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नोबेल पुरस्कार विजेता मार्केज़ का निधन

Fri, 18 Apr 2014 11:47 AM IST
Updated Fri, 18 Apr 2014 11:47 AM IST
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Nobel prize winning author Gabriel Garcia Marquez dies at 87

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कोलंबिया के मशहूर उपन्यासकार गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ का निधन हो गया है। मार्केज़ को उनके कालजयी उपन्यास हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सालीट्यूड के लिए जाना जाता है।

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ये वो पुस्तक थी जिसके बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था, ''बुक ऑफ जेनेसिस के बाद ये साहित्य की पहली कृति है जिसे पूरी मानव नस्ल को पढ़ना चाहिए।'' मार्केज़ को उनके नाना-नानी ने उत्तरी कोलंबिया के बड़े ही ख़स्ताहाल शहर आर्काटका में पाला पोसा था। मार्केज़ अपनी सभी कृतियों के लिए अपने बचपन के पालन पोषण को श्रेय देते हैं।
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मार्केज़ ने कॉलेज में क़ानून की पढ़ाई शुरु की पर पढ़ाई बीच में ही छोड़कर उन्होंने पत्रकारिता शुरु कर दी। 1954 में वो एक अख़बार के काम के सिलसिले में रोम गए और उसके बाद से अधिकतर समय वो विदेश में ही रहे। पेरिस, वेनेजुएला और मेक्सिको में उनके जीवन का अधिक समय बीता।
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पत्रकारिता से किया करियर का आगाज़

Nobel prize winning author Gabriel Garcia Marquez dies at 87

जाने माने उपन्यासकार विलियम फॉकनर से प्रभावित मार्केज़ ने अपना पहला उपन्यास 23 वर्ष की उम्र में लिखा था। ये उपन्यास 1955 में प्रकाशित हुआ। 1965 में उन्हें हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सॉलीट्यूड के पहले अध्याय का ख़्याल आया।

18 महीने के बाद वो जब किताब पूरी कर उठे तो उन पर 12 हज़ार डॉलर का कर्ज़ था। लेकिन मज़े की बात ये थी कि उनके हाथ में 1300 पन्नों का वो उपन्यास था जो अपने समय का सबसे बेहतरीन उपन्यास कहलाने वाला था।

यह उपन्यास जब स्पेनी भाषा में प्रकाशित हुआ तो एक हफ्ते में ही इसकी सारी प्रतियां बिक गईं और अगले तीस वर्षों में इस उपन्यास की दो करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं और तीस से अधिक भाषाओं में उसका अनुवाद हो चुका है।

मार्केज़ खुद कहते थे कि उनका सरियलिज़्म लातिन अमरीका के यथार्थ से आया है। कोलंबिया में बढ़ती हिंसा को देखते हुए मार्केज़ की राजनीतिक प्रतिबद्धताएं भी बढ़ीं और इसके बाद रचना हुई जनरल इन हिज़ लैबरिंथ और ऑटोमन ऑफ द पैट्रियार्क की।

मार्केज़ लगातार अपने वामपंथी रुझान वाला लेखन प्रकाशित करते रहे और आगे चलकर फ्रांसित मितरां के दोस्त बने। उनके मित्रों में फिदेल कास्त्रो भी थे। उनका एक और उपन्यास आया 1986 में लव इन द टाइम ऑफ कॉलेरा। ‘नज़रिए और भाषा के इस जादूगर’ को 1982 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

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