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होटल से राजा के बेशक़ीमती गहने चोरी
Updated Sat, 13 Oct 2012 12:03 PM IST
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राजा ओटुमफ़ुओ ओसेई टुटु -द्वितीय एक सम्मेलन में हिस्सा लेने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो आए हुए थे और ये गहने भी उनके साथ ही थे। घाना के 'अशांति' जनजाति के राजा टुटु के साथ गहनों से भरा सूटेकस था जिसे ' रैडिसन ब्लू प्लाज़ा' होटल की लॉबी से चुरा लिया गया।
ये जेवरात पीढ़ी दर पीढ़ी जमा किए गए थे और बेहद क़ीमती माने जाते हैं। राजा इनका इस्तेमाल रीति-रिवाजों और रस्मों को पूरा करने में करते हैं। पुलिस इस चोरी की तहकीकात कर रही है और नॉर्वे की मीडिया के मुताबिक पुलिस का कहना है कि उनके पास निगरानी रखने वाले कैमरों से "अच्छी तस्वीरें" मिली हैं।
धक्का
राजा के सचिव कोफ़ी ओवुसु बोआटेंग ने कहा, "जिसके पास भी व्यक्तिगत रुप से बेशकीमती चीज़ें है वो समझ सकता है कि उनके चोरी हो जाने पर कितना बड़ा धक्का लगता है और जिस किसी को भी हमारी परंरपराओं के बारे में पता है वो जानता है कि इन मुकुट और गहनों का कितना मूल्य है।"
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राजा ओटुमफ़ुओ ओसेई टुटु -द्वितीय वर्ष 1999 में राजगद्दी पर आसीन हुए थे। वो 16वें 'असांतिहेने' के रूप में जाने जाते हैं। अशांतिहेने घाना के सबसे बड़े जनजातीय समूह के पूज्यनीय शासक माने जाते हैं। घाना के राजा की प्रतिष्ठा काफी है लेकिन असलियत में राजा के पास सिर्फ नाम मात्र की शक्तियां ही होती हैं और घाना के संविधान के अनुसार वो राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकते हैं।
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ये जेवरात पीढ़ी दर पीढ़ी जमा किए गए थे और बेहद क़ीमती माने जाते हैं। राजा इनका इस्तेमाल रीति-रिवाजों और रस्मों को पूरा करने में करते हैं। पुलिस इस चोरी की तहकीकात कर रही है और नॉर्वे की मीडिया के मुताबिक पुलिस का कहना है कि उनके पास निगरानी रखने वाले कैमरों से "अच्छी तस्वीरें" मिली हैं।
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धक्का
राजा के सचिव कोफ़ी ओवुसु बोआटेंग ने कहा, "जिसके पास भी व्यक्तिगत रुप से बेशकीमती चीज़ें है वो समझ सकता है कि उनके चोरी हो जाने पर कितना बड़ा धक्का लगता है और जिस किसी को भी हमारी परंरपराओं के बारे में पता है वो जानता है कि इन मुकुट और गहनों का कितना मूल्य है।"
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राजा ओटुमफ़ुओ ओसेई टुटु -द्वितीय वर्ष 1999 में राजगद्दी पर आसीन हुए थे। वो 16वें 'असांतिहेने' के रूप में जाने जाते हैं। अशांतिहेने घाना के सबसे बड़े जनजातीय समूह के पूज्यनीय शासक माने जाते हैं। घाना के राजा की प्रतिष्ठा काफी है लेकिन असलियत में राजा के पास सिर्फ नाम मात्र की शक्तियां ही होती हैं और घाना के संविधान के अनुसार वो राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकते हैं।