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'2030 तक खत्म होगी गरीबी'

Sun, 28 Apr 2013 07:01 PM IST
Updated Sun, 28 Apr 2013 07:01 PM IST
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poverty could be end 2030 year says world bank

साल 2030 तक दुनिया भर में अत्यधिक गरीबी को तकरीबन खत्म कर देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम यॉन्ग किम को महत्वपूर्ण समर्थन मिला है।

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बैंक के मंत्रालय स्तर की एक कमेटी ने जिम यॉन्ग किम के इस विचार का समर्थन किया है कि गरीबी को कम करके इसे दुनिया की आबादी के तीन फीसदी पर रोक दिया जाए।
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विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम यॉन्ग किम खुद यह मानते हैं कि यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है लेकिन इसे हासिल किया जा सकता है।

जिम यॉन्ग किम ने बताया, "हमने अत्यधिक गरीबी को खत्म करने की एक समय सीमा तय की है। दुनिया भर के नेताओं के सहयोग, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के साथ हमें पूरा भरोसा है कि हम इसे संभव बना सकते हैं। यह कड़ी मेहनत से होगा। साल 2030 का लक्ष्य जितना आप सोचते हैं उससे कहीं अधिक नजदीक है। केवल 17 साल ही तो दूर है।"
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आमदनी में सुधार
उन्होंने कहा, "हम दुनिया के सामने इस काम की जरूरत को सामने लाएंगे। हम दुनिया भर में अत्यधिक गरीबी की दर पर हर देश के बारे में अपने काम की प्रगति रिपोर्ट सामने रखेंगे। इसके साथ ही हर एक देश के निचले पायदान पर रह रहे 40 फीसदी लोगों की आमदनी में आने वाले बदलावों पर भी नजर रखेंगे।"

कमेटी ने जिम यॉन्ग किम के इस विचार का भी समर्थन किया है कि सभी देशों के सबसे गरीब लोगों की आमदनी में सुधार करने के लिए की जाने वाली कोशिशों पर और अधिक ध्यान देकर समृद्धि का विस्तार किया जाए।

स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जिम यॉन्ग किम ने कहा, "इस सिलसिले में की गई बैठकों का तीसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दुनिया के देश स्वास्थ्य, और शिक्षा के क्षेत्र में अधिक निवेश करने की जरूरत को अधिक तवज्जो दें।"

शिक्षा तक सबकी पहुंच
जिम यॉन्ग किम का कहना है कि शिक्षा तक सबकी पहुंच सुनिश्चित कराए बिना और पढ़ाई-लिखाई के तौर तरीकों में बदलाव किए बगैर यह संभव नहीं। इससे सभी बच्चे न केवल स्कूल ही जा सकेंगे बल्कि वहां कुछ सीख भी सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेश क्रिस्टीन लगार्डे ने इसके बारे में विस्तार से बताया कि उनका संगठन किस तरह से इन लक्ष्यों को पूरा कर पाने में मदद कर रहा था।


क्रिस्टीन ने कहा, "कम आमदनी वाले देशों को हम कर्ज देने की सहूलियत बढ़ा रहे हैं। महीने भर पहले ही इसे मंजूरी दी गई है। हम छोटे देशों को पहले से ज्यादा मदद दे रहे हैं।"

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