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सद्दाम की प्रतिमा के टुकड़े से होगी कमाई!
बीबीसी
Updated Tue, 09 Apr 2013 04:54 PM IST
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बगदाद के फिरदौस चौक पर स्थित इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की प्रतिमा गिराए जाने के ठीक दस साल बाद ब्रिटेन की वायुसेना के एक पूर्व जवान को प्रतिमा के टुकड़े के बिकने से कुछ पैसे मिलने की उम्मीद है।
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नौ अप्रैल 2003 को सद्दाम हुसैन की यह विशाल प्रतिमा गिरा दी गई थी। यह दृश्य दुनियाभर में दिखाया गया था। यह सद्दाम हुसैन के 24 साल के शासनकाल के अंत का प्रतीक था।
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प्रतिमा को भीड़ ने टुकड़-टुकड़े कर दिए थे। शहर के अन्य भागों में स्थित सद्दाम हुसैन की प्रतिमाओं और चित्रों को भी गिरा दिया गया था।
पूर्व पैराट्रूपर 53 साल के नाइजल एली ने 1990-91 में खाड़ी युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं दी थी। फ़िरदौस चौक पर सद्दाम की प्रतिमा गिराए जाने के अगले दिन वे वहां मौजूद थे।
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जश्न का माहौल
फ़ोटो पत्रकार के रूप में काम करने वाले नाइजेल ने ख़ुद को एक पूर्व सैनिक बताते हुए वहां रखवाली कर रहे अमेरिकी मरीन से पूछा था कि क्या वे प्रतिमा का एक टुकड़ा ले सकते हैं।
अमेरिकी सैनिकों ने उन्हें इसकी इजाजत दे दी। इसके बाद उन्होंने एक भारी हथोड़े और छेनी की मदद से पीतल से बनी सद्दाम हुसैन की प्रतिमा के कुल्हे का दो फुट का हिस्सा काट लिया।
एली निजी सुरक्षाकर्मी के रूप में काम करने इराक़ गए थे। उन्होंने बताया कि प्रतिमा गिराए जाने के बाद बगदाद में एक अजीब सा माहौल था।
उन्होंने बताया, ''वहां जश्न मानाया जा रहा था, लेकिन गोलीबारी भी जारी थी। आप जानते हैं कि यह केवल शुरुआत भर थी।''
एली ने प्रतिमा के उस टुकड़े को युद्ध के स्मृति चिन्ह के रूप में बदल दिया है। वे इसे बेचकर सैन्य परोपकार के लिए पैसे जुटाना चाहते हैं। इसमें बर्मिंघम का रॉयल सेंटर फ़ॉर डिफ़ेंस मेडिसिन भी शामिल है, जो घायल सैनिकों का इलाज करता हैं।
उन्होंने इसके लिए 'ट्रेबलटैप' नाम की एक संस्था का गठन किया है, जो युद्ध अवशेषों से कलाकृतियां बनाने में माहिर है।
अक्टूबर 2011 में डर्बी नीलामी घर में हुई नीलामी में ये कलाकृतियां अपने निर्धारित ढाई लाख पाऊंड की कीमत पर नहीं बिक पाई थीं।
एली के लिए मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब उनसे और उनकी कंपनी के एक निदेशक से डर्बीशायर पुलिस ने प्रतिमा के संबंध में पूछताछ की।
पुलिस ने कहा कि उसे इराक़ी सरकार से एक शिकायत मिली हैं, जिसमें प्रतिमा के टुकड़े को इराक़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत बताते हुए उसे वापस मांगा गया है।
प्रमाणिकता पर संदेह
पुलिस ने प्रतिमा के इस टुकड़े की प्रमाणिकता पर भी संदेह जताया था।
एली ने कहा कि उन्हें अभी भी टुकड़े को बेचने की इजाजत नहीं मिली है। लेकिन वे इराक़ी अधिकारियों के साथ मिलकर मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। इसका अभी कोई नतीजा नहीं निकला है।
उन्हें अभी भी उम्मीद है कि वे इराक़ी अधिकारियों के साथ किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे, जिसके बाद इन कलाकृतियों को बेचकर परोपकार के लिए पैसे जमा किए जा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि अभी हाल में कुवैत में आयोजित एक इस्लामी कला मेले में एक विशेषज्ञ ने उन्हें बताया था कि इसकी कीमत लाखों डॉलर में हो सकती हैं।