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मिस्र में नए संविधान को जनता की मंजूरी
बीबीसी
Updated Wed, 26 Dec 2012 08:47 AM IST
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मिस्र में चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि देश के नए संविधान के मसौदे को लगभग दो तिहाई जनता का समर्थन मिला है। आयोग के अनुसार 15 और 22 दिसंबर को दो चरणों में हुए जनमत संग्रह में 63.8 प्रतिशत लोगों ने मसौदे के हक में अपनी राय दी है। आयोग ने इन परिणामों की घोषणा सरकारी नाइल न्यूज टीवी पर सीधे प्रसारण के दौरान की।
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अब मिस्र में दो महीनों के भीतर चुनाव होंगे, लेकिन आलोचकों का कहना है कि संविधान का नया मसौदा क्रांति के साथ धोखा है जिसे लेकर मिस्र में व्यापक प्रदर्शन भी हुई। विपक्ष का कहना है कि नए संविधान में नागरिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों के लिए उचित प्रावधान नहीं किए गए हैं।
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मिस्र में हुई क्रांति के बाद पिछले साल फरवरी में होस्नी मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उनके तीस साल के शासनकाल में प्रतिबंध झेलने वाला मुस्लिम ब्रदरहुड अब सत्ता में है।
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संविधान पर तकरार
वहीं राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी के इस्लामपंथी समर्थकों का कहना है कि नए संविधान से देश में लोकतंत्र सुरक्षित होगा और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। मिस्र के चुनाव आयोग के अध्यक्ष समीर अबुल माती ने कहा कि मिस्र के कुल 5.2 करोड़ मतदाताओं में से 32.9 प्रतिशत ने जनमतसंग्रह में हिस्सा लिया।
माती ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि कुछ मतदान केंद्रों की निगरानी के लिए फर्जी जजों को लगाया गया था। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति मोरसी ऐसे संविधान को बढ़ा रहे हैं जो इस्लामपंथियों के अनुरूप है जबकि इसमें महिलाओं और ईसाइयों के अधिकारों का पूरी तरह संरक्षित नहीं किया गया है। मिस्र में ईसाई आबादी का 10 फीसदी हिस्सा हैं। हाल में संविधान के मसौदे को लेकर मिस्र में व्यापक प्रदर्शन हुए जो कई बार हिंसक भी हो गए।