{"_id":"5bccf118bdec22694b42af88","slug":"now-the-condition-of-the-heart-of-the-fetus-is-found-at-home","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब घर पर ही पता लग जाएगी गर्भस्थ शिशु के दिल की हालत","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"अन्य देश","slug":"rest-of-world"}}
अब घर पर ही पता लग जाएगी गर्भस्थ शिशु के दिल की हालत
एजेंसी, लंदन
Updated Mon, 22 Oct 2018 04:17 AM IST
विज्ञापन
new born child
अब गर्भवती महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए बार-बार डॉक्टरों तक नहीं जाना होगा। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सेंसर की ईजाद की है, जिसकी मदद से गर्भवती महिला घर पर खुद ही अपने गर्भ में मौजूद शिशु के दिल की धड़कन जांचकर उसके स्वास्थ्य का आकलन कर पाएगी।
ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की तरफ से ईजाद किए गए इस टूल की मदद से गर्भ के दौरान ही बच्चे के हृदय से जुड़ी जन्मजात परेशानियों का पता लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं गर्भनाल संकुचन सरीखी परेशानी या प्री-मेच्योर डिलीवरी की आवश्यकता का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
ससेक्स विश्वविद्यालय की लेक्चरर एलिजाबेथ रेंडन-मारेल्स का कहना है कि इस तकनीक से गर्भकाल के दौरान ऐसी महिलाओं को बेहद लाभ होगा, जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह समेत तमाम हाई-रिस्क फैक्टर वाली बीमारियों से इस दौरान जूझती हैं और इसके चलते गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए उनका नियमित परीक्षण आवश्यक होता है।
विज्ञापन
पेट के ऊपर से ही परीक्षण
शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने इस नए इलेक्ट्रोमीटर आधारित एम्पलीफायर प्रोटोटाइप को इलेक्ट्रिक पोटेंशियल सेंसिंग (ईपीएस) तकनीक के आधार पर बनाया है, जिसमें वर्तमान में गर्भस्थ शिशु की जांच के लिए उपयोग किए जाने वाले सिल्वर क्लोराइड इलेक्ट्रोड को हटा दिया गया है। नई तकनीक में महज गर्भवती महिला के पेट की त्वचा पर उपकरण को रखकर गर्भस्थ भ्रूण की इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम पर नजर रखी जा सकती है।
विज्ञापन
ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की तरफ से ईजाद किए गए इस टूल की मदद से गर्भ के दौरान ही बच्चे के हृदय से जुड़ी जन्मजात परेशानियों का पता लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं गर्भनाल संकुचन सरीखी परेशानी या प्री-मेच्योर डिलीवरी की आवश्यकता का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
ससेक्स विश्वविद्यालय की लेक्चरर एलिजाबेथ रेंडन-मारेल्स का कहना है कि इस तकनीक से गर्भकाल के दौरान ऐसी महिलाओं को बेहद लाभ होगा, जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह समेत तमाम हाई-रिस्क फैक्टर वाली बीमारियों से इस दौरान जूझती हैं और इसके चलते गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए उनका नियमित परीक्षण आवश्यक होता है।
विज्ञापन
पेट के ऊपर से ही परीक्षण
शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने इस नए इलेक्ट्रोमीटर आधारित एम्पलीफायर प्रोटोटाइप को इलेक्ट्रिक पोटेंशियल सेंसिंग (ईपीएस) तकनीक के आधार पर बनाया है, जिसमें वर्तमान में गर्भस्थ शिशु की जांच के लिए उपयोग किए जाने वाले सिल्वर क्लोराइड इलेक्ट्रोड को हटा दिया गया है। नई तकनीक में महज गर्भवती महिला के पेट की त्वचा पर उपकरण को रखकर गर्भस्थ भ्रूण की इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम पर नजर रखी जा सकती है।