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एक सिख के हौसले ने ऐसे बचाई कई लोगों की जान

Tue, 24 Sep 2013 09:35 AM IST
नैरोबी
नैरोबी Updated Tue, 24 Sep 2013 09:35 AM IST
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शहर के भीड़भाड़ वाले शापिंग मॉल वेस्टगेट में शनिवार को जब हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, उस समय वहां मौजूद लोगों के बीच एक सिख युवक सतपाल सिंह भी था।

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सतपाल ने गोलियों की बौछार केबीच न सिर्फ कई लोगों को सुरक्षित मॉल से बाहर निकाला, बल्कि लोगों को मॉल से बाहर पहुंचाने के बाद यह साहसी युवक फिर मॉल में घुसा और कुछ घायल लोगों को भी वाहर निकाल लाया।
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पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए सतपाल सिंह ने न्यूज पोर्टल बीबीसी डॉट कॉम को बताया,‘‘मैं एक बिजनेस मीटिंग के लिए मॉल में गया था।

हमले के समय हम  जावा कॉफी हाउस के पास सीढ़ियों पर थे। वहीं कार पार्किंग में बच्चे कुकिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे।

करीब 12.25 बजे हमने गोलियों की आवाज सुनी और मॉल के मुख्य प्रवेश द्वार पर चिल्लाने का शोर सुना, जिसे देखने के लिए मैं उस ओर गया।’’

सतपाल ने आगे बताया,‘‘मैंने देखा लोग इधर-उधर भाग रहे हैं, चारों ओर गोलियों की बौछार हो रही थी और लोग फर्श पर गिर रहे थे।

कोई भी वहां पहुंचकर कुछ करने की हालत में नहीं था- लोग बस उस जगह से भाग रहे थे। मैं सीढ़ियों से नीचे भागा और पहली मंजिल पर पहुंचा।

मैं एक पिलर के निकट एक सशस्त्र पुलिस अधिकारी के पास पहुंचा और उसे कहा कि वह नीचे जाए और देख कि क्या हालात हैं और बताए कि हम क्या कर सकते हैं।’’

हमलावर का चेहरा देखा

सतपाल ने कहा,‘‘मैं हैरान रह गया, वह मेरे साथ नीचे जाने को तैयार नहीं हुआ, इसलिए मैं अकेला ही नीचे भागा जहां मुख्य प्रवेश द्वार पर ज्वैलरी शॉप है।

मैंने देखा एक आदमी मुंह के बल फर्श पर गिरा था और एक अन्य व्यक्ति सीढ़ियों पर खून से सना हुआ पड़ा था। जैसे ही मैं मदद के लिए आगे बढ़ा, मैंने सीढ़ियों से एक सोमाली युवक को अपनी ओर आते देखा और उसने मुझपर दो फायर किए।
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वह सफेद कमीज पहने हुए था, उसने दांए कंधे पर एक बड़ा सा बैग लटकाया हुआ था, और उसने कोई नकाब नहीं पहना हुआ था, इसलिए मैं उसका चेहरा देख लिया।’’

सतपाल ने इस संवाददाता को आगे बताया,‘‘मैं नहीं जानता कि उसका निशाना कैसे चूक गया। मेरे लिए तो उसकेपास एक बड़ी गन थी।

मेरा मानना है कि वह अवश्य ही एके-47 थी। मैंने सोचा कि वे हर किसी को और उनके रास्ते में आने वाले हर व्यक्ति को गोली मार रहे हैं, या फिर जो लोग फर्श पर गिरे हुए हैं, वे उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। जब उसने मुझ पर पहली गोली चलाई, मैं तेजी से नीचे झुक गया।

उसने दूसरा फायर किया। मैं उससे भी बच गया और तेजी से पहली मंजिल की ओर भागा ताकि वहां पुलिस अधिकारी को इस गोली चलाने वाली की जानकारी दे सकूं।’’

‘‘मैं जब पहली मंजिल पर पहुंचा, वहां पुलिस अधिकारी नहीं था। तब मैं टॉप फ्लोर पर पहुंचा और वहां मौजूद सभी लोगों को सिनेमा हाल में धकेला और सुरक्षा गार्ड से शटर गिरा देने को कहा।

इसके बाद जब हमने गोलियों की आवाज को ओर करीब आते सुना तो हमने लोगों को ऊपर उस जगह की ओर धकेलना शुरू किया जहां टिकट बिकते हैं और सभी से कहा कि वे झुककर आगे बढ़ें।’’

