चीनः एक बच्चा होने के साइड इफेक्ट्स

sachin yadavसचिन यादव Updated Tue, 26 Nov 2013 04:25 PM IST
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एक ऐसे संसार में बड़ा होना, जहां न भाई हो और न बहन, तो कैसा होगा? क्या भाई-बहन वाक़ई ज़िदगी में इतने महत्वपूर्ण हैं?
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शोधकर्ता इस पर सालों से विचार कर रहे हैं। इसका जवाब जानने के लिए चीन का उदाहरण सबसे उपयुक्त है क्योंकि यहाँ तीन दशक से 'एक संतान नीति' लागू है।
इस नीति के लागू होने से पहले चीनी परिवार में औसतन चार बच्चे हुआ करते थे। वर्ष 1979 में एक संतान नीति लागू होने के बाद यहां ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई।
लगभग एक पीढ़ी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश में पिछले हफ़्ते इस नीति में ढील देने का निर्णय लिया गया।

चीन के अपेक्षाकृत पिछड़े प्रांत गांशू से लौटे आर्ट फ़ोटोग्राफर फ़ान शी सैन बताते हैं, ''क़स्बे की सड़कों पर चटख लाल रंग के बैनर लगे हुए हैं। ये बताते हैं कि लोगों को बच्चे कम से कम और सूअर ज्यादा से ज्यादा पैदा करने चाहिए।''

फ़ान ख़ुद भी एक ही संतान के पिता हैं। उन्होंने ऐसे इकलौते बच्चों की तस्वीरें लीं, जो भाई-बहन की जगह टेडी बीयर के साथ बड़े हो रहे थे।

उन्होंने बताया कि अधिकतर लोगों को इसका अहसास नहीं कि उनकी एक विशेष पहचान है। लोग अब इस नीति पर सवाल उठाना भी बंद कर चुके हैं।

साल 1979 में जब यह नीति लागू हुई थी तब उन लोगों को भारी परेशानी हुई, जो परंपरागत रूप से बड़े परिवारों में रहने के आदी थे। मगर इन परिस्थितियों में बड़ी हुई संतानें इससे अनभिज्ञ थीं।

मैसाच्युसेट्स में एमहर्स्ट कॉलेज की समाजशास्त्री वानेसा फ़ॉग ने 1997 से ही 2,273 चीनी बच्चों के एक समूह पर नज़र रखी। इन बच्चों को वो 'सिंगलटंस' कहती हैं।

भाई-बहन का अंतर
उन्होंने इस समूह के 600 से 1,300 बच्चों का हर साल साक्षात्कार लिया और यह जानना चाहा कि बग़ैर भाई-बहन के उनकी ज़िंदगी कैसी कट रही है?

इन बच्चों के लिए चचेरे और आनुवंशिक भाई-बहन में अंतर समझना मुश्किल रहा क्योंकि ये बच्चे आनुवंशिक भाई-बहन के बिना ही बड़े हुए हैं।

यहां तक कि इस समूह के किशोरवय बच्चों को भी समझाना पड़ता है कि उनका कोई आनुवंशिक भाई या बहन नहीं है।

फ़ॉग बताती हैं, "वे कहते हैं, 'हां, मेरे कई भाई-बहन हैं।' और मैं कहती हूं 'वह कैसे, क्योंकि बहुत सारे लोगों के भाई-बहन ही नहीं हैं?' और उनका जवाब होता है, 'ओह, मैं अपनी चाची के बच्चों के बारे में बात कर रहा हूं।''

चीन की एकल संतान नीति
एक संतान की नीति से चीन में 40 करोड़ जन्म रोके जाने का अनुमान है। उल्लंघन करने वाले लोगों को जुर्माने से लेकर नौकरी खोने या ज़बरदस्ती गर्भपात तक की सज़ा होती है।

कुछ प्रांतों में समय के साथ नीति में ढील दी गई और अकेली संतान वाले अभिभावकों को दूसरी संतान की इजाज़त दी गई।

चीन के जातीय अल्पसंख्यकों और ग्रामीण परिवारों को एक से अधिक बच्चे पैदा करने की इजाज़त है।

इसके अलावा ये बच्चे एक और अनुभव से गुजरते हैं। फ़ॉग बताती हैं,''हर परिवार के पास शिक्षा और उपभोग के लिए अचानक आमदनी की एक बड़ी राशि आ गई है क्योंकि जो संसाधन कई बच्चों को पालने में खर्च होते थे अब वह एक बच्चे पर होते हैं।''

नतीजतन चीन की ये अकेली संतानें अपनी पिछली पीढ़ी से ज़्यादा शिक्षित हैं। इससे चीन की शिक्षा भी रातों-रात महंगी हो गई है।

