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काबुल हमला: 'विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियां' ज़िम्मेदार
Updated Mon, 20 Jan 2014 09:12 AM IST
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अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आरोप लगाया है कि काबुल के रेस्तरां में शुक्रवार को हुए जानलेवा हमले के पीछे 'विदेशी ख़ुफ़िया सेवाओं' का हाथ था।
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राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का ये भी कहना है कि जिस 'चतुराई' और 'जटिलता' से यह हमला किया गया था, उसे कोई साधारण तालिबान अंजाम नहीं दे सकता।
हालांकि तालिबान ने इस आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी ली थी, जिसमें 21 लोग मारे गए थे।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, ''राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का कहना है कि इतनी चालाकी से इतना जटिल हमला किसी साधारण तालिबान की कारगुज़ारी नहीं है। ये कहने में कोई संदेह नहीं है कि इस तरह के हमलों के पीछे सरहद पार की ख़ुफ़िया एजेंसियों का हाथ हैं।''
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राष्ट्रपति हामिद करज़ई, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष हैं।
इस हमले की जांच-पड़ताल जारी है और इस दौरान कई अफ़ग़ान अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
शुक्रवार को हुए हमले में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के स्थानीय प्रमुख और कम से कम नौ देशों के नागरिक मारे गए थे।
सवाल सुरक्षा-व्यवस्था का
काबुल के वज़ीर अक़बर ख़ान इलाके में टेवर्ना-डु-लिबान रेस्तरां विदेशियों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम रहते हैं।
लेकिन शुक्रवार को एक आत्मघाती हमलावर ने रेस्तरां के बाहर ख़ुद को धमाके से उड़ा दिया था और इस दौरान दो बंदूकधारी भीतर दाख़िल होने में क़ामयाब हो गए थे।
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दोनों बंदूकधारियों ने रेस्तरां के भीतर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, हालांकि सुरक्षाबलों ने बाद में दोनों को मार गिराया था।
अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा-व्यवस्था अभी भी चिंता का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है, जहां नेटो नेतृत्व वाले बाकी बचे विदेशी सैनिकों को इस वर्ष के आख़िर तक देश छोड़कर जाना है।
ऐसे में देश की सुरक्षा-व्यवस्था का पूरा ज़िम्मा अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के कंधों पर होगा।
वहीं अमरीका चाहता है कि अफ़ग़ानिस्तान उसके साथ सुरक्षा संबंधी एक समझौते पर दस्तख़त कर दे ताकि कुछ विदेशी सैनिक इस साल के बाद भी अफ़ग़ानिस्तान में ठहर सकें।
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ऐसे किसी समझौते पर दस्तख़त करने से मना कर चुके हैं।