सतपाल ने बताया,‘‘हमने देखा दो लोग ऊपर आए और उन्होंने चारों ओर फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ने अपने सिर पर साफे बांध रखे थे।

हम उनके चेहरे पूरी तरह नहीं देख सके लेकिन हमने देखा कि उन्होंने बैग भी उठाए हुए थे। इधर, हालांकि शटर गिरा हुआ था, खिड़कियां शीशे की थीं।

हमने सिनेमा के कर्मचारियों से पूछा कि क्या वहां कोई आपातकालीन रास्ता है जिसका हम इस्तेमाल कर सकें। तब वे कर्मचारी हमें मूवी थियेटर में ले गए जहां आपातकालीन रास्ता था।

ऐसे बचे
आपातकालीन रास्ते से बाहर आने के बाद, हम ऊपरी छत के टैरेस पर पहुंचे और हमने निर्माण सामग्री की मदद से दरवाजा बंद कर दिया, क्योंकि बाहरी तरफ से हम दरवाजा बंद नहीं कर सकते थे।

वहां एक गैस वेल्डिंग मशीन, गैस सिलेंडर और ईंटे पड़ी थीं, जिन्हें हमने दरवाजा मजबूती से बंद करने के लिए इस्तेमाल किया।

मेरा ख्याल है कि टैरेस पर 40 से अधिक लोग थे। एक पुलिस कर्मचारी भी था जिसने पेंट पहन रखी और कमीज उतार दी थी। शायद ऐसा उसने सुरक्षा की दृष्टि से किया था ताकि आतंकवादी उसे पहचान न सकें, हालांकि वह एके-47 लिए हुए था।’’

सतपाल ने बताया,‘‘हमारे साथ एक गर्भवती महिला भी थी और कुछ बच्चे भी हमारे साथ थे। उस समय हमारे साथ कई और लोग भी थे।

लगभग 45 मिनट के बाद, हमने ऊपर से ही कार पार्किंग एरिया में देखा जहां कुछ देर पहले बच्चे कुकिंग शो में हिस्सा ले रहे थे, वहां बच्चे लहुलुहान होकर जमीन पर गिरे हुए थे और हमने लोगों को गोलियों की बौछार से बचकर जावा कॉफी हाउस के आपातकालीन रास्ते की ओर बढ़ते देखा।

तब हम भी टैरेस से जावा कॉफी हाउस की ओर बढ़ना शुरू किया और हम सीढ़ियां उतरने लगे। यह रास्ता बेसमेंट की ओर जाता है। तभी हमने गोलियों और चिल्लाने की आवाज सुनी और जैसे ही हम बेसमेंट में पहुंचे, हमने लोगों को गली की ओर खुल रहे गेट से बाहर तेजी से धकेलना शुरू किया।’’

उसने आगे बताया,‘‘जब हमने सभी को बाहर निकाल दिया, पुलिसकर्मी जोकि हमारे साथ था, बेसमेंट में यह देखने के लिए लौटा कि वहां कोई है तो नहीं। तभी उसकी टांगों में गोलियां लगीं और उसके हाथ से गन छूट गई। तब हम उसे बाहर खींचकर लाए।’’


घायलों को बचाया

सतपाल ने बताया,‘‘मैं एक रिटायर्ड ब्रिटिश जवान से मिला जिसने बताया कि टॉप फ्लोर पर कुछ लोग फंसे हुए हैं और वह वहीं आ रहा है।

उसने बताया कि उसने चार लोगों की आंखों को छूकर देखा, वे मर चुके थे। लेकिन वहां कुछ अन्य लोग घायल हालत में मौजूद हैं और उन्हें मदद की जरुरत है।’’

‘‘उस पुलिसवाले के पास हथियार थे और उसने बुलेटप्रूफ पहनी हुई थी। इसलिए हमने उसे अपने साथ टॉप फ्लोर पर चलने को कहा ताकि लोगों को नीचे लाया जा सके।

उसने हमारी कोई मदद नहीं की, तो हमने फैसला किया कि हम खुद दोबारा ऊपर जाएंगे। हमने वहां लोगों को गोलियों से घायल हालत में देखा। हमने उन्हें अपने कंधों पर उठाया और आपातकालीन रास्ते से उन्हें नीचे लाए। हमने घायल महिलाओं और बच्चों को वहां से बचाया।

उस समय मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि लोगों को बचाना है और अपने कीनियाई साथियों की हरसंभव मदद करनी है। (बीबीसी)

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