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रिपोर्ट में खुलासा, इन देशों में किशोरियां खुद पर हिंसा को मानती हैं सही

Fri, 12 Feb 2016 04:37 AM IST
Updated Fri, 12 Feb 2016 04:37 AM IST
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report of United Nations Population Fund, UNFPA

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार आधे से अधिक किशोरियां किन्हीं न किन्हीं कारणों से घरेलू हिंसा को सही मानती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 19 वर्षीय लड़कियों का मानना है कि यदि कोई महिला संभोग से इंकार करने पर उसके साथ हिंसा एक बड़ा कारण है।

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वहीं इसी उम्र की 30 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियों का मानना है कि वो पहले से शारीरिक और यौन हिंसा का शिकार हो चुकी हैं। रिपोर्ट में कंबोडिया, भारत, बंग्लादेश और नेपाल के आंकड़े भी शामिल किए गए हैं और वहां की लड़कियों की यही धारणा है।
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रिपोर्ट की माने तो 25 से 51 फीसदी लड़कियों का मानना है कि पत्नियों का पीटा जाना सही है। इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि अल्प शिक्षा, बेरोजगारी और घर में भी हिंसा की स्वीकार्यता इस सोच की अहम वजहें हैं।
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पाकिस्तान में किशोरियां एचआईवी से संक्रमित

report of United Nations Population Fund, UNFPA

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जहां 10 से 19 साल की किशोरियां एचआईवी से संक्रमित है।

वहीं भारत में 1 लाख 20 हजार, इंडोनेशिया में 46 हजार, थाईलैंड में 11 हजार, म्यांमार में 7,700, कंबोडिया में 3,500 ईरान में 3,200, वियतनाम में 2,600 और नेपाल में 1,200 लोग एचआईवी से ग्रसित है।

इन सब के बीच जब बात आती है यौन स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता कि तो केवल 15 से 24 वर्ष के पाकिस्तानी युवाओं में केवल 28 प्रतिशत को ही जागरुक हैं और 15 से 24 साल की  आधे से अधिक युवतियों को यह नहीं पता है कि कॉंडोम उन्हें एचआईवी से कैसे बचा सकता है। (तस्वीरें United Nations Population Fund (UNFPA) की रिपोर्ट से साभार)

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