पहले अभिभावक आमतौर पर अपने बच्चों में से किसी एक को ही स्कूल में पढ़ाने पर ध्यान देते थे। अब एक ही बच्चे पर माता-पिता दोनों का ध्यान रहता है।

बीजिंग में पली-बढ़ीं 32 वर्षीय जे यांग कहती हैं, "मेरे ड्राइवर पिता और अकाउंटेंट मां ने अपना पूरा वक़्त मुझे दिया। इससे मेरी ज़िंदगी की राह ही बदल गई।"

माता-पिता का ध्यान
उन दंपतियों को भविष्य में छूट दी जाएगी जिनमें से एक अपने माता-पिता की एकमात्र संतान है। चीन में वर्ष 2012 में 1.6 करोड़ बच्चे पैदा हुए। परिवार नियोजन आयोग का अनुमान है कि अब हर साल 10 लाख ज्यादा बच्चे पैदा होंगे। ज्यादातर लोगों ने एक से ज्यादा बच्चे पैदा करना छोड़ दिया है क्योंकि शिक्षा महंगी हो गई है।

मेट्रोपोलिस डेली के एक सर्वे में 25 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वे एक संतान के पक्ष में हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि अगर उनके और भाई-बहन होते तो माता-पिता इतना ध्यान न देते। उनके पिता की पीढ़ी के चीनी अभिभावक अपने बच्चों की ज़िंदगी की दिशा तय करना पंसद करते हैं।

जे यांग एक फ़ार्मास्यूटिकल कम्पनी में सेल्स एक्जिक्यूटिव हैं। विपणन का काम आमतौर पर चीनी मध्यवर्ग का पसंदीदा पेशा है।

वह कहती हैं, "अगर उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव न होता तो मैं कोई और पेशा चुनती।"

अगर मौक़ा मिले तो वह टूरिज़्म इंडस्ट्री में जाना चाहती हैं या फिर बीज़िंग छोड़ना चाहती हैं।

हालांकि वह इकलौती संतान होने को सकारात्मक भी मानती हैं। वह कहती हैं, ''इकलौती होने के कारण मुझे ज़्यादा प्यार मिला। मैं अपने अभिभावकों को किसी और से साझा नहीं करना चाहती।''

यह डर था कि अकेली संतान नीति का कुछ दुष्प्रभाव हो सकता है। लेकिन चीनी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों समेत कई दूसरे अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे बच्चों के व्यक्तित्व में विकृति नहीं है। इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है कि ये बच्चे अन्य से किसी भी मायने में अलग हैं।

लेकिन कुछ अध्ययनों में कहा गया है कि चीन के ये 'सिंगलटंस' अलग हैं। इस साल ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने बीज़िंग में एक अध्ययन करके उसका परिणाम जारी किया है। इसमें गेम्स और सर्वे द्वारा व्यवहारगत लक्षणों को आंकने की कोशिश की गई है।

अलग हैं ये बच्चे
अकेली संतान पर माता-पिता अपनी आकांक्षाएं लादते हैं जिससे उनकी ज़िंदगी प्रभावित होती है। मेलबर्न विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री निस्वा एर्केल बताते हैं, ''हमने पाया कि यह नीति लागू होने के बाद पैदा हुए बच्चे कम भरोसेमंद, ख़तरे से विमुख रहने वाले और कम प्रतिस्पर्धी होते हैं। इस सर्वे में हमने पाया कि ऐसे बच्चे ज़्यादा निराशावादी और कम आत्मबल वाले होते हैं।"

1970 और 1980 में पैदा हुए बच्चों को परवरिश के लिए ज़्यादा बड़े परिवार मिले, जबकि हाल में पैदा हुए बच्चों को बहुत छोटा परिवार मिला।

फ़ॉग कहती हैं, ''चीन बहुत बदल गया है, संबंध उतने क़रीबी नहीं रहे जितने पहले थे। पहले पलायन नहीं होता था, लेकिन अब देश के अंदर और बाहर दोनों तरह का पलायन तेज़ हो गया है।''

जे यांग की एक ही बेटी है। हालांकि जे को दूसरे बच्चे की इजाज़त मिल गई है।

हालांकि वह तब तक दूसरे बच्चे की योजना नहीं बनाना चाहतीं जब तक कि उसके ख़र्च आदि के बारे में सुनिश्चित न हो जाए। चीन में कई जगह एक संतान नीति अब भी लागू है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह इतिहास की बात हो जाएगी।

फिर भी इस बात पर बहस चलती रहेगी कि इस नीति से 'सिंगलटन' को नुक़सान हुआ या फ़ायदा।
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