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नेपाली सेना प्रमुख साइकिल पर क्यों?
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 22 Dec 2012 10:36 PM IST
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नेपाल के सेना प्रमुख ने शुक्रवार को अपने घर से दफ्तर तक का सफ़र साइकिल से पूरा किया। ऐसा उन्होंने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किया है।
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उन्होंने न केवल ख़ुद साइकिल चलाया बल्कि अपने तमाम वरिष्ठ सहयोगियों से भी कहा है कि वे शुक्रवार को दफ्तर आने के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल न करें। काठमंडू में लेवटिनेंट से लेकर जनरल तक तैनात सभी सैन्य अधिकारियों को अब शुक्रवार के दिन दफ़्तर के समय या तो पैदल चलना होगा, या साइकिल चलाना होगा या फिर सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल करना होगा।
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नेपाली सेना प्रमुख जनरल राणा ने केवल तीन महीने पहले एक लाख की संख्या बल वाली सेना की ज़िम्मेदारी संभाली है। ऐसा कहा जाता है कि जनरल राणा को साइकिल चलाने में काफ़ी मज़ा आता है। शुक्रवार को उन्होंने अपने सरकारी आवास से सेना मुख्यालय तक का तीन किलोमीटर तक का सफ़र एक माउंटेन बाइक पर धूल भरी और व्यस्त सड़कों से होकर पूरा किया।
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पर्यावरण दिवस
जनरल राणा के साथ उनके निजी स्टाफ़ भी थे, और वे भी साइकिल चला रहे थे। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सुरेश शर्मा ने इसके बारे में और अधिक जानकारी देते हुए कहा कि जनरल राणा ने ये फ़ैसला काठमंडू में वायु प्रदूषण को रोकने और यातायात पर दबाव को कम करने के लिए किया है। हम लोगों ने शुक्रवार को स्वच्छ पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।'
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार काठमंडू में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक है। नेपाल हेल्थ रिसर्च काउंसिल के डॉक्टर कृष्ण कुमार ने कहा कि काठमंडू में धूल के जरिए पैदा किए गए पूदूषण का स्तर पर्यावरण मंत्रालय के ज़रिए तय किए गए सीमा से दो से सात गुणा ज्यादा है। नेपाली सेना के इस फ़ैसले का पर्यावरणविदों ने स्वागत किया है।
कदम का स्वागत
नेपाल के एक पर्यावरण विशेषज्ञ तोरन शर्मा का कहना था कि यह एक बहुत ही बढ़िया क़दम है। लेकिन सरकार और ग़ैर-सरकारी संगठनों को भी इसका पालन करना चाहिए ताकि ये कदम और प्रभावी हो सके।
लेकिन पर्यावरणविदों ने कहा कि नेपाल में सड़कें इस तरह की नहीं हैं कि साइकिल चलाने की आदत को बढ़ावा दिया जा सके। लगभग एक साल पहले एक दुखद घटना में साइकिल चलाने के अभियान के एक प्रबल समर्थक डॉक्टर प्रहलाद यॉनज़ोन की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी जब वो साइकिल चला रहे थे।
साइकिल चलाने की मुहिम को बढ़ाने के लिए पर्यावरणविदों ने हाल ही में प्रधानमंत्री को एक साइकिल तोहफ़े में दिया है। सेना प्रमुख के इस क़दम से उम्मीद है कि नेपाल में पर्यावरणविदों और साइकिल समर्थकों के अभियान को नई ताकत मिलेगी।