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कोरिया के हाइड्रोजन बम में पाकिस्तान का हाथ?

Fri, 08 Jan 2016 05:38 AM IST
Updated Fri, 08 Jan 2016 05:38 AM IST
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pakistan transfers nuclear technology to north korea

आतंकियों के समर्थन के आरोपों पर दुनिया भर को सफाई दे रहे पाकिस्तानी हुक्काम उत्तर कोरिया के हाइड्रोजन बम परीक्षण के बाद संदेह के घेरे मे आ गए हैं। उत्तर कोरिया ने बुधवार को हाइड्रोजन बम का परीक्षण करने का दावा किया।

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परमाणु बम से हजार गुना ज्यादा विध्वंशक हाइड्रोजन बम के परीक्षण से इलाके में भूकंप भी आ गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 मापी गई। विशेषज्ञों को उत्तर कोरिया के दावे पर संशय है, हालांकि ये माना जा रहा है कि उसे परमाणु तकनीकी पाकिस्तान ने उपलब्ध कराई है। कम्युनिस्ट नीतियों का समर्थक उत्तर कोरिया मानवाधिकार के मसले पर अमेरिका समेत कई देशों के प्रतिबंध के कारण दुनिया में अलग-थलग पड़ा है।
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उसने 2006, 2009 और 2013 में भी परमाणु परीक्षण किए थे, जिसके चलते संयुक्त राष्ट्र संघ उस पर कई गंभीर प्रतिबंध लगा चुका है। प्रतिबंधों के बाद भी वह हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण करने का दावा कर रहा है। पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के बीच हथियारों की तकनीकी का आदान-प्रदान होता रहा है।
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कोरिया से तकनीकी लेकर पा‌‌क ने बनाई मिसाइल

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वर्तमान शासक किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल के शासन काल में उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों में रुचि लेना शुरु किया था। 1990 तक कोरिया ने प्लूटोनियम आधारित दो परमाणु प्रतिष्ठान विकसित कर लिए ‌थे। योंगब्यॉन और टाइकॉन स्थित ये प्रतिष्ठान प्र‌तिवर्ष 30 परमाणु बम विकसित करने में सक्षम था।

कोरिया ने 1985 में परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए ‌थे, इसलिए वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकता था। 1996 में उसने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत पाकिस्तान ने लंबी दूरी की मिसाइल की तकनीकी के बदले उसे उच्च स्तरीय संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम उपलब्ध कराया।

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल का‌दिर खान ने उत्तर कोरिया को उसी समय यूरेनियम संवर्धन अपकेंद्रण यंत्रों की डिजाइन भी बेचे। बदले में उत्तर कोरिया से मिली लंबी दूरी की मिसाइल की तकनीकी के जरिए पाकिस्तान ने मध्यम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल गौरी विकसित किया।

एक्यू खान ने कोरिया को बेची परमाणु तकनीकी

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पाकिस्तान के समझौते से तकरीबन 10 साल बाद 2006 में उत्तर कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण किया था। 2009 और 2013 में भी कोरिया ने परमाणु परीक्षण किए। ब्रिटेन के एक अखबार ने दावा किया था कि उत्तर कोरिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अब्दुल कादिर खान को‌ 1998 में पत्र लिखकर अपकेंद्रण यंत्रों के बदले दी गई रकम का ब्योरा दिया था।

अखबार के मुताबिक, परमाणु तकनीकी की लेनदेन में पाकिस्तानी सेना के एक पूर्व प्रमुख को 3 मिलियन डॉलर दिए गए थे, जब‌कि एक लेफ्टिनेंट जनरल को 5 लाख डॉलर ‌‌दिए गए थे। हालांकि सेना के दोनों अधिकारियों ने इन दावों को ‌खारिज किया था।

परमाणु तकनीकी बेचने के आरोप में अब्दुल कादिर खान पर मुकदमा भी चला था, हालांकि 2004 में उस वक्‍त के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने उन्हें माफी दे दी थी। कोरिया लंबी दूरी की मिसाइल विकासित करने के दावा करता रहा है, लेकिन इस बात पर अब भी संशय है कि वह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने के करीब है।

अमेरिका तक मार करने में सक्षम है कोरिया की मिसाइलें

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ICBM में परमाणु मुखास्‍त्र ले जाने में सक्षम है। 1998 में कोरिया ने नोडिंग मिसाइल का सफल परीक्षण किया था, दक्षिण कोरिया के अधिकांश हिस्से और जापान जिसके निशाने पर हैं। 1000 किमी तक मार करने में सक्षम नोडिंग मिसाइल परमाणु ह‌थियार भी ले जा सकती है।

2000 में कोरिया ने टाइपोडांग मिसाइलें विकसित की थी। ये मिसाइल की एक शृंखला है, जो अमेरिका के अलास्का तक मारकर सकती है।

क्या होता है हाइड्रोजन बमः परमाणु बम का ही एक प्रकार है हाइड्रोजन बम। यह परमाणु बम के मुकाबले हजारों गुना ज्यादा विनाशकारी होता है। इसमें हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटीरियम और ट्राइटिरियम का प्रयोग होता है। इसमें परमाणुओं के संलयन से विस्फोट होता है, जबकि परमाणु बम में अणुओं के विखंडन से विस्फोट होता है। इसको सामान्य भाषा में समझने के लिए सूर्य का उदाहरण दिया जा सकता है।

सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा भी हाइड्रोजन के परमाणुओं के संलयन का नतीजा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाइड्रोजन बम विस्फोट से कितनी ऊर्जा निकल सकती है। इससे पहले अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस हाइड्रोजन बम के परीक्षण कर चुके हैं।

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