नेपालः 'न डॉक्टर, न हेलिकॉप्टर, पैदल ही आया'
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नेपाल सरकार की तमाम अपीलों के बाद दुनियाभर से 25 देश राहत सामान और बचाव दल वहां भेज रहे हैं। पर इन राहत कर्मियों के मुताबिक उन्हें नेपाल सरकार से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिल रहे बल्कि वो खुद ही काम खोजने पर मजबूर हो गए हैं।
पोलैंड के एक एनजीओ से आई ल्यूकस और उनकी डॉक्टर्स की टीम काठमांडू के बीर अस्पताल में काम कर रही थीं। पर उनके मुताबिक वहां कुछ खास काम ही नहीं था।
ल्यूकस ने बताया, "भूकंप के अगले ही दिन जब हम काठमांडू पहुंचे, तब वहां बहुत अफरा-तफरी थी। अगले दो दिन भी अस्पताल में कोई क्रिटिकल केस नहीं आ रहा था।" भूकंप से हुई तबाही ने काठमांडू के बाहर के इलाकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। लेकिन वहां से लोगों को राजधानी तक लाने की कवायद बहुत धीमी रही।
निकल पड़े डॉक्टर
यही अनुभव इसराइल से आए डॉक्टरों की टीम का भी था। आरिक श्यूस्टर ने बताया कि काठमांडू में बचाव काम के लिए आगे आ रही संस्थाओं को जानकारी और दिशा देने की कोई व्यवस्था कायम नहीं की गई है।
उन्होंने कहा, "ये बेहतर होता कि एक सेंट्रल अथॉरिटी सब तय करती। पर ऐसा तो है नहीं। पर हम भी इससे रुके नहीं। तय किया और काठमांडू से निकलकर यहां काम करने लगे।"
आरिक की टीम अब भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए इलाकों में से एक, सिंधूपालचौक में, मेडिकल कैंप लगाकर काम कर रही है। पहाड़ी पर सेना के बेस पर बनाए गए इस कैंप में ये उन घायल लोगों को प्राथमिक उपचार दे रहे हैं जिन्हें सेना आसपास के शहरों और गांवों से लेकर आ रही है।
जिन्हें बड़े अस्पतालों में इलाज की जरूरत है उन्हें अलग-अलग देशों से भेजे जा रहे हेलिकॉप्टरों के जरिए काठमांडू लो जाया जा रहा है। भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर इसमें सबसे आगे हैं।
सरकार की सफाई
डॉक्टरों के इस अनुभव के बारे में जब हमने नेपाल के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता लक्ष्मी ढकाल से बात की तो उन्होंने इस शिकायत को गलत बताया। उन्होंने कहा, "जैसा कि आपने भी देखा होगा, ज्यादातर मरीज काठमांडू में ही हैं। क्योंकि उन्हें हेलिकॉप्टर से यहां लाया गया है। शायद इसीलिए डॉक्टरों को काठमांडू में रोका गया हो।"
ढकाल के मुताबिक जो संस्थाएं स्वास्थ्य मंत्रालय को संपर्क कर रही हैं उन्हें बहुत सोच-समझकर उन जगहों पर भेजा जा रहा है जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
'पैदल ही लेकर आया'
जिन इलाकों का दौरा किया गया वहां डॉक्टरों की कमी थी और इलाज का इंतजार करनेवाले लोगों का तांता। पहाड़ पर बने मेडिकल कैम्प में भी मरीजों की तादाद इतनी थी कि हेलिकॉप्टर में ले जाए जाने के लिए भी लाइन लगानी पड़ रही थी। अपनी घायल पत्नी को यहां लाए एक आदमी ने कहा, "चार दिन तक इंतज़ार किया, पर ना कोई डॉक्टर आया, ना हेलिकॉप्टर। आखिरकार मैं इन्हें पैदल ही यहां तक लेकर आया हूं।"