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रोहिंग्या महिला ने सुनाई आपबीती, हर रात जवान घर में घुसकर सुंदर लड़कियों को ले जाते थे

Fri, 15 Sep 2017 02:57 PM IST
amarujala.com- Presented By: विकास कुमार
amarujala.com- Presented By: विकास कुमार Updated Fri, 15 Sep 2017 02:57 PM IST
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rohingya woman begum bahar told how soldiers barge into our home for girls
Rohingya

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति कितनी बदतर हैं इस बात का जीता-जागता सबूत है बेगम बहार। बेगम बहार तीन दिन तक नंगे पैर जंगल में चलती रही। उसकी पीठ पर कपड़े से आठ महीने का बच्चा बंधा हुआ था।

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पढे़ं: म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों संग रुह कंपा देने वाली हैवानियत, पढ़िए जुल्म की दर्दनाक दास्तां
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जब उसे भूख लगी तो उसने जमीन से पौधे उखाड़े ताकि खाने के लिए कुछ कीड़े मिल सके। जब उसे प्यास लगी तो जंगल में बहने वाला खारा पानी पिया। जैसे-तैसे आखिरकार बेगम बहार नाफ नदी पहुंची तो उसे वहां एक नाव दिखी, जिसके सहारे वो अपने बच्चे के साथ सुरक्षित जगह पहुंच सकी।
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बेगम उस नाव को देखकर जमीन पर गिर पड़ी और जोर-जोर से रोने लगी। उसके पैर फट चुके थे और उनमें से खून निकल रहा था। नदी पार करने पर नाव का आकार पूरी तरह बिगड़ चुका था। लेकिन वो राहत महसूस कर रही थी।

हजारों रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में मारे जा चुके थे

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Rohingya

हजारों रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में मारे जा चुके थे। लेकिन वो अब 3 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों के बीच सुरक्षित बांग्लादेश में बने शरणार्थी कैंपों तक पहुंच चुकी थी। बेगम बीते कई हफ्तों से यहां रह रही है। 

बेगम अपने बीते दिनों को याद करते हुए कहती हैं, जहां हम पैदा होते हैं, वो हमेशा हमारी मातृभूमि होती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपके साथ कितना बुरा व्यवहार हुआ है, मातृभूमि हमेशा हमारी मां होती है, जिसे कोई छोड़ना नहीं चाहता है। लेकिन हमारे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था। 

सेना हमारे गांव में घुस चुकी थी और उन्होंने लोगों को मारना शुरू कर दिया था। म्यांमार के रखाइन राज्य में दशकों से रोहिंग्या मुसलमान ऐसे ही रह रहे हैं। यहां रहने वाले मुसलमानों की संख्या करीब 13 लाख है और करीब 15 लाख रोहिंग्या मुसलमान दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में शरणार्थी के तौर पर रहने को मजबूर हैं।

गांव को जलाए गए और औरतों पर अत्याचार किए गए

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2013 में संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुस्लिमों को दुनिया का सबसे सताया हुआ अल्पसंख्यक समुदाय बताया था। म्यांमार की सेना रोहिंग्या मुसलमानों को वहां से निकालने के लिए इनके गांवों को जलाने लगे और इनपर अत्याचार करने लगे।

सेना ने अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी के खिलाफ जंग छेड़ दी। जिसकी वजह से वहां के लाखों लोगों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा। बेगम बहार की ही तरह कैंप में रह रही हामिद खातून भी अपने ऊपर हुए जुल्मों को याद करते हुए कहती हैं कि कैसे हर रात को म्यांमार के जवान उनके घरों के दरवाजों को बजाते थे और जबरदस्ती घर में घुसकर लड़कियों को जबरन जंगल में पकड़कर ले जाया करते थे।

जंगल में ले जाकर सेना के जवान उनके साथ बलात्कार किया करते थे। जिन लड़कियों की किस्मत अच्छी हुई करती थी उन्हें वो सड़क पर बुरी हालत में छोड़ दिया करते थे नहीं तो आमतौर पर वो उनका गला काटकर मार दिया करते थे।

खातून ने आगे बताया कि बेशक हमें यहां भूखा रहना पड़ रहा है लेकिन कम से कम हम यहां शांति से जी तो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बीते दो सप्ताह में करीब 3 रोहिंग्या मुसलमान सीमा पर करके बांग्लादेश में शरणार्थी बने हुए हैं।  

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