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पेरिस समझौता तोड़ने के बाद मोदी ने ट्रंप को दिया जवाब, हम प्राचीनकाल से ही पर्यावरण हितैषी
एजेंसी/ सेंट पीटर्सबर्ग
Updated Sat, 03 Jun 2017 04:51 AM IST
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सेंट पीटर्सबर्ग में प्रधानमंत्री मोदी
- फोटो : Amar Ujala
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पेरिस समझौता तोड़ने के बाद भारत और चीन की आलोचना करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दे दिया है। सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में प्रधानमंत्री ने भारत को पर्यावरण हितैषी बताते हुए कहा कि यह देश प्राचीनकाल से ही इस जिम्मेदारी को निभाता आ रहा है। इसके लिए उन्होंने वेदों का उदाहरण दिया।
मोदी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत रही है। 5 हजार साल पुराने शास्त्र हमारे यहां मौजूद हैं, जिन्हें वेद के नाम से जाना जाता है। इनमें से एक वेद अथर्ववेद पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है। हम उन आदर्शों को लेकर चल रहे हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि प्रकृति का शोषण अपराध है। यह हमारे चिंतन का हिस्सा है। हम प्रकृति के शोषण को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए हम अपने विनिर्माण क्षेत्र में जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट के नियम पर चलते हैं।
प्रधानमंत्री ने पैरिस करार का जिक्र करते हुए कहा कि आपको जानकर खुशी होगी कि हिंदुस्तान में आज पारंपरिक से ज्यादा रिन्यूअल एनर्जी के क्षेत्र में काम हो रहा है। हम पर्यावरण की रक्षा को लेकर एक जिम्मेदार देश के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। इसको लेकर हमारी पुरानी प्रतिबद्धता है।
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जब ग्लोबल वॉर्मिंग की इतनी चर्चा नहीं थी और पेरिस समझौता नहीं हुआ था। मैं गुजरात का सीएम था। तब कई सालों पहले गुजरात दुनिया में चौथी ऐसी सरकार थी, जिसने अलग क्लाइमेट डिपार्टमेंट बनाया था। इसलिए एलईडी बल्ब के जरिए एनर्जी सेविंग कर रहे हैं। 40 करोड़ एलईडी बल्ब घर-घर पहुंचाए हैं। हजारों मेगावाट बिजली बचाई गई है।
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मोदी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत रही है। 5 हजार साल पुराने शास्त्र हमारे यहां मौजूद हैं, जिन्हें वेद के नाम से जाना जाता है। इनमें से एक वेद अथर्ववेद पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है। हम उन आदर्शों को लेकर चल रहे हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि प्रकृति का शोषण अपराध है। यह हमारे चिंतन का हिस्सा है। हम प्रकृति के शोषण को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए हम अपने विनिर्माण क्षेत्र में जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट के नियम पर चलते हैं।
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प्रधानमंत्री ने पैरिस करार का जिक्र करते हुए कहा कि आपको जानकर खुशी होगी कि हिंदुस्तान में आज पारंपरिक से ज्यादा रिन्यूअल एनर्जी के क्षेत्र में काम हो रहा है। हम पर्यावरण की रक्षा को लेकर एक जिम्मेदार देश के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। इसको लेकर हमारी पुरानी प्रतिबद्धता है।
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जब ग्लोबल वॉर्मिंग की इतनी चर्चा नहीं थी और पेरिस समझौता नहीं हुआ था। मैं गुजरात का सीएम था। तब कई सालों पहले गुजरात दुनिया में चौथी ऐसी सरकार थी, जिसने अलग क्लाइमेट डिपार्टमेंट बनाया था। इसलिए एलईडी बल्ब के जरिए एनर्जी सेविंग कर रहे हैं। 40 करोड़ एलईडी बल्ब घर-घर पहुंचाए हैं। हजारों मेगावाट बिजली बचाई गई है।