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एक आदमी जो बोलता है 30 भाषाएं
Updated Wed, 15 Jan 2014 06:16 PM IST
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जिस उम्र में बच्चे खेलना कूदना पसंद करते हैं उस उम्र में ग्रीस के क्रिट द्वीप के रहने वाले हिज़यानिइस इकोनोमुस को एक अलग ही शौक़ चढ़ा।
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क्रीट एक पर्यटन स्थल है और इकोनोमुस बताते हैं कि उस ज़माने में वहां जर्मनी, जापान, डच और रुस के लोग आते रहते थे। इन सैलानियों के ये शब्द उन्हें समझ में तो नहीं आते थे लेकिन अपनी ओर आकर्षित ज़रुर करते थे।
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सात साल की उम्र में ही उन्हें इन भाषाओं को समझने और बोलने की रुचि जगी। इकोनोमुस ज्यादातर यूरोपीय भाषाएं बोल लेते हैं। उसके अलावा वे मैंडरिन, अरबी, तु्र्की और फ़ारसी समेत 30 भाषाएं जानते हैं। वे यूरोपीय कमीशन में काम करते हैं।
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इकोनोमुस बताते हैं कि उनके परिवार में लोग केवल ग्रीक्लिश भाषा बोलते हैं जिसमें अंग्रेज़ी ग्रीक लहजे में बोली जाती है। साथ ही उन्हें एक निजी स्कूल में अंग्रेज़ी भाषा सीखने के लिए भेजा जाता था।
तुर्की भाषा सीखने का अपना अनुभव बताते हुए वे कहते हैं, "जब मैंने अपने माता-पिता को कहा कि मुझे तुर्की सीखनी है तो उनकी त्योरियां चढ़ गईं। उस ज़माने में तुर्की लोगों को 'दुश्मन' समझा जाता था। लेकिन मुझे बचपन से सिखाया गया कि कोई दुश्मन नहीं होता सब दोस्त होते हैं और तुर्की भी तो इंसान ही हैं। मेरे माता-पिता यहां हर साल होने वाले विरोध प्रदर्शन में जाते थे जिसमें तुर्की शरणार्थी और नेता भाग लेते थे। उन्होंने इस प्रदर्शन में जाकर पूछा कि हमारा बेटा तुर्की सीखना चाहता है।"
इरोनोमुस के लिए सबसे मुश्किल मैंडरिन भाषा सीखना था।
मुझे अभी भी याद है कि मेरी उस टीचर का नाम आयशे था। एक ग्रीक होने के कारण तुर्की भाषा सीखना विवादस्पद तो था ही।
इकोनोमुस कहते हैं कि मुझे सबसे ज्यादा कठिनाई मैंडरिन सीखने में आई जो मेरे लिए अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
वे बताते हैं कि न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से क्लासिकल लैग्वेंजेज़ में स्नातक करने के बाद मुझे आगे की पढ़ाई करने के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी जाना था लेकिन इस बीच में मेरे पास एक साल का समय था। मैंने मैंडरिन भाषा सीखने की सोची।
उनके अनुसार, ''मैं बीजिंग चला गया और वहां बीजिंग लैंग्वेज इंस्टीट्यूट में दाख़िला ले लिया। यूरोपीय भाषा से मैंडरिन का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। इस भाषा को सीखना मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन साथ ही मुझे इससे प्यार हो गया। हालांकि ये चुनौती अभी भी बनी हुई है। लेकिन मेरे सहयोगी जब इस भाषा को नहीं पढ़ पाते तो मुझे और मज़ा आता है। साथ ही यूरोपीय कमीशन जहां मैं काम कर रहा हूं वे मुझे एक साल में दो बार चीन भी भेजते हैं।''
कई भाषाओं के बोलने पर पैदा होने वाले असमंजस के बारे में वे बताते हैं कि जब एक भाषा बोलते हैं, मुहावरे भी बोलते हैं तो कई बार आप भी असमंजस में पड़ जाते हैं, तो कई बार एक शब्द के अलग-अलग मतलब होने पर फँस भी जाते हैं।
असमंजस
ऐसा ही एक अनुभव बताते हुए वे कहते हैं कि जब मैं ब्राज़ील में पुर्तगाली पढ़ रहा था तो आर यू श्योर पूछता था जिसे स्पेनिश भाषा में तस से व्यूरो कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि क्या आप सेफ़ हैं? तो पुर्तगाल में लोग सोचते थे कि मैं उनकी सेफ्टी को लेकर क्यों सवाल पूछ रहा हूं। ऐसी ही कई चीज़े अरबी, तुर्की और फ़ारसी में भी हैं। ये दिमाग़ में चलने वाला एक जिमनास्टिक है जो काफ़ी चुनौतीपूर्ण है।''
इकोनोमुस के मुताबिक़ उन्हें भाषाएं सीखने के बाद देशों के लोगों, उनकी परंपराओं और भोजन के बारे में जानने में आसानी हुई है।
वे कहते हैं कि उस ज़माने में न तो इंटरनेट था और न ही सैटेलाइट, ऐसे में भाषा सीखना मुश्किल था लेकिन अब ये काफ़ी आसान हो गया है।