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फ़ेसबुक पर औरतों की इज़्ज़त का सवाल

Wed, 29 May 2013 12:37 PM IST
bbc
bbc Updated Wed, 29 May 2013 12:37 PM IST
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respect of women on facebook
हज़ारों लोगों ने फ़ेसबुक प्रबंधन से महिलाओं को कथित तौर पर अपमानित करने वाली फ़ेसबुक टिप्पणियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
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कुछ लोगों ने एफ़बीरेप नाम के अभियान की शुरूआत की है जिसका मुख्य उद्देश्य फ़ेसबुक पर बलात्कार और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देने वाले विषयों को उजागर कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करना है।

फ़ेसबुक ने इस तरह की कई टिप्पणियों को पन्ने से हटा दिया है।

लेकिन इस अभियान को लोगों का लगातार समर्थन मिल रहा है। अब तक 50 हज़ार से ज्यादा लोगों ने इस अभियान के समर्थन पर ट्वीट किया है और लगभग पांच हज़ार लोगों ने कथित महिला विरोधी सामग्री के साथ आने वाले विज्ञापन की कंपनियों को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया है।
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इस अभियान के समर्थन में एक ऑनलाइन पीटिशन भी जारी की गई है जिसके समर्थन में अब तक दो लाख 20 हज़ार लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं।

अमरीका स्थित महिला संगठन विमेन, एक्शन और मीडिया (वैम) और ब्रिटेन स्थित संगठन 'एवरेडी सेक्सिज़म' समेत 40 महिला संगठनों ने इस अभियान की शुरूआत की है।

व्यापक कार्रवाई की मांग
फ़ेसबुक प्रबंधन को सार्वजनिक तौर पर लिखे पत्र में इस अभियान ने मांग की है कि महिला विरोधी टिप्पणी करने वालों के ख़िलाफ़ 'त्वरित, व्यापक और प्रभावी' क़दम उठाए जाएं।
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फ़ेसबुक को लिखे पत्र में उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिए हैं जो उनके अनुसार महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देते है जो अस्वीकार्य है।

उस पत्र में फ़ेसबुक इस्तेमाल करने वाले एक ग्रुप 'इसी कारण भारतीय महिलाओं का बलात्कार होता है' का उदाहरण भी दिया गया है।

एक और जगह पर एक महिला को सीढ़ियों के नीचे पड़े हुए दिखाया गया है और उसके साथ ही लिखा हुआ है, 'अगली बार गर्भवती मत होना।'

विज्ञापन देने वाली कई कंपिनयां भी इस अभियान के बाद हरकत में आ गई हैं।

यूनीलिवर कंपनी के एक उत्पाद 'डव' ने बयान जारी कर कहा है, ''डव इस विषय को काफ़ी गंभीरता से लेता है और ऐसी किसी गतिविधि की अनेदेखी नहीं कर सकता जो जानबूझकर किसी को भी अपमानित करता है।''

डव कंपनी और फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि पत्र में जो उदाहरण दिए गए थे उन्हें फ़ेसबुक से हटा दिया गया है।

फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, ''फ़ेसबुक पर किसी भी तरह के भड़काऊ भाषण या किसी को धमकी देने वाली या हिंसा को बढ़ावा देने वाली टिप्पणी के लिए कोई जगह नहीं है। हम ऐसी किसी भी सामग्री को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो कि किसी के लिए हानिकारक हो।''

'नियंत्रण मुश्किल'
फ़ेसबुक ने अपने बयान में ये भी कहा कि हर ऐसी टिप्पणी या सामग्री जो किसी के अनुसार 'अश्लील और भद्दा' है, ज़रूरी नहीं कि वो फ़ेसबुक की नीतियों के ख़िलाफ़ हो।

एवरेडी सेक्सिज़म प्रोजेक्ट की संस्थापक लॉरा बेट्स ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि उनके अभियान की शुरूआत तब हुई जब फ़ेसबुक पर कथित महिला विरोधी टिप्पणियों से आहत होकर बहुत सारी महिलाओं ने उनसे संपर्क किया।

लॉरा बेट्स का कहना था, ''ज़ाहिर है ऐसे किसी भी प्लेटफ़ॉर्म को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है जिसे एक अरब से ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हों लेकिन महिलाओं पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।''


बहुत सारी महिलाओं का कहना है कि महिला विरोधी सामग्री के कारण वो फ़ेसबुक का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

लॉरा बेट्स ने कहा कि इस विषय पर अभियान चलाने वाले संगठन और फ़ेसबुक प्रबंधन एक दूसरे से संपर्क में है और दोनों ही पक्षों को आशा है कि जल्द ही इसका समाधान ढ़ूंढ लिया जाएगा।
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