता है।

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इंटरफेरोग्राम से ऐसे चला पता

satellite images of nepal earthquake

इंग्लैंड के नेर्क सेंटर फॉर द ऑब्जर्वेशन एंड मॉडलिंग ऑफ अर्थ क्वेक, वॉल्कैनोज एंड टेक्टोनिक्स (कोमेट) के प्रोफेसर टिम राइट ने बताया, "ये काठमांडू के उत्तर-पश्चिम में हुआ है।

दरअसल हम इस इंटरफेरोग्राम में रंगीन 'फ्रिंज' (तरंग) को गिनते हैं। इसमें कुल 34 फ्रिंज हैं यानी एक मीटर से ज्यादा का उभार।" इंटरफेरोग्राम से पता चलता है कि काठमांडू के उत्तर में धरती थोड़ी धंस गई है। हल्के धक्के के बाद ऐसा होना आम बात है।

वैज्ञानिक यह देखने में सफल रहे कि फॉल्ट से भूकंप के केंद्र से पूरब की ओर फॉल्ट लाइन टूटी लेकिन इसने सतह को तोड़ा नहीं। इससे संकेत मिलता है कि संभव है कि भूकंप से पहले धरती के भीतर चट्टानों में हुआ तनाव पिछले शनिवार को आए 7.8 तीव्रता वाले भूकंप और उसके बाद आए आफ्टरशॉक से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

इस इंटरफेरोग्राम को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के विशेष अध्ययन ' आईएनएसएआरएपी (इनसाराप) के तहत तैयार किया है।' ये अध्ययन नॉर्वे, नीदरलैंड, इंग्लैंड और पोलैंड की संस्थाओं ने मिलकर किया है। इस इंटरफेरोग्राम को आने वाले वक्त में बेहतर बनाया जाएगा। इसकी मदद से तबाही और भूस्खलन की सचित्र व्याख्या की जा सकेगी।

बेहतर आपदा प्रबंधन

satellite images of nepal earthquake

इनसाराप भूकंप की आंतरिक संरचना के विश्लेषण के लिए एक मॉडल भी विकसित करेगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक इस भूकंप को ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में समझ पाएंगे।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऐसे विश्लेषण से भविष्य में आने वाले भूकंपों का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा और आपदा प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकेगा। सेंटिनल-1ए यूरोपीय संघ द्वारा धरती का निरीक्षण करने के लिए भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यानों के बेड़े में पहला सैटेलाइट है।

अगले साल सेंटिनेल-1बी को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। जिसके बाद ये दोनों सैटेलाइट हर छह दिन पर पूरे पृथ्वी की तस्वीरें भेज सकेंगे। (दोनों इंटरफेरोग्राम का कॉपीराइट Copernicus data (2015)/ESA/PPO।labs-Norut-COMET-SEOM Insarap study के पास है।)

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