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सिरीसेना की पार्टी से राजपक्षे ने 50 साल पुराना रिश्ता तोड़ा, नई पार्टी बनाई

Sun, 11 Nov 2018 07:19 PM IST
भाषा,कोलंबो
भाषा,कोलंबो Updated Sun, 11 Nov 2018 07:19 PM IST
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Rajpakesh broke a 50-year-old relationship with Sirisena's party, formed a new party
sirisena-rajapaksa

श्रीलंकाई नेता महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना की एसएलएफपी से अपना पांच दशक पुराना रिश्ता रविवार को तोड़ लिया और नवनिर्मित श्रीलंका पीपुल्स पार्टी (एसएलपीपी) में शामिल हो गए।मैत्रीपाला ने एक वि़वादस्पद कदम उठाते हुए हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे को श्रीलंका का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

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राजपक्षे का यह कदम दिखाता है कि पांच जनवरी को प्रस्तावित मध्यावधि चुनावों में वह सिरीसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) की जगह अपनी पार्टी एसएलपीपी के परचम तले चुनाव लड़ेंगे।एसएलपीपी का गठन राजपक्षे के समर्थकों ने किया है। पूर्व राष्ट्रपति ने रविवार की सुबह इसकी सदस्यता ग्रहण की।
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राजपक्षे के पिता डॉन एल्विन राजपक्षे एसएलएफपी के संस्थापक सदस्य थे। इसकी स्थापना 1951 में हुई थी।एसएलपीपी की स्थ्रापना पिछले साल राजपक्षे के समर्थकों ने राजनीति में उनके प्रवेश के लिए एक मंच के बतौर की थी। इस पार्टी ने शुक्रवार को स्थानीय परिषद चुनावों में कुल 340 सीटों की दो तिहाई सीटें जीती थीं।
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श्रीलंका की संसद के स्पीकर ने रविवार को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना पर ‘‘सांसदों की शक्तियां छीनने’’ का आरोप लगाया और ‘‘जनसेवकों से उनके अवैध आदेशों का पालन नहीं करने’’ का आह्वान किया।स्पीकर कारु जयसूर्या ने एक कठोर बयान में कहा कि 26 अक्टूबर से प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने और संसद भंग करने तक सिरिसेना के कृत्य लोगों की आजादी को क्षीण बनाते हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले दो हफ्तों से देख चुका हूं। कार्यपालिका शाखा ने सासंदों के अधिकार जब्त कर लिये हैं, उनकी शक्तियां छीन ली हैं जो लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी जनसेवकों से किसी भी अवैध आदेश को लागू करने से इनकार करने का आह्वान करता है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन उन्हें ये आदेश दे रहा है।’’ 

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