फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   nepal earthquake chances in future

नेपाल में फिर आ सकता है बड़ा भूकंप, पता चली वजह

Mon, 10 Aug 2015 11:02 AM IST
Updated Mon, 10 Aug 2015 11:02 AM IST
विज्ञापन
nepal earthquake chances in future

शोधकर्ताओं का कहना है कि नेपाल में आए ज़बरदस्त भूकंप के बाद भी हिमालय के भूगर्भ की संरचना में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इससे बड़े भूकंप की आशंका अभी भी बनी हुई है।

विज्ञापन


जरनल 'नेचर जियोसाइंस एंड साइंस' के सह लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में काम कर रहे जीन फिलिप एवक ने कहा, ''अभी भी ऐसे हालात बने हुए हैं, जिससे पश्चिमी नेपाल में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है।''
विज्ञापन


उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को एक ईमेल के ज़रिए बताया, ''गोरखा ज़िले में भूकंप आने से पहले जो हालात थे, वे अभी भी बने हुए हैं।" 25 अप्रैल को नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र गोरखा ज़िले में था। इसके बाद 12 मई को फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.3 मापी गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेपाल में पिछले 80 सालों में आया यह सबसे ख़तरनाक भूकंप था, जिसमें क़रीब 8,700 लोगों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही क़रीब 5 लाख लोग बेघर हो गए थे।

भूकंप के हालात बन जाते हैं

nepal earthquake chances in future

नेपाल दो टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच बसा हुआ है, जो शुरू से दवाब में रहे हैं। एक प्लेट पर भारत है जो सालाना क़रीब दो सेंटीमीटर की रफ़्तार से उत्तर और पूर्व की ओर खिसकता रहता है। वहीं दूसरी प्लेट पर यूरोप और एशिया के दूसरे हिस्से हैं। इसके साथ ही मेन हिमालयन थ्रस्ट (एमएचटी) में भी कोई न कोई हरकत होती रहती है।

ऐसे में जब इस जगह पर अधिक दबाव पड़ता है तो भूकंप के हालात बन जाते हैं। हाल में आए भूकंप का कारण 150 किलोमीटर लंबे और 50 किलोमीटर चौड़े इलाके पर दशकों से पड़ रहा दवाब था। विशेषज्ञाों के मुताबिक़, इस भूकंप के बाद काठमांडू दक्षिण की तरफ क़रीब 1.5 मीटर खिसक गया और क़रीब एक मीटर ऊपर तरफ उठ गया। इसके साथ ही माउंट एवरेस्ट भी दक्षिण पश्चिम की तरफ तीन सेंटीमीटर खिसक गया है।

20 साल से दवाब बन रहा था

nepal earthquake chances in future

'नेचर जियोसाइंस' पत्रिका के मुताबिक़, ज़मीन के अंदर पिछले 20 साल से दवाब बन रहा था और वह किसी तरह निकल नहीं रहा था। बीते दिनों नेपाल मे आए भूकंप से पश्चिमी हिस्से की तरफ बना दबाव कुछ हद तक बाहर निकल गया। एवक कहते हैं, ''आने वाले समय में पश्चिमी नेपाल में एक बहुत बड़े भूकंप की आशंका बनी हुई है।'

उन्होंने आगे कहा, ''हालांकि यह निकट भविष्य में नहीं होने वाला है। पहले इसकी आशंका बुहत ज़्यादा थी, पर गोरखा में आए भूकंप के बाद यह आशंका काफ़ी हद तक कम हो गई है।''

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में अगर भूकंप आया तो पश्चिमी नेपाल के साथ भारत का उत्तरी हिस्सा भी इसकी चपेट में आ सकता है। अप्रैल में आए भूकंप के बाद भी अभी तक ज़मीन के अंदर का दबाव पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। वैज्ञानिकों के अनुसार अब यह दबाव पश्चिम की तरफ बढ़ गया है, जिसकी वजह से भारत की राजधानी दिल्ली भी इसकी चपेट में आ गